सुखना सेंक्चुरी के आसपास मनमानी नहीं चलेगी, 24.61 वर्ग किमी एरिया में अनियंत्रित निर्माण पर रोक
हरियाणा सरकार ने सुखना वन्यजीव अभयारण्य के 24.61 वर्ग किमी ईको सेंसिटिव जोन के लिए जोनल मास्टर प्लान अधिसूचित किया ...और पढ़ें

24.61 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र के ईको सेंसिटिव जोन घोषित। (सांकेतिक फोटो)
HighLights
खनन, स्टोन क्रशर और नई आरा मशीनों पर तत्काल रोक।
बड़े होटल, रिसॉर्ट और हाईराइज निर्माण पर प्रतिबंध।
24.61 वर्ग किमी ईएसजेड में जोनल मास्टर प्लान लागू।
जागरण संवाददाता, पंचकूला। सुखना वन्यजीव अभयारण्य के हरियाणा हिस्से में पर्यावरण संरक्षण को लेकर सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। पर्यावरण, वन एवं वन्यजीव विभाग ने 26 अगस्त को अधिसूचना जारी कर अभयारण्य के आसपास 24.61 वर्ग किलोमीटर यानी 6420.99 एकड़ क्षेत्र के ईको सेंसिटिव जोन (ईएसजेड) के जोनल मास्टर प्लान को अधिसूचित कर दिया है।
इसके साथ ही इस क्षेत्र में अनियंत्रित निर्माण और पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाली गतिविधियों पर रोक का रास्ता साफ हो गया है। जोनल मास्टर प्लान के दायरे में पंचकूला के आसपास के प्रेमपुरा, सुखोमाजरी, दमाला, लोहगढ़, मानकपुर ठाकुरदास, सूरजपुर, चंडीमंदिर कोटला, दारा खनोरी, रामपुर, सकेतड़ी और महादेवपुर समेत आसपास का परिदृश्य शामिल किया गया है।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि ईएसजेड में विकास गतिविधियों को पूरी तरह बंद करने के बजाय उन्हें पर्यावरण के अनुकूल तरीके से संचालित किया जाएगा।
पुराने स्वीकृत भूमि उपयोग को रखा बरकरार
जोनल मास्टर प्लान में मौजूदा जल निकायों के संरक्षण, कैचमेंट और वाटरशेड प्रबंधन, भूजल संरक्षण, मिट्टी एवं नमी संरक्षण तथा स्थानीय लोगों की आजीविका को प्राथमिकता दी गई है।
मौजूदा स्वीकृत भूमि उपयोग और आधारभूत ढांचे को सामान्य तौर पर बरकरार रखा गया है। हालांकि ईएसजेड के नियमों के विपरीत किसी नए भूमि उपयोग अथवा विकास की अनुमति नहीं होगी।
खनन और स्टोन क्रशर पर तत्काल रोक
ईएसजेड में नए और मौजूदा खनन, पत्थर उत्खनन तथा स्टोन क्रशिंग इकाइयों को तत्काल प्रतिबंधित कर दिया गया है। हालांकि स्थानीय निवासियों की वास्तविक घरेलू जरूरतों के लिए मकान बनाने या मरम्मत के लिए मिट्टी की खोदाई को अपवाद के तौर पर अनुमति दी गई है।
नई आरा मशीनें लगाने पर भी रोक रहेगी। मौजूदा आरा मशीनों के लाइसेंस की अवधि समाप्त होने के बाद उनका नवीनीकरण नहीं किया जाएगा। बड़े पैमाने पर व्यावसायिक पशुपालन और मत्स्य पालन प्रतिष्ठानों पर भी प्रतिबंध रहेगा।
भूजल के व्यावसायिक इस्तेमाल पर भी रोक
प्राकृतिक जल संसाधनों, जिसमें भूजल भी शामिल है, के व्यावसायिक उपयोग को प्रतिबंधित किया गया है। नए ताप विद्युत संयंत्र और बड़े जलविद्युत परियोजनाओं की स्थापना भी प्रतिबंधित रहेगी।
होटल-रिसार्ट और हाईराइज निर्माण पर कड़ा नियंत्रण
सुखना अभयारण्य के जलग्रहण क्षेत्र में नए व्यावसायिक होटल और रिसार्ट स्थापित करने की अनुमति नहीं होगी। संरक्षित क्षेत्र की सीमा से एक किलोमीटर के बाहर से ईएसजेड की बाहरी सीमा तक पर्यटन गतिविधियां पर्यटन मास्टर प्लान और वन संबंधी कानूनों के अनुरूप ही संचालित की जा सकेंगी।
जलग्रहण क्षेत्र के भीतर नए निर्माण पर भी रोक रहेगी। हालांकि स्थानीय निवासियों को अपनी भूमि पर वास्तविक आवासीय जरूरतों के लिए भवन उपविधियों के अनुसार निर्माण की अनुमति दी गई है।
सरकार ने ईएसजेड की पारिस्थितिक अखंडता बनाए रखने के लिए बहुमंजिला आवासीय समूह, बड़े होटल, रिसार्ट और बड़े पैमाने के हाईराइज निर्माण को अनुमति नहीं देने का स्पष्ट प्रावधान किया है।
खेती और गैर-प्रदूषणकारी गतिविधियों को बढ़ावा
ईएसजेड में स्थानीय कृषि, बागवानी, डेयरी, छोटे स्तर के पोल्ट्री फार्म, गैर-प्रदूषणकारी कुटीर उद्योग, जैविक खेती और कृषि वानिकी जैसी गतिविधियों को नियमों के तहत बढ़ावा दिया जाएगा। इससे स्थानीय लोगों की आजीविका और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाने का प्रयास किया गया है।
20.33 प्रतिशत क्षेत्र में मौजूदा शहरी विकास
जोनल मास्टर प्लान के अनुसार हरियाणा की ओर एक किलोमीटर बफर क्षेत्र में 1235.76 एकड़ यानी करीब पांच वर्ग किलोमीटर क्षेत्र आता है, जो कुल ईएसजेड का लगभग 20.33 प्रतिशत है। इसमें कालका नगर परिषद, पंचकूला नगर निगम तथा माता मनसा देवी शहरी परिसर के सेक्टर-1, 2 और 3 के क्षेत्र भी शामिल हैं।
