फाॅर्च्यूनर लूट मामले में पंजाब का युवक बरी, 8 साल पुराने मामले में पंचकूला Court का फैसला
पंचकूला की जिला अदालत ने 8 साल पुराने फॉर्च्यूनर लूट मामले में पंजाब के विक्रमजीत सिंह को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया। पीड़ित चालक द्वारा आरोपित ...और पढ़ें

पंचकूला जिला अदालत ने साक्ष्यों के अभाव में युवक को किया बरी।
HighLights
अदालत में पीड़ित चालक ने आरोपित को पहचानने से किया इनकार।
बरी होने वाला युवक मोगा के धर्मकोट के रहने वाला विक्रमजीत सिंह।
पुलिस ने घटनास्थल या आसपास की सीसीटीवी फुटेज पेश नहीं।
जागरण संवाददाता, पंचकूला। फाॅर्च्यूनर लूट के आठ साल पुराने मामले में जिला अदालत ने आरोपित को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया। आरोपित की पहचान पंजाब के मोगा के धर्मकोट के रहने वाले विक्रमजीत सिंह उर्फ विक्की (29) के तौर पर हुई है।
अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपित की पहचान और अपराध में उसकी संलिप्तता को संदेह से परे साबित नहीं कर सका। इतना ही नहीं पीड़ित चालक ने कोर्ट में आरोपित की पहचानने से इनकार कर दिया।
मामला छह जनवरी 2018 की रात का है। शिकायतकर्ता रणधीर सिंह, अरुणदीप सिंगला के चालक के तौर पर काम करता था। वह अपने मालिक को सेक्टर-9 स्थित ब्रू एस्टेट लेकर आया था।
अरुणदीप के अंदर जाने के बाद रणधीर फाॅर्च्यूनर में बैठा था। इसी दौरान एक युवक ने कार की खिड़की खटखटाकर माचिस या लाइटर मांगा। खिड़की खोलते ही उसने रणधीर के सिर पर पिस्तौल तान दी।
तभी दूसरा युवक कार में घुस आया। दोनों ने उसे बंधक बना लिया और इसके बाद स्कार्पियो में आए उनके साथियों की मदद से फाॅर्च्यूनर को सेक्टर-21 फ्लाईओवर की तरफ ले गए। जीरकपुर स्थित माया गार्डन सोसायटी के पास वीआईपी रोड पर खेत में फेंक दिया गया और गाड़ी लेकर फरार हो गए।
जांच के दौरान गिरफ्तार आरोपित हरमिसरन सिंह उर्फ सिमरन और अजयपाल सिंह ने पुलिस पूछताछ में वारदात में विक्रमजीत का नाम बताया था। बाद में विक्रमजीत को गिरफ्तार किया गया।
हालांकि मामले में हरमिसरन सिंह उर्फ सिमरन को 13 अप्रैल 2023 को भगोड़ा घोषित किया जा चुका है, जबकि अजयपाल सिंह की मौत के बाद उसके खिलाफ कार्यवाही खत्म कर दी गई थी।
न सीसीटीवी मिला, न वैज्ञानिक साक्ष्य
अभियोजन पक्ष की जांच में कई कमियां थी। पुलिस ने घटनास्थल या आसपास की सीसीटीवी फुटेज अदालत में पेश नहीं की। इसके अलावा आरोपित की काॅल डिटेल रिकाॅर्ड, मोबाइल लोकेशन, फिंगरप्रिंट, डीएनए या अन्य वैज्ञानिक साक्ष्य भी पेश नहीं किए गए।
न ही कोई स्वतंत्र गवाह बनाया गया। अदालत ने स्पष्ट किया कि आपराधिक मामले में गंभीर संदेह भी कानूनी प्रमाण का विकल्प नहीं हो सकता। इसलिए अदालत ने विक्रमजीत सिंह उर्फ विक्की को सभी आरोपों से बरी कर दिया।