15 वर्ष पुराने दोहरे हत्याकांड में महिला की 7वीं बार जमानत खारिज, पंचकूला Court सख्त; कारोबारी और बेटे की बेरहमी से मारा था
पंचकूला में 15 साल पुराने दोहरे हत्याकांड मामले में आरोपित महिला शिल्पा की सातवीं बार जमानत अर्जी खारिज हो गई है। अदालत ने कहा कि हत्या जैसे गंभीर अपर ...और पढ़ें

हत्या केस में महिला की 16 जुलाई 2022 को गुजरात के वडोदरा से हुई थी गिरफ्तारी।
HighLights
महिला शिल्पा को 2022 में वड़ोदरा से किया था गिरफ्तार।
कोर्ट ने कहा, गंभीर अपराध में जमानत देना न्यायहित में नहीं।
पैसों के लेन-देन में पति के साथ मिलकर की थी वारदात।
जागरण संवाददाता, पंचकूला। 15 वर्ष पहले कारोबारी विनोद मित्तल और उनके चार वर्षीय बेटे यशान के अपहरण और हत्या के मामले में मुख्य आरोपित राजू की पत्नी शिल्पा उर्फ शिल्पी को अदालत से लगातार सातवीं बार भी राहत नहीं मिली।
पंचकूला के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अमित शर्मा की अदालत ने उसकी नियमित जमानत याचिका खारिज करते हुए कहा कि मामला बेहद गंभीर है। ऐसे आरोपित को जमानत देना न्याय के हित में नहीं होगा, क्योंकि उसके गवाहों को प्रभावित करने और फरार होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
करीब 15 वर्ष पुराने इस सनसनीखेज मामले में शिकायतकर्ता सुषमा मित्तल ने पुलिस को दी शिकायत में बताया था कि उनके पति विनोद मित्तल का आरोपित राजू से पैसों का लेन-देन था।
14 फरवरी 2009 की रात विनोद मित्तल अपने चार वर्षीय बेटे यशान के साथ बकाया रकम लेने राजू के घर गए थे। रात करीब 10:10 बजे जब पत्नी ने फोन किया तो दूसरी तरफ गाली-गलौज और विनोद की चीखें सुनाई दीं। इसके बाद उनका मोबाइल बंद हो गया और दोनों रहस्यमय ढंग से लापता हो गए।
जांच में गिरफ्तार आरोपितों ने खुलासा किया कि पहले से रची गई साजिश के तहत विनोद मित्तल और उनके बेटे का अपहरण किया गया। विनोद मित्तल की चाकू से हत्या करने के बाद पिता-पुत्र को उनकी सैंट्रो कार सहित राजपुरा-पटियाला के बीच नहर में फेंक दिया गया।
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पुलिस को कार से मिले खून का डीएनए मृतक के पिता से मेल खाया, जबकि कार से बरामद बाल भी आरोपितों के बालों से मेल खाते पाए गए। जांच के दौरान शिल्पा और उसका पति राजू वर्ष 2009 में फरार घोषित कर दिए गए थे। दोनों को 16 जुलाई 2022 को गुजरात के वडोदरा से गिरफ्तार किया था।
बचाव पक्ष ने अदालत में दलील दी कि शिल्पा की मां का निधन हो चुका है, पिता दिव्यांग हैं और उसकी बेटी की देखभाल करने वाला कोई नहीं है। साथ ही मुकदमे के लंबा चलने का हवाला देकर जमानत की मांग की गई।
वहीं, सरकारी वकील ने दलील दी कि आरोपित पर हत्या और आपराधिक साजिश जैसे गंभीर आरोप हैं और रिहा होने पर वह गवाहों को प्रभावित कर सकती है या फरार हो सकती है। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने जमानत याचिका खारिज कर दी।