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    पंचकूला में बढ़ा क्राइम ग्राफ, पिछले 7 महीने में हुए 14 मर्डर

    Updated: Sun, 09 Aug 2026 05:48 PM (IST)

    पंचकूला में इस साल अपराध का ग्राफ तेजी से बढ़ा है, जहां सात महीनों में 14 हत्याएं दर्ज हुई हैं, जिससे लोगों में सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। ...और पढ़ें

    पंचकूला में क्राइम ग्राफ बढ़ गया है।

    पंचकूला में क्राइम ग्राफ बढ़ गया है।

    HighLights

    1. पंचकूला में सात महीने में 14 हत्याएं दर्ज, चिंता बढ़ी

    2. पुलिस ने सुरक्षा बढ़ाने के लिए कई नए उपाय किए

    3. लगभग आधे मामलों में प्रवासी मजदूर शामिल पाए गए

    अंकेश ठाकुर, पंचकूला। सेक्टर-21 में सेवानिवृत्त कैप्टन की 72 वर्षीय बुजुर्ग पत्नी नीरा मेहता की हत्या की घटना ने लोगों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। पुलिस के आंकड़े भी इस चिंता को और गहरा रहे हैं।

    इस साल के पहले सात महीनों में ही जिले में 14 लोगों की हत्या हो चुकी है। शुरुआत के पहले छह महीने में 11 हत्याएं हुईं थी। जुलाई में जीजा-साला डबल मर्डर और तीन अगस्त को नीरा मेहता की हत्या मामले समेत कुल 14 मर्डर हो चुके हैं।

    यदि हत्याओं का यही सिलसिला जारी रहा तो पंचकूला में पांच वर्षों में सबसे अधिक हत्या के मामले दर्ज होने का रिकॉर्ड बन सकता है। 31 जून तक 11 हत्याओं के यह आंकड़े आरटीआइ के तहत मिली पुलिस जानकारी में सामने आए हैं।

    पुलिस के अनुसार, एक जनवरी से 30 जून तक हत्या के 11 मामले दर्ज हुए। इनमें चार मामलों को पुलिस ने सुलझा लिया और और 26 आरोपितों को गिरफ्तार किया जा चुका है। जबकि सात मामले जांच के दायरे में थे। वहीं चार जुलाई की रात जीजा अर्जुन उर्फ चिट्टा व साला संजीत की हत्या और तीन अगस्त को नीरा मेहता हत्या मामले में भी पुलिस आरोपितों को गिरफ्तार कर चुकी है।

    पंचकूला में वर्ष 2025 में पूरे साल 18 हत्या के मामले दर्ज हुए थे। इनमें से 13 मामलों को सुलझाते हुए 34 आरोपितों को गिरफ्तार किया गया। वर्ष 2024 में 15 हत्याएं हुईं, जिनमें 14 मामले सुलझाए गए। इससे पहले 2023 में आठ और 2022 में 13 हत्या के मामले दर्ज हुए थे। इन दोनों वर्षों के सभी मामले पुलिस ने सुलझा लिए थे।

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    लोगों में सुरक्षा को लेकर चिंता

    पंचकूला विकास मंच के सदस्य राकेश अग्रवाल का कहना है कि लगातार सामने आ रही वारदातों से लोगों में डर बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि पुलिस की गश्त मजबूत करने के साथ शहर में पुलिस बल बढ़ाने की जरूरत है।

    पंचकूला में पुलिसकर्मियों की बड़ी संख्या वीआईपी ड्यूटी में लगी रहती है। ऐसे में हर सड़क और संवेदनशील स्थान पर सीसीटीवी की व्यवस्था होनी चाहिए, ताकि वारदात के बाद आरोपितों के भागने की संभावना कम हो।

    प्रवेश और निकास पर नाके, 90 ब्लैक स्पॉट पर कैमरे

    डीसीपी क्राइम एवं ट्रैफिक अमरिंदर सिंह ने बताया कि पुलिस शहर की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए लगातार काम कर रही है। शहर के एंट्री और एग्जिट पाइंट पर नाके लगाए गए हैं, जहां भारतीय रिजर्व बटालियन के जवान तैनात किए गए हैं। पुलिसकर्मियों के बीच बेहतर समन्वय के लिए आंतरिक वॉट्सऐप ग्रुप बनाए गए हैं।

    इसके अलावा इमरजेंसी रिस्पांस व्हीकल और थानों के राइडर्स को सीधे कंट्रोल रूम से जोड़ा गया है। क्विक रिएक्शन फोर्स का रिस्पांस टाइम भी कम किया गया है। अब पुलिस की ओर से माक ड्रिल भी कराई जाएंगी। अपराध की दृष्टि से चिन्हित किए गए 90 ब्लैक स्पॉट पर पहले ही सीसीटीवी कैमरे लगाए जा चुके हैं।

    आधे मामलों में प्रवासी मजदूर जुड़े

    डीसीपी ने बताया कि जिले में सामने आए हत्या के करीब 50 प्रतिशत मामलों में प्रवासी मजदूर या तो पीड़ित रहे हैं या आरोपित। इनमें स्थानीय लोगों की संलिप्तता नहीं थी। पिंजौर में पुरानी रंजिश और गैंग से जुड़ा एक मामला भी सामने आया था।

    डीसीपी के अनुसार पुलिस लगभग सभी मामलों को सुलझाने में सफल रही है और जिले में पुलिस लगातार सतर्क है। हालांकि, सात महीने में 14 हत्याओं का आंकड़ा यह सवाल जरूर खड़ा करता है कि क्या मौजूदा पुलिसिंग व्यवस्था बढ़ते अपराध के दबाव को झेलने के लिए पर्याप्त है।

    वर्षवार हत्याओं के आंकड़े

    वर्ष हत्याएं
    2025 18
    2024 15
    2023 08
    2022 13