पूर्व DSP भगवान दास आत्महत्या केस में अहम फैसला, नौ साल बाद 13 आरोपित बरी; जानें क्यों किया था सुसाइड
पंचकूला की अदालत ने पूर्व डीएसपी भगवान दास आत्महत्या मामले में नौ साल बाद 13 आरोपितों को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि कि ...और पढ़ें

फैसला सुनाते हुए पंचकूला कोर्ट ने की अहम टिप्पणी, कहा-केस दर्ज कराना आत्महत्या के लिए उकसाना नहीं।
HighLights
पंचकूला में सर्विस रिवाल्वर से खुद को मारी थी गोली।
नौ साल बाद पंचकूला कोर्ट ने सुनाया अहम फैसला।
केस दर्ज कराना आत्महत्या के लिए उकसाना नहीं: कोर्ट।
जागरण संवाददाता, पंचकूला। हिसार के पूर्व डीएसपी भगवान दास की आत्महत्या से जुड़े करीब नौ साल पुराने मामले में पंचकूला की अदालत ने 13 आरोपितों को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया।
अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी व्यक्ति के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करवाना या उसकी गिरफ्तारी की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन करना अपने आप में आत्महत्या के लिए उकसाने की श्रेणी में नहीं आता।
पुलिस ने मामले में 15 लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। सुनवाई के दौरान दो आरोपित बलबीर सिंह और रामेश्वर की मौत हो गई, जिसके बाद उनके खिलाफ कार्रवाई समाप्त कर दी गई।
अदालत ने मुकेश, रवींद्र, धर्मवीर, संदीप, संजय, अमित, देवेंद्र, मनदीप, राजेश, कुलदीप, एक अन्य संदीप, दूसरे संदीप और दीपक को दोषमुक्त कर दिया।
ट्रिपल मर्डर केस में नाम आने के बाद तनाव में थे डीएसपी
मामला 15 मार्च 2017 का है। हिसार के गांव शेखपुरा में चुनावी रंजिश के चलते हुए ट्रिपल मर्डर मामले में भगवान दास का नाम सामने आया था। इसके बाद निलंबन और तबादले के चलते वह मानसिक तनाव में थे।
14 मार्च को वह पंचकूला सेक्टर-26 स्थित पुलिस लाइन की जीओ मेस पहुंचे। अगली सुबह अपने कमरे में सर्विस रिवाल्वर से सिर में गोली मार ली। गंभीर हालत में उन्हें सेक्टर-21 स्थित निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां करीब 12 दिन उपचार के बाद 27 मार्च को उनकी मौत हो गई।
सुसाइड नोट में कई लोगों को ठहराया था जिम्मेदार
घटना के बाद मौके से सुसाइड नोट बरामद हुआ था। इसमें भगवान दास ने अपने खिलाफ झूठा हत्या का मामला दर्ज कराने का आरोप लगाया था और कई लोगों के नाम लिखकर उन्हें अपनी मौत के लिए जिम्मेदार ठहराया था। हालांकि, अभियोजन पक्ष आरोपों को अदालत में पर्याप्त साक्ष्यों के साथ साबित नहीं कर सका, जिसके चलते सभी जीवित आरोपितों को बरी कर दिया गया।