हरियाणा में सिविल जज बनने के लिए 3 साल का वकालत अनुभव जरूरी, विभागीय परीक्षा पास करने पर ही मिलेगा इंक्रीमेंट
हरियाणा में अब वकीलों को सिविल जज बनने के लिए न्यूनतम तीन साल की वकालत का अनुभव अनिवार्य होगा। ...और पढ़ें
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हरियाणा में सिविल जज बनने के लिए 3 साल का वकालत अनुभव जरूरी (प्रतीकात्मक फोटो)
HighLights
सिविल जज बनने को तीन साल की वकालत अनिवार्य।
वेतनवृद्धि के लिए विभागीय परीक्षा उत्तीर्ण करना आवश्यक होगा।
पांच साल अनुभव पर सिविल जज को पदोन्नति मिलेगी।
राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। हरियाणा की विभिन्न अदालतों में प्रैक्टिस कर रहे वकील अब न्यूनतम तीन साल की वकालत करने के बाद ही सिविल जज बन सकेंगे। इतना ही नहीं, जज बनने के बाद विभागीय परीक्षा उत्तीर्ण किए बगैर वेतनवृद्धि का लाभ भी नहीं मिलेगा। हालांकि पांच साल के अनुभव वाले सिविल जज को जूनियर डिवीजन से सीनियर डिवीजन में पदोन्नति मिल सकेगी।
मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने पंजाब सिविल सेवा (न्यायिक शाखा) हरियाणा संशोधन नियम-2026 अधिसूचित कर दिए हैं, जो तुरंत प्रभाव से लागू हो गए। न्यायिक सेवा में दो ग्रेड सिविल जज (जूनियर डिविजन) तथा सिविल जज (सीनियर डिवीजन) निर्धारित किए गए हैं।
संशोधित नियमों के अनुसार सिविल जज बनने के लिए आवेदन करने के इच्छुक वकील के पास राज्य बार एसोसिएशन से तीन साल के लिए अधिवक्ता के रूप में प्रैक्टिस करने का प्रमाणपत्र होना चाहिए। यह प्रमाणपत्र संबंधित न्यायालय के प्रधान न्यायिक अधिकारी अथवा उस न्यायालय के न्यूनतम दस साल वाले अनुभव वाले अधिवक्ता जारी कर सकेंगे।
न्यायाधीश या न्यायिक अधिकारी के साथ विधि लिपिक-विधि शोधकर्ता के रूप में कार्य को भी प्रैक्टिस के कुल वर्षों की गणना में शामिल किया जाएगा। प्रत्येक सिविल जज (जूनियर डिवीजन) वह सभी वेतनमान और भत्ते प्राप्त करने का हकदार होगा, जो राज्य सरकार द्वारा निर्धारित किए गए हैं।
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हालांकि द्वितीय और उसके बाद की वार्षिक वेतनवृद्धियां प्राप्त करने का हक विभागीय परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद ही मिलेगा। परीक्षा पास करने के बाद रोकी गई वेतनवृद्धियों को भी लागू कर दिया जाएगा, लेकिन बकाया का भुगतान नहीं किया जाएगा।
वार्षिक वेतनवृद्धि की दर तीन प्रतिशत संचयी होगी। अर्थात तीन प्रतिशत की दर से वेतनवृद्धि की गणना वेतनवृद्धियों की नियत राशि की बजाय पूर्व वर्ष के मूल वेतन पर की जाएगी।
पांच स्तरों का प्रारंभिक वेतनमान निर्धारित
न्यायिक सेवा के लिए जे-1 से जे-5 तक पांच स्तरों का प्रारंभिक वेतनमान भी निर्धारित किया गया है। सिविल जज (जूनियर डिवीजन) प्रवेश स्तर को 27 हजार 700 रुपये वेतनमान मिलेगा। जे-2 के लिए 39 हजार 530, जे-3 के लिए 43 हजार 690, जे-4 के लिए 43 हजार 690 और जे-5 के लिए 51 हजार 550 रुपये का वेतनमान मिलेगा। प्रथम वर्ष जे-1 को 77 हजार 840, जे-2 को 92 हजार 960, जे-3 को एक लाख 11 हजार, जे-4 को एक लाख 22 हजार 700 और जे-5 को एक लाख 44 हजार 840 वेतन दिया जाएगा। यह वेतन हर साल तीन प्रतिशत की दर से बढ़ता जाएगा।