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पंजाब में तैनाती से नहीं छिनेगा दंपती मामला अंक, हरियाणा कर्मचारी को हाई कोर्ट से राहत

Published: Thu, 08 Oct 2026 03:31 PM (IST)

पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने फैसला सुनाया है कि बीबीएमबी नंगल में हरियाणा कोटे पर तैनात पति के आधार ...और पढ़ें

पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट फाइल फोटो

पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट फाइल फोटो

HighLights

  1. हाई कोर्ट ने हरियाणा कर्मचारी को दंपती मामले के 10 अंक देने का निर्देश दिया

  2. बीबीएमबी में हरियाणा कोटे के पद को हरियाणा सरकार का कैडर माना गया

  3. सरकार को संशोधित मेरिट के आधार पर तबादले पर फिर विचार करने को कहा

राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। पंजाब के नंगल में पति की तैनाती होने के आधार पर हरियाणा सरकार की महिला कर्मचारी को दंपती मामले के 10 मेरिट अंक देने से इनकार नहीं किया जा सकता।

पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (बीबीएमबी) में हरियाणा के हिस्से के कोटे के पद पर तैनात कर्मचारी का मूल कैडर हरियाणा सरकार का ही रहता है।

केवल कार्यस्थल पंजाब में होने से उसकी सेवा का चरित्र नहीं बदल जाता।जस्टिस हरप्रीत सिंह बराड़ ने हरियाणा के उच्च शिक्षा विभाग की नियमित सहायक प्रोफेसर (भौतिकी) की याचिका स्वीकार करते हुए उसे दंपती मामले के तहत 10 मेरिट अंक देने का निर्देश दिया। साथ ही सरकार को संशोधित मेरिट के आधार पर उसके तबादले के दावे पर दोबारा विचार करने को कहा।

याचिकाकर्ता की नियुक्ति 12 जुलाई 2018 को हुई थी और उसकी तैनाती फतेहाबाद जिले के रतिया स्थित राजकीय कालेज में थी। हरियाणा सरकार की 25 जून को अधिसूचित माडल ऑनलाइन तबादला नीति-2026 में दंपती मामले के तहत 10 अतिरिक्त मेरिट अंक का परविधान है।

यह लाभ उस कर्मचारी को दिया जाना है, जिसका पति या पत्नी किसी अधिसूचित संगठन में नियमित कर्मचारी हो और हरियाणा, दिल्ली या चंडीगढ़ में तैनात हो।

19 अगस्त को जारी लिस्ट में नहीं मिला कोई अंक

याचिकाकर्ता के पति बीबीएमबी में हरियाणा के हिस्से के कोटे वाले पद पर नंगल में तैनात हैं। उसने निर्धारित अवधि में ऑनलाइन तबादले के लिए आवेदन किया, लेकिन 19 अगस्त को जारी मेरिट विवरण में उसे दंपती मामले के कोई अंक नहीं दिए गए।

हाई कोर्ट ने कहा कि हरियाणा सरकार स्वयं स्पष्ट कर चुकी है कि बीबीएमबी में हरियाणा के हिस्से के इंजीनियरिंग पद सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग के कैडर का हिस्सा हैं और विभाग के स्वीकृत पद हैं।

इन पदों पर कार्यरत कर्मचारियों को किसी स्वतंत्र संगठन में प्रतिनियुक्त कर्मचारी नहीं माना जा सकता।जस्टिस बराड़ ने कहा कि बीबीएमबी को मॉडल ऑनलाइन तबादला नीति में अधिसूचित संगठनों की सूची में शामिल किया गया है। इसलिए नीति की व्याख्या ऐसी नहीं हो सकती, जिससे हरियाणा कोटे के इन पदों की विशेष प्रशासनिक व्यवस्था ही नजरअंदाज हो जाए।

चंडीगढ़ में लाभ, पंजाब में नहीं यह भेद उचित नहीं

हाई कोर्ट ने कहा कि यदि बीबीएमबी में हरियाणा कोटे के समान पद पर चंडीगढ़ में तैनात कर्मचारी को दंपती मामले के अंक मिल सकते हैं, लेकिन उसी कैडर के समान पद पर नंगल में तैनात कर्मचारी को केवल भौगोलिक स्थिति के कारण यह लाभ नहीं दिया जाता, तो यह अनुचित भेद होगा।

कोर्ट ने कहा कि ऐसी व्याख्या तबादला नीति के उद्देश्य से मेल नहीं खाती और यह नीति की लाभकारी व्यवस्था की अत्यधिक तकनीकी व्याख्या होगी।हाई कोर्ट ने हरियाणा सरकार को याचिकाकर्ता को दंपती मामले के 10 मेरिट अंक देने और इसके बाद उसका कुल मेरिट स्कोर दोबारा निर्धारित करने का निर्देश दिया।

संशोधित मेरिट के आधार पर उसके द्वारा चुने गए स्टेशनों और तबादला नीति के परविधान के अनुसार उसके तबादले के दावे पर फिर से विचार करना होगा। कोर्ट ने यह प्रक्रिया कानून के अनुसार शीघ्र पूरी करने के आदेश दिए।