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थाना क्षेत्र में अपराध बढ़ा तो सीधा SHO की जाएगी कुर्सी, हरियाणा DGP ने दिए स्पष्ट निर्देश

Published: Tue, 08 Sep 2026 07:22 PM (IST)

डीजीपी अजय सिंघल ने हरियाणा में अपराध नियंत्रण को लेकर उच्च स्तरीय बैठक की, जिसमें थाना क्षेत्र में अपराध बढ़ने पर एसएचओ और सुपरवाइजरी अधिकारियों पर कार्रवाई के निर्देश दिए।

हरियाणा के पुलिस महानिदेशक अजय सिंघल। (सांकेतिक फोटो)

हरियाणा के पुलिस महानिदेशक अजय सिंघल। (सांकेतिक फोटो)

HighLights

  1. अपराध बढ़ने पर एसएचओ, सुपरवाइजरी अधिकारियों पर कार्रवाई।

  2. थाना स्तर पर अपराध की माइक्रो लेवल मॉनिटरिंग के निर्देश।

  3. साइबर अपराध के लंबित मामलों का शीघ्र निपटारा करें।

जागरण संवाददाता, पंचकूला। हरियाणा के जिस भी थाने के अंतर्गत अपराध बढ़ेगा, वहां के एसएचओ और सुपरवाइजरी पर तुरंत गाज गिरेगी। मंगलवार को पुलिस महानिदेशक अजय सिंघल ने प्रदेशभर के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशकों, पुलिस महानिरीक्षकों, पुलिस आयुक्तों एवं पुलिस अधीक्षकों के साथ वीडियो काॅन्फ्रेंसिंग के माध्यम से उच्च स्तरीय बैठक की।

लगभग 3 घंटे चली इस बैठक में प्रदेश में अपराध की स्थिति की थाना-वार तथा अपराध के विभिन्न हेड के अनुसार विस्तृत समीक्षा की गई। सिंघल ने कहा कि थाना प्रभारियों (एसएचओ) एवं सुपरवाइजरी अधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्र में अपराध पर प्रभावी नियंत्रण सुनिश्चित करना होगा।

जो अधिकारी अपनी जिम्मेदारी के अनुरूप अपेक्षित प्रदर्शन नहीं करेगा, उसके विरुद्ध सख्त विभागीय कार्रवाई की जाएगी। अपराध की घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण में विफल रहने वाले थाना प्रभारियों को निलंबित करने के निर्देश देते हुए डीजीपी ने स्पष्ट किया कि जिम्मेदारी के अनुरूप कार्य न करने वाले अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जाएगी।

थाना-वार अपराध की माइक्रो लेवल माॅनिटरिंग

जिले में थाना-वार अपराध की माइक्रो लेवल माॅनिटरिंग एवं गहन विश्लेषण सुनिश्चित किया जाए। यह देखा जाए कि किस थाने में किस प्रकार के अपराध में वृद्धि हुई है, उसके वास्तविक कारण क्या हैं तथा अपराध की रोकथाम के लिए अब तक क्या प्रभावी कदम उठाए गए हैं। केवल अपराध के आंकड़े एकत्र करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनका विश्लेषण कर कारण आधारित कार्रवाई एवं प्रभावी अपराध नियंत्रण की स्ट्रैटेजी तैयार की जानी चाहिए।

सीसीटीएनएस डेटा पर बनेगी अपराध नियंत्रण रणनीति

उन्होंने कहा कि प्रत्येक पुलिस अधीक्षक, पुलिस आयुक्त एवं अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक को अपने अधीन आने वाले प्रत्येक थाने की कार्यप्रणाली की गहन समीक्षा करनी होगी। सीसीटीएनएस में उपलब्ध डेटा का वैज्ञानिक एवं तथ्यात्मक विश्लेषण करते हुए यह पता लगाया जाए कि किस थाने में कौन-सा अपराध बढ़ रहा है और उसके पीछे क्या कारण हैं।

इसके आधार पर समय रहते प्रिवेंटिव एक्शन लिया जाए, ताकि अपराध की घटना होने से पहले ही उसे रोकने की प्रभावी व्यवस्था की जा सके। सिंघल ने बताया कि पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष प्रदेश में बीएनएस के तहत कुल अपराध में 9.11 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है।

अजय सिंघल ने बैठक में गत 15 जून को प्रदेशभर के पुलिस अधिकारियों को जारी निर्देशों की भी समीक्षा की, जिसमें थाना स्तर पर माइक्रो प्लानिंग एवं अपराध की प्रभावी मानिटरिंग पर जोर दिया गया था।

डीजीपी ने अधिकारियों को अपराध नियंत्रण के लिए बेस्ट प्रैक्टिसेस अपनाने, सफल पुलिसिंग माॅडल को अन्य जिलों में लागू करने तथा पुलिस बल का मनोबल बढ़ाने के निर्देश दिए।

अजय सिंघल ने साइबर अपराध से संबंधित लंबित मामलों एवं शिकायतों की समीक्षा करते हुए इनके शीघ्र निपटारे के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक शिकायत की गंभीरता से समयबद्ध जांच एवं नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाए तथा लंबित मामलों की नियमित मानिटरिंग कर जांच में तेजी लाई जाए।

बैठक में अतिरिक्त सीआइडी के पुलिस महानिदेशक सौरभ सिंह ने धमकी भरी काल, फायरिंग की घटनाओं तथा अन्य गंभीर आपराधिक घटनाओं की रोकथाम के लिए प्रभावी एवं समन्वित रणनीति तैयार करने पर जोर दिया। उन्होंने ऐसे मामलों में समयबद्ध कार्रवाई, आपसी समन्वय तथा संवेदनशील क्षेत्रों की निरंतर निगरानी को आवश्यक बताया।