यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jun 04, 2016 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
हरियाणा के कच्चे कर्मचारियों के लिए खुशखबरी
हरियाणा के अस्थायी कर्मचारियों के लिए खुशखबरी है। हरियाणा सरकार ने अनुबंध और तदर्थ आधार पर कार्यरत कर्मचारियों को नियमित करने का रास्ता साफ कर दिया है। इस संबंध में हुड्डा सरकार के समय इसकी नीति पर लगी रोक काे हटा दिया है।

राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। हरियाणा के अनुबंध और तदर्थ आधार पर लगे कर्मचारियों के लिए खुशखबरी है। अब उनको नियमित किए जाने का रास्ता साफ हो गया है। भाजपा सरकार ने पिछली हुड्डा सरकार के समय बनी 10 साल की सेवा अवधि पूरी करने वाले ग्रुप 'सी' एवं 'डी' के कर्मचारियों को नियमित किए जाने की नीति पर लगी रोक हटा ली है। राज्य सरकार ने हुड्डा सरकार के समय बनी नियमितीकरण की इस नीति की समीक्षा करने के बाद यह फैसला किया है।
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पिछली हुड्डा सरकार के समय फैसला हुआ था कि ग्रुप 'सी' एवं 'डी' के ऐसे कर्मचारियों की सेवाओं को नियमित किया जाएगा, जिनकी नियुक्ति स्वीकृत पदों पर की गई है और जो 10 वर्ष की सेवा अवधि पूरी कर चुके हैं। 31 दिसंबर, 2018 तक यह सेवा अवधि पूरी करने वाले कर्मचारियों को भी पालिसी का लाभ देने की बात कही गई थी। भले ही ऐसे कर्मचारियों की मूल नियुक्ति विज्ञापन और साक्षात्कार की प्रक्रिया द्वारा न हुई हो, लेकिन उनका सेवा रिकार्ड संतोषजनक होना चाहिए तथा वे नीति में दिए गए मानदंडों को पूरा करते हैैं।
भाजपा सरकार ने 5 मई 2015 को हुड्डा सरकार के समय बनी इस पालिसी की समीक्षा का फैसला लेते हुए इस पर रोक लगा दी थी, जिस कारण हजारों कर्मचारियों के नियमित होने का रास्ता बंद हो गया था। प्रदेश सरकार ने अब सभी प्रशासनिक सचिवों को आदेश में कहा है कि 16 जून अथवा 16 जून 2014 के बाद की नियमितीकरण पालिसी की समीक्षा की जा चुकी है और इस पर लगी रोक वापस ले ली गई है।

