विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Oct 28, 2022 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

चिंतन शिविर में अमित शाह टोकते रहे, बोलते रहे हरियाणा के गृह मंत्री अनिल विज, पढ़ें पूरा मामला

By Bijender BansalEdited By: Kamlesh Bhatt
Updated: Fri, 28 Oct 2022 08:42 PM (IST)

सूरजकुंड में गृह मंत्रालय के चिंतन शिविर के दौरान हरियाणा के गृह मंत्री अनिल विज किरकिरी कराई। केंद्रीय गृह मंत्री बार-बार विज को टोकते रहे लेकिन विज बोलते रहे। विज के लंबे भाषण से अमित शाह नाराज दिखे।

चिंतन शिविर के दौरान अमित शाह व अन्य। फोटो- इंटरनेट मीडिया
चिंतन शिविर के दौरान अमित शाह व अन्य। फोटो- इंटरनेट मीडिया

राज्य ब्यूरो, फरीदाबाद। देश की आंतरिक सुरक्षा की मजबूती के लिए सूरजकुंड में चल रहे गृह मंत्रालय के दो दिवसीय चिंतन शिविर के पहले दिन उद्घाटन सत्र के दौरान हरियाणा के गृह मंत्री अनिल विज ने किरकिरी करा दी। निर्धारित समय से अधिक बोलने पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह उन्हें बार-बार टोकते रहे, लेकिन विज ने अपना संबोधन जारी रखा। इस पर शाह ने सार्वजनिक रूप से नाराजगी जताई।

अनिल विज को शिविर में मेजबान प्रदेश के गृहमंत्री के रूप में आगंतुकों का स्वागत करने के लिए पांच मिनट का समय दिया गया था, लेकिन वह स्वागत के बजाय अपने विभाग की उपलब्धियों का बखान करने लगे। इसमें लंबा समय ले लिया।

विज का भाषषण पांच मिनट से बढ़कर जब साढ़े आठ मिनट पर पहुंचा तो शाह ने उन्हें रोकते हुए कहा कि वे आगंतुकों का स्वागत कर अपना भाषषण खत्म करें। इससे पहले वह विज को तीन बार टोक चुके थे। पहली बार मंत्री को एक चिट भेजकर भाषण समाप्त करने के लिए कहा।

इसके बाद भी विज नहीं रुके तो शाह ने माइक पर अंगुली मारकर चेताया। एक बार फिर चेताया। चौथी बार शाह का चेहरा गुस्से से तमतमा गया और उन्होंने विज को धन्यवाद कर उनका भाषषण खत्म करवा दिया। विज शिविर का संचालन कर रहे शाह के दाएं तरफ छठी कुर्सी पर बैठे थे। इसी पंक्ति में शाह के साथ दाएं तरफ पहले मनोहर लाल फिर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ थे।

मुख्यमंत्री ने आधे समय में समाप्त किया अपना संबोधन

चिंतन शिविर का मिनट दर मिनट कार्यक्रम पहले से तय था। विज के बाद मेजबान प्रदेश हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल को उद्घाटन सत्र में बोलने के लिए दस मिनट का समय दिया गया था, लेकिन उन्होंने मौके की नजाकत को भांपते हुए अपना संबोधन पांच मिनट में ही समाप्त कर दिया। इसके बाद स्वयं शाह का 35 मिनट का संबोधन तय था। इसमें कोई कटौती नहीं करनी पड़े, इसलिए मनोहर लाल ने विज की गलती को ढकने का काम किया।