'जांच में क्लीन चिट मिलने के बावजूद मुकदमे से नहीं बच सकता आरोपी', पंजाब हरियाणा हाई कोर्ट का बड़ा फैसला
पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि पुलिस जांच में निर्दोष माने गए आरोपी को भी मुकदमे के दौरान मजबूत साक्ष्य मिलने पर अतिरिक्त आरोपी के र ...और पढ़ें
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जांच में क्लीन चिट मिलने के बावजूद मुकदमे से नहीं बच सकता आरोपित: हाई कोर्ट
HighLights
पुलिस जांच में क्लीन चिट मिलने पर भी आरोपी तलब हो सकता है
हाई कोर्ट ने कहा, जांच एजेंसी की राय अंतिम नहीं होती
मजबूत साक्ष्य सामने आने पर अदालत अतिरिक्त आरोपी को बुला सकती है
राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी आरोपी को पुलिस जांच के दौरान निर्दोष मानकर चालान में शामिल नहीं किया गया हो, तब भी ट्रायल के दौरान उसके खिलाफ मजबूत साक्ष्य सामने आने पर अदालत उसे अतिरिक्त आरोपी के रूप में तलब कर सकती है।
अदालत ने कहा कि जांच एजेंसी की राय अंतिम नहीं होती और न्यायालय का दायित्व है कि कोई वास्तविक आरोपी कानून के शिकंजे से बाहर न रहे। जस्टिस मनीषा बत्रा ने यह टिप्पणी फतेहाबाद निवासी लविश उर्फ लव सरदाना की आपराधिक पुनरीक्षण याचिका खारिज करते हुए की।
यह मामला वर्ष 2020 में दर्ज एक एफआईआर से संबंधित है। शिकायतकर्ता युधिष्ठिर नारंग ने आरोप लगाया था कि कृषि भूमि को लेकर उसके भाई और अन्य लोगों से विवाद चल रहा था। 10 जुलाई 2020 को जब वह अपनी पत्नी के साथ खेत में था, तब हार्दिक, एक नाबालिग और लविश खेत में पहुंचे और ट्रैक्टर से फसल को नुकसान पहुंचाने लगे। विरोध करने पर हार्दिक ने जहरीला पदार्थ लाकर उसे पिलाने का प्रयास किया।
जांच के दौरान पुलिस ने लविश को निर्दोष मानते हुए उसका नाम चालान में शामिल नहीं किया, लेकिन मुकदमे के दौरान शिकायतकर्ता ने अदालत में वही आरोप दोहराए। इसके आधार पर अभियोजन ने धारा 319 सीआरपीसी के तहत उसे अतिरिक्त आरोपी के रूप में तलब करने की मांग की, जिसे ट्रायल कोर्ट ने स्वीकार कर लिया।
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हाई कोर्ट ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्णयों के अनुसार धारा 319 के तहत शक्ति असाधारण है और इसका प्रयोग तब किया जाना चाहिए, जब अदालत के समक्ष मजबूत साक्ष्य आएं। न्यायालय ने कहा कि लविश का नाम एफआईआर में दर्ज था और उसके खिलाफ विशिष्ट भूमिका बताई गई थी।
अदालत ने यह भी कहा कि अन्य सह-आरोपियों को राहत मिलने के कारण लविश को समान लाभ नहीं मिल सकता, क्योंकि उसके खिलाफ प्रत्यक्ष और सक्रिय भूमिका का आरोप है। इन टिप्पणियों के साथ हाई कोर्ट ने पुनरीक्षण याचिका खारिज कर दी।