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पलवल महापंचायत का ऐतिहासिक फैसला, दहेज देने और मृत्यु भोज पर लगा पूर्ण प्रतिबंध; पढ़ें पूरा मामला

Published: Mon, 07 Sep 2026 08:44 PM (IST)

पलवल की महापंचायत में दहेज, फिजूलखर्ची, मृत्यु भोज और नशाखोरी जैसी सामाजिक कुरीतियों पर अंकुश लगाने के लिए अहम फैसले ...और पढ़ें

महापंचायत में सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ लिए गए ऐतिहासिक निर्णय।

महापंचायत में सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ लिए गए ऐतिहासिक निर्णय।

HighLights

  1. दहेज प्रथा और शादी में फिजूलखर्ची पर पूर्ण प्रतिबंध।

  2. मृत्यु भोज पर रोक, एक साल बाद कथा की अनुमति।

  3. नियम तोड़ने पर सामाजिक बहिष्कार, समितियां करेंगी निगरानी।

जागरण संवाददाता, पलवल। रविवार को मंडकोला गांव में हुई 52 पालों की विशाल महापंचायत में शादी-विवाह में होने वाली बेतहाशा फिजूलखर्ची, दहेज प्रथा, मृत्यु भोज और नशाखोरी जैसी सामाजिक कुरीतियों पर अंकुश लगाने के लिए कई अहम फैसले लिए गए।

इन फैसलों को लागू करवाने के लिए ग्राम स्तर, पाल और 52 पालों के स्तर पर समितियों का गठन किया जाएगा, जिनकी लगातार बैठकें होंगी। साथ ही यह भी फैसला लिया गया कि जो परिवार तय नियमों का उल्लंघन करेगा, समाज के लोग उस कार्यक्रम में शामिल नहीं होंगे।

रविवार को करीब पांच घंटे तक हजारों लोगों की मौजूदगी में चली इस महापंचायत की अध्यक्षता 52 पालों के अध्यक्ष अरुण जेलदार ने की, जबकि पूर्व विधायक प्रवीण डागर ने फैसले पढ़कर सुनाए। इस दौरान डागर पाल के अध्यक्ष धर्मवीर डागर, उत्तर प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री लक्ष्मी नारायण चौधरी, हरियाणा के खेल राज्य मंत्री गौरव गौतम शामिल रहे।

वहीं, हरियाणा कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष उदय भान, विधायक रघुवीर सिंह तेवतिया व मोहम्मद इजराइल, पूर्व मंत्री करण दलाल, जगदीश नायर व हर्ष कुमार, जिला ब्राह्मण सभा अध्यक्ष विनोद शर्मा, पूर्व विधायक नयनपाल रावत, केहर सिंह रावत व टेकचन्द शर्मा, भाजपा जिला अध्यक्ष विपिन बैसला, कांग्रेस जिला अध्यक्ष नेत्रपाल अधाना, ज्ञान सिंह चौहान आदि मौजूद थे।

महापंचायत में सर्वसम्मित से फैसले लिए गए कि किसी भी सामाजिक कार्यक्रम में तेज संगीत बजाने, शराब परोसने और भोजन में नकली खोया तथा पनीर के इस्तेमाल पर पूरी तरह प्रतिबंध रहेगा। बारातियों की सीमा अधिकतम 51 लोगों तक सीमित कर दी गई है, जिनके लिए केवल शुद्ध शाकाहारी और सादे भोजन की व्यवस्था होगी। साथ ही अधिक मात्रा में मिठाई और जरूरत से ज्यादा सब्जियां बनाने पर भी रोक रहेगी।

कन्यादान में सिर्फ ये चीजें दिए जाएंगे

कन्या पक्ष की ओर से लड़के पक्ष को कन्यादान के रूप में अधिकतम 11 हजार रुपये, 11 बर्तन, परिवार के सदस्यों के लिए कपड़े, एक संदूक, एक अलमारी, एक बेड, अधिकतम दो तोले सोना और 100 ग्राम चांदी के आभूषण ही दिए जा सकेंगे। महापंचायत में स्पष्ट किया गया कि यह सभी सामग्री और राशि अधिकतम सीमा होगी, इससे अधिक दहेज या अन्य सामान नहीं दिया जाएगा।

महापंचायत में यह भी तय किया गया कि कन्या पक्ष की ओर से शादी में शामिल होने वाले ग्रामीण कन्यादान की रस्म पूरी करने के बाद वापस लौट जाएंगे और भोजन नहीं करेंगे। सगाई में लड़के को केवल एक रुपया, पांच कपड़े और एक किलो मिठाई दी जाएगी। इसके अलावा लड़के पक्ष की ओर से सगाई समारोह में परिवार के अधिकतम पांच व्यक्ति ही शामिल हो सकेंगे। लग्न की रस्म को लेकर तय किया गया कि कन्या पक्ष की तरफ से केवल दो व्यक्ति ही लड़के के घर जाएंगे। इस दौरान लड़के को एक रुपया, पांच कपड़े, बताशे और नारियल दिया जाएगा।

लड़की की गोद भराई में भी सादगी का नियम

लड़की की गोद भराई की रस्म को लेकर तय किया गया कि गोद भराई में परिवार की पांच महिलाएं और पांच पुरुष ही शामिल हो सकेंगे। इस दौरान लड़की को एक अंगूठी, एक जोड़ी कपड़े और एक किलो मिठाई दी जाएगी। वहीं, कन्या पक्ष की ओर से लड़के पक्ष के लोगों को विदाई के समय 101 रुपये दिए जाएंगे।

भात न्योता और भात की रस्म के लिए भी तय किए नियम

भात न्योता देने और भात की रस्म को लेकर भी महापंचायत में निर्णय लिया गया कि भात का न्योता देने के लिए अधिकतम 11 महिलाएं जा सकेंगी और उन्हें प्रति व्यक्ति 101 रुपये विदाई के रूप में दिए जा सकेंगे। वहीं, जब भात लेकर जाएंगे तो अधिकतम 11 व्यक्ति ही शामिल होंगे। भात में परिवार के कपड़े, एक तोला सोना, 100 ग्राम चांदी के आभूषण और थाली में 101 रुपये रखे जा सकेंगे।

मृत्यु भोज पर पूरी तरह रोक, एक साल बाद कथा कराने की छूट

मृत्यु भोज पर भी पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया गया है। वहीं, यदि परिवार चाहे तो मृत्यु के एक वर्ष बाद किसी भी व्यक्ति की ओर से कथा के रूप में कार्यक्रम आयोजित किया जा सकता है।

गांव स्तर पर बनेगी कमेटी, टूटते रिश्तों को बचाने का करेगी प्रयास

टूटते रिश्तों की बढ़ती संख्या को देखते हुए गांव स्तर पर कमेटियों का गठन किया जाएगा। इन कमेटियों की जिम्मेदारी परिवारों के बीच होने वाले विवादों को आपसी बातचीत से सुलझाने की होगी। कमेटी के सदस्य प्रयास करेंगे कि छोटे-छोटे विवादों के कारण पति-पत्नी या परिवारों के रिश्ते न टूटें और आपसी समझ व सहमति से विवादों का समाधान हो सके।

सामाजिक नियमों के पालन के लिए तीन स्तर पर बनेगी समितियां

सामाजिक नियमों को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए तीन स्तर पर समितियों के गठन का निर्णय लिया गया। महापंचायत में तय किया गया कि ग्राम स्तर पर 36 बिरादरियों की एक समिति गठित की जाएगी, जिसकी हर तीन महीने में बैठक होगी। इसी तरह पाल स्तर पर समिति का गठन किया जाएगा, जो हर छह महीने में बैठक कर सामाजिक नियमों के पालन की समीक्षा करेगी।

इसके अलावा 52 पालों के 52 सदस्यों की एक केंद्रीय समिति बनाई जाएगी, जिसकी हर वर्ष बैठक होगी। इन समितियों के माध्यम से महापंचायत में लिए गए निर्णयों के पालन की समीक्षा करने के साथ समय-समय पर आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।

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