पलवल: होडल के गांवों में वर्षों से जर्जर रास्तों से मिलेगी मुक्ति, टेंडर जारी कर चमकेंगी गांवों की जर्जर सड़कें
होडल क्षेत्र के गांवों में करोड़ों की लागत से सड़कों का निर्माण और मरम्मत कार्य शुरू होगा। नगर परिषद और पंचायत विभाग ने टेंडर प्रक्रिया शुरू कर बेढा प ...और पढ़ें

जर्जर सड़क का हाल। जागरण
HighLights
होडल के गांवों में करोड़ों की लागत से सड़कें बनेंगी।
जर्जर रास्तों से ग्रामीणों को मिलेगी वर्षों पुरानी समस्या से मुक्ति।
छज्जूनगर में पार्क-सह-व्यायामशाला का भी होगा निर्माण।
जागरण संवाददाता, पलवल। होडल क्षेत्र के विकास को रफ्तार देने और ग्रामीणों को जर्जर रास्तों से निजात दिलाने के लिए करोड़ों की लागत से कार्य किए जाएंगे। नगर परिषद और पंचायत विभाग ने विभिन्न गांवों में करोड़ों रुपये की लागत से नई सड़कों का निर्माण और मरम्मत कार्य कराने के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी है। कई वर्षों से बदहाली का दंश झेल रहे इन मुख्य रास्तों के बनने से स्थानीय निवासियों और राहगीरों को भारी राहत मिलेगी।
30 लाख रुपयों की लागत से होंगे निर्माण
नगर परिषद होडल के अंतर्गत बेढा पट्टी गांव की फिरनी और अंदर गांव के रास्तों का निर्माण किया जाएगा। छह करोड़ 30 लाख रुपयों की लागत से यह कार्य किए जाएंगे। वहीं गढ़ी गांव में 25 गलियों और फिरनी की सड़क का निर्माण किया जाएगा।
इनपर करीब छह करोड़ 88 लाख रुपयों की लागत आएगी। साथ ही स्ट्रीट लाइट लगाई जाएंगी। इनकी टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी गई है और जल्द ही यह टेंडर जारी कर दिए जाएंगे। नगर परिषद के एक्सईएन सतपाल के अनुसार विभाग द्वारा टेंडर जारी होते ही निर्माण कार्य शुरू करा दिया जाएगा। इससे ग्रामीणों को बड़ी राहत मिलेगी।
दीघौट और लोहिना गांव के रास्तों का होगा जीर्णोद्धार
इसी तरह दीघौट और लोहिना गांव के रास्तों का जीर्णोद्धार किया जाएगा। यह कार्य पंचायत विभाग करेगा। दीघौट और लोहिना जर्जर हो चुकी फिरनियों की मरम्मत की जाएगी। दीघौट में क्षतिग्रस्त फिरनी की मरम्मत 36 लाख रुपये से की जाएगी। जबकि लोहिना गांव में क्षतिग्रस्त फिरनी की मरम्मत 32 लाख रुपये में की जाएगी।
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लंबे समय से जर्जर स्थिति में थे रास्ते
बता दें कि क्षेत्र के कई रास्ते लंबे समय से जर्जर स्थिति में थे, जिसकी शिकायतें लगातार मिल रही थीं। इन सड़कों की जर्जर हालत के कारण ग्रामीणों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था।
ग्रामीणों ने अपना दर्द बयां करते हुए बताया कि उन्हें रोजाना धूल-मिट्टी और गहरे गड्ढों से भरे रास्ते से गुजरना पड़ता है। सबसे ज्यादा परेशानी बुजुर्गों, बच्चों और मरीजों को होती है। हल्की सी बारिश होते ही यह पूरा रास्ता कीचड़ के तालाब में तब्दील हो जाता है।
कई बार तो रास्ता पूरी तरह बंद हो जाता है और आवागमन ठप पड़ जाता है। लोग आए दिन इन जर्जर रास्तों में गिरकर चोटिल हो रहे थे। इन रास्तों की हालत सुधारने के लिए ग्रामीण लंबे समय से मांग कर रहे थे। अब इस नरक जैसी स्थिति से हमें अब जल्द ही छुटकारा मिलने की उम्मीद है।
छज्जूनगर में बनेगी पार्क-सह-व्यायामशाला
इसके अतिरिक्त जिले के छज्जूनगर गांव में भी ग्रामीण स्वास्थ्य और मनोरंजन को बढ़ावा देने के लिए एक पार्क-सह-व्यायामशाला का निर्माण किया जाएगा।करीब साढ़े 49 लाख की लागत से यह कार्य किया जाएगा।
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