सलाखों के पीछे से हुनर का कमाल, सूरजकुंड मेले में छाएगा झज्जर जेल के कैदियों का लग्जरी फर्नीचर; देखें Photos
झज्जर जिला कारागार के बंदी इस बार सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय मेले में अपना हुनर दिखाएंगे, जहाँ वे लकड़ी का फर्नीचर और सरसों का तेल प्रदर्शित करेंगे।
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HighLights
झज्जर जेल के बंदी सूरजकुंड मेले में दिखाएंगे हुनर।
कैदी बना रहे लकड़ी का फर्नीचर और सरसों का तेल।
यह पहल बंदियों के पुनर्वास और कौशल विकास को दर्शाती है।
मुकेश शर्मा, झज्जर। सलाखों के पीछे बंद हाथ इस बार सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय मेले में अपनी कहानी सुनाएंगे। जिन हाथों की पहचान अब तक अपराध और सजा से जुड़ी रही, वही हाथ लकड़ी को तराशकर टेबल, कुर्सी, बेंच, कार्नर और ट्राली तैयार कर रहे हैं।
फरवरी में लगने वाले अंतरराष्ट्रीय हस्तशिल्प मेले में झज्जर जिला कारागार के बंदियों का यह हुनर विदेशी और देशी खरीदारों के सामने होगा। जिला कारागार में इन दिनों लकड़ी की कटाई, घिसाई और फिनिशिंग का काम चल रहा है। बंदियों द्वारा तैयार किए जा रहे फर्नीचर को कारागार विभाग की ओर से लगाए जाने वाले विशेष स्टाल पर प्रदर्शित किया जाएगा।
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खास बात यह है कि यह सिर्फ प्रदर्शनी तक सीमित नहीं रहेगा। अगर खरीदारों ने हाथों-हाथ लिया और बड़े आर्डर मिले तो उत्पादन भी उसी अनुपात में बढ़ाया जाएगा। यानी सलाखों के पीछे बंद हाथ अब बाजार की मांग के हिसाब से चलेंगे। जेल प्रशासन इस बार सिर्फ लकड़ी का हुनर लेकर सूरजकुंड नहीं पहुंचेगा।
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जिला कारागार में तैयार किया जा रहा सरसों का तेल भी स्टाल पर प्रदर्शित किया जाएगा। फर्नीचर और तेल के जरिए कारागार प्रशासन यह दिखाने की कोशिश करेगा कि बंदियों के पास सजा काटने के अलावा काम करने और हुनर सीखने की क्षमता भी है।

लकड़ी पर चलती आरी शायद उस सोच को भी काट रही है, जो हर बंदी को सिर्फ अपराधी मानकर उसकी बाकी पहचान खत्म कर देती है।

ऑर्डर मिला तो बढ़ेगा काम
जेल अधीक्षक सेवा सिंह ने बताया कि कारागार विभाग की ओर से विशेष स्टाल लगाया जाता है। इसमें प्रदेश की जेलों में बंद कैदियों और बंदियों द्वारा तैयार सामान को प्रदर्शित किया जाता है। झज्जर जेल में तैयार फर्नीचर और सरसों का तेल भी इस बार स्टाल पर शामिल रहेगा। मांग और बड़े आर्डर मिलने पर उसी अनुपात में उत्पादन किया जाएगा।
