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    हिसार के अंकुश पंघाल बने कामनवेल्थ गेम्स चैंपियन, इंग्लैंड के डिमेजी शिट्टू को हराकर जीता स्वर्ण पदक

    Updated: Sun, 02 Aug 2026 03:43 AM (IST)

    हिसार के अंकुश पंघाल ने कॉमनवेल्थ गेम्स में पुरुष 80 किलोग्राम वर्ग में स्वर्ण पदक जीता, उन्होंने फाइनल में इंग्लैंड के डिमेजी शिट्टू को हराया। उनकी इ ...और पढ़ें

    अंकुश पंघाल ने जीता गोल्ड। फोटो एक्स

    अंकुश पंघाल ने जीता गोल्ड। फोटो एक्स

    HighLights

    1. अंकुश पंघाल ने 80 किलोग्राम मुक्केबाजी में स्वर्ण पदक जीता।

    2. फाइनल में इंग्लैंड के डिमेजी शिट्टू को मात दी।

    3. हिसार के भेरियां गांव में खुशी और जश्न का माहौल।

    जागरण संवाददाता, हिसार। हरियाणा के हिसार के गांव भेरियां के स्टार मुक्केबाज अंकुश पंघाल ने कामनवेल्थ गेम्स में शानदार प्रदर्शन करते हुए पुरुष 80 किलोग्राम वर्ग का स्वर्ण पदक जीत लिया। फाइनल मुकाबले में उन्होंने इंग्लैंड के मुक्केबाज डिमेजी शिट्टू को हराकर भारत की झोली में गोल्ड मेडल डाला। उनकी इस उपलब्धि से हिसार और हरियाणा में खुशी की लहर है।

    अंकुश ने पूरे टूर्नामेंट में दमदार प्रदर्शन किया। क्वार्टर फाइनल में उन्होंने स्काटलैंड के डैनियल नेल्सन को हराकर अंतिम चार में जगह बनाई। इसके बाद सेमीफाइनल में कनाडा के जोशुआ ओफोरी को 5-0 के एकतरफा अंतर से मात देकर फाइनल में प्रवेश किया। फाइनल में भी उन्होंने शानदार मुक्केबाजी करते हुए इंग्लैंड के डिमेजी शिट्टू को हराकर स्वर्ण पदक अपने नाम कर लिया।

    अंकुश की जीत की खबर मिलते ही भेरियां गांव में जश्न शुरू हो गया। परिवार के सदस्यों, रिश्तेदारों और ग्रामीणों ने पटाखे फोड़कर खुशी मनाई और एक-दूसरे का मुंह मीठा कराया। पूरे गांव में उत्सव जैसा माहौल रहा और लोगों ने भारत माता के जयकारे लगाए।

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    मोबाइल पर मौच देखते अंकुश पंघाल के पिता। फोटो जागरण

    अंकुश की सफलता के पीछे उनके परिवार और कोच का बड़ा योगदान रहा है। उनके पिता सुरेश पंघाल राष्ट्रीय स्तर के कबड्डी खिलाड़ी रह चुके हैं और गांव की मुख्य सड़क पर होटल का संचालन करते हैं। उनकी माता मुकेश ने भी बेटे को हर कदम पर प्रोत्साहित किया। अंकुश की तीन बड़ी बहनें भी खेलों से जुड़ी हैं। नीलम राइफल शूटिंग कोच हैं, अंजू बाला बाक्सर हैं और नीतू रानी को बाक्सिंग के दम पर रेलवे में नौकरी मिली है।

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    करीब 12 वर्ष की उम्र में अंकुश ने मुक्केबाजी की शुरुआत की थी। शुरुआती प्रशिक्षण उन्हें कोच राजेश से मिला, जबकि बाद में कोच प्रदीप सावंत के मार्गदर्शन में उन्होंने अपने खेल को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। उनकी यह उपलब्धि प्रदेश के युवाओं के लिए प्रेरणा बन गई है।