चार बड़ी ड्रेन, 67 किमी लंबा नेटवर्क... फिर क्यों डूबता है गुरुग्राम? खुली सिस्टम की पोल
गुरुग्राम में मानसून के दौरान जलभराव की समस्या ड्रेनों की कमी से नहीं, बल्कि उनके कमजोर कनेक्टिंग नेटवर्क, अधूरे कनेक्शन और अवैध सीवर से है। करोड़ों ख ...और पढ़ें

शुक्रवार को दिन-भर हुई झमाझम वर्षा से साइबर सिटी की विभिन्न सड़कें इस तरह दरिया में तब्दील हो गई थी। यह तस्वीर है सिग्नेचर टावर की है। जागरण आर्काइव
HighLights
गुरुग्राम में जलभराव ड्रेनों की कमी नहीं, कमजोर नेटवर्क से।
अवैध सीवर कनेक्शन और अधूरे लिंक बड़ी समस्या बन रहे।
नियमित सफाई और क्षमता वृद्धि की विशेषज्ञ सलाह महत्वपूर्ण।
संदीप रतन, गुरुग्राम। यूं तो वर्षा का मौसम सुहाना होता है, लेकिन गुरुग्राम के बाशिंदों के लिए यह डरावना बन जाता है। वर्षा के पानी में जलमग्न सड़कें, लंबा ट्रैफिक जाम, पानी में डूबी गाड़ियां...यह कोई नई बात नहीं बल्कि पिछले दस वर्षों से गुरुग्राम की यही कहानी है। लेकिन स्थायी समाधान अभी भी जमीनी हकीकत से कोसों दूर है।
जीएमडीए और नगर निगम ने इस सूरत को बदलने के लिए करोडों रुपये खर्च कर दिए, लेकिन सौ प्रतिशत नतीजे मिलना अभी बाकी है। कुछ स्थानों पर सुधार हुआ तो जलभराव के नए-नए हाटस्पाट सामने आ रहे हैं। दिल्ली-जयपुर हाईवे के नरसिंहपुर, सदर्न पेरिफेरल रोड सहित कई स्थानों पर तेज वर्षा में पहले से राहत रही है। ड्रेनों की कमी नहीं है, लेकिन यह नेटवर्क आपस में जुड़ा नहीं होने से मानसून की परीक्षा में शहर फेल हो रहा है।
गुरुग्राम में बरसाती पानी की निकासी के लिए चार प्रमुख मास्टर ड्रे लेग-1, लेग-2, लेग-3 और लेग-4 मौजूद हैं। इनकी कुल लंबाई करीब 67.22 किलोमीटर है। इसके बावजूद जलभराव यह संकेत देता है कि समस्या बड़ी ड्रेनों की कमी से ज्यादा उनके कनेक्टिंग नेटवर्क की कमजोर कड़ियों में है।
चारों मास्टर ड्रेन के नजफगढ़ ड्रेन तक जाने वाले नेटवर्क में भी कहीं लीकेज, कहीं कमजोर या अधूरे कनेक्शन तथा अवैध सीवर कनेक्शन जलभराव की समस्या पैदा कर रहे हैं।वहीं इनमें से तीन पुरानी ड्रेनों की भी क्षमता बढ़ाने, मरम्मत करने और नियमित सफाई नहीं होने से भी जलनिकासी सिस्टम फेल हो रहा है।
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चार बड़ी ड्रेन, 67 किमी का मुख्य निकासी नेटवर्क
अरावली क्षेत्र से आने वाले बरसाती पानी को क्रीक, छोटे नालों और सेक्टर स्तर की ड्रेनों के जरिये चार मुख्य मास्टर ड्रेन तक पहुंचाया जाताहै। इनमें लेग-1 करीब 12.36 किमी, लेग-2 करीब 16.36 किमी, लेग-3 करीब 26.50 किमी और लेग-4 करीब 12 किमी लंबी है। ये सभी ड्रेन शहर के अलग-अलग हिस्सों का पानी समेटकर आगे नजफगढ़ ड्रेन की ओर ले जाने वाली मुख्य व्यवस्था का हिस्सा हैं।
छोटी ड्रेन और मुख्य ड्रेन के बीच कमजोर कनेक्शन
जलभराव की बड़ी वजह सेक्टरों और कॉलोनियों से निकलने वाले छोटे नालों और सरफेस ड्रेन का मुख्य नेटवर्क से सही तरीके से कनेक्ट नहीं होना है। कई जगह कनेक्शन अधूरे हैं तो कहीं क्षमता कम है। वर्षा के दौरान यही छोटी कड़ियां पानी को आगे पहुंचाने के बजाय सड़क और खाली प्लाटों में रोक देती हैं। ऐसे में मुख्य ड्रेन मौजूद होने के बावजूद स्थानीय स्तर पर जलभराव बना रहता है।
लेग-2 में मध्य शहर का पानी, लेग-3 सबसे लंबा कॉरिडोर
16.36 किमी लंबी लेग-2 अतुल कटारिया चौक, शीतला माता रोड, अशोक विहार और आसपास के क्षेत्रों की निकासी व्यवस्था से जुड़ी है। वहीं 26.50 किमी लंबी लेग-3 यानी बादशाहपुर ड्रेन चारों में सबसे लंबी है। घाटा, बादशाहपुर, गाडौली, सेक्टर-37डी, धनकोट और आसपास के क्षेत्रों का पानी इस नेटवर्क में आता है। अरावली से तेजी से पानी आने पर इस पूरे कैचमेंट पर दबाव बढ़ जाता है। लेग चार लेग-3 ड्रेन का दबाव कम करने और नए गुरुग्राम के सेक्टरों से पानी की निकासी के लिए तैयार की गई है।
तीनों ड्रेन में 119.2 एमएलडी अनट्रीटेड पानी, बढ़ रहा दबाव
बरसाती नेटवर्क के साथ मुख्य ड्रेन में अवैध सीवर कनेक्शन और डिस्चार्ज भी बड़ी चुनौती हैं। लेग-1 में आठ डिस्चार्ज प्वाइंट चिह्नित किए गए हैं, जिनमें चार बंद हो चुके हैं और करीब 18 एमएलडी अनट्रीटेड पानी बह रहा है। लेग-2 में 20 में से आठ डिस्चार्ज प्वाइंट बंद हुए हैं और करीब 46 एमएलडी अनट्रीटेड पानी के साथ 7.76 एमएलडी औद्योगिक अपशिष्ट पहुंच रहा है। लेग-3 में 37 में से नौ प्वाइंट बंद हुए हैं और करीब 55.2 एमएलडी अनट्रीटेड पानी बह रहा है। सभी अवैध डिस्चार्ज प्वाइंट को दिसंबर 2026 तक बंद करने का लक्ष्य है।
4 मुख्य बसाती ड्रेन
- 67.22 किमी चारों ड्रेन की कुल लंबाई
- 26.50 किमी लेग-3 की लंबाई
- 16.36 किमी लेग-2 की लंबाई
- 12.36 किमी लेग-1 की लंबाई
- 12 किमी लेग -4 की लंबाई
119.2 एमएलडी तीनों ड्रेन में अनट्रीटेड पानी
सेवानिवृत्त मुख्य अभियंता प्रदीप कुमार के अनुसार गुरुग्राम की ड्रेनों की समय-समय पर क्षमता बढ़ाने की जरूरत है। इसके अलावा नियमित सफाई होनी चाहिए। अवैध सीवर कनेक्शन काटने के लिए अभियान चलाए जाने चाहिए। शहर का दायरा और आबादी बढ़ने के कारण ड्रेनों पर भी दबाव हो गया है। अगर वर्षा के दो घंटे के बाद भी अगर कहीं जलभराव रहता है तो इसका अर्थ यह है कि नालों की सफाई नहीं की गई है।