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    फतेहाबाद में नशे का केस रफा-दफा करने के नाम पर रिश्वत, बिचौलिया गिरफ्तार; पूछताछ के बाद SHO रिहा

    Updated: Sat, 08 Aug 2026 09:38 PM (GMT+05:30)

    करनाल एसीबी ने फतेहाबाद के टोहाना में नशे का मामला दबाने के एवज में 50 हजार रुपये की रिश्वत लेते बिचौलिए किरपाल को रंगे हाथों गिरफ्तार किया। ...और पढ़ें

    फतेहाबाद में नशे के केस में रिश्वतखोरी, पूछताछ के बाद एसएचओ रिहा।

    फतेहाबाद में नशे के केस में रिश्वतखोरी, पूछताछ के बाद एसएचओ रिहा।

    HighLights

    1. नशे का केस दबाने के लिए बिचौलिए ने ली रिश्वत

    2. करनाल एसीबी ने 50 हजार रुपये लेते रंगे हाथों पकड़ा

    3. एसएचओ से पूछताछ हुई, सबूत न मिलने पर रिहा

    जागरण संवाददाता, फतेहाबाद। नशे का एक मामला दबाने के एवज में रिश्वत लेने के आरोप में करनाल एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) की टीम ने कार्रवाई करते हुए एक बिचौलिए किरपाल को 50 हजार रुपये लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया है।

    बिचौलिए द्वारा टोहाना शहर थाना प्रभारी कुलदीप सिंह का नाम लेने पर एसीबी ने एसएचओ को भी तलब किया और उनके कार्यालय व सरकारी गाड़ी की तलाशी ली। शुक्रवार देर रात तक चली पूछताछ के बाद, प्रारंभिक सबूतों के अभाव में एसएचओ को छोड़ दिया गया।

    ऐसे बिछाया गया एसीबी का जाल

    मामले की शुरुआत: 11 दिसंबर 2025 को टोहाना पुलिस ने बिठमड़ा निवासी जगजीत सिंह को 7 ग्राम हेरोइन के साथ पकड़ा था।
    5 लाख रुपये की डील: शिकायतकर्ता जगजीत के अनुसार, किरपाल नामक बिचौलिए ने एनडीपीएस केस से नाम हटवाने के नाम पर 5 लाख रुपये की डील की थी। इसमें से साढ़े चार लाख रुपये पहले ही दिए जा चुके थे।
    रंगे हाथों गिरफ्तारी: शेष 50 हजार रुपये शुक्रवार को दिए जाने थे। जगजीत की शिकायत पर करनाल यूनिट के इंचार्ज अरविंद कुमार के नेतृत्व में टीम ने केमिकल लगे नोट देकर ट्रैप लगाया और कीरतपाल को पैसे लेते ही दबोच लिया।

    एसएचओ से देर रात तक पूछताछ

    गिरफ्तारी के बाद पूछताछ के दौरान बिचौलिए ने दावा किया कि वह यह रकम एसएचओ कुलदीप सिंह के नाम पर ले रहा था। इसके तुरंत बाद एसीबी टीम ने एसएचओ के कार्यालय और सरकारी गाड़ी की बारीकी से जांच की। इसके पश्चात एसएचओ, बिचौलिए और शिकायतकर्ता को फतेहाबाद स्थित एसीबी कार्यालय लाया गया।

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    इस कार्रवाई की सूचना मिलते ही जिले के कई अन्य एसएचओ और चौकी प्रभारी भी एसीबी कार्यालय पहुंच गए। रात करीब एक बजे तक एसएचओ से कड़े सवाल-जवाब हुए, लेकिन रिश्वत मांगने या लेने का कोई ठोस सुबूत न मिलने पर उन्हें रिहा कर दिया गया।

    एसीबी कर रही है गहराई से जांच

    एसीबी टीम के इंचार्ज अरविंद कुमार ने बताया कि उन्हें शिकायत मिली थी कि एनडीपीएस केस को निपटाने की एवज में एसएचओ किसी मीडिएटर के जरिए रिश्वत की मांग कर रहे हैं। उच्चाधिकारियों के निर्देश पर कार्रवाई करते हुए बिचौलिए को 50 हजार रुपये के साथ रंगे हाथों पकड़ा है।

    एसएचओ की भूमिका अभी जांच प्रक्रिया का हिस्सा है। फिलहाल बिचौलिए से सघन पूछताछ कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि उसने एसएचओ का नाम किस आधार पर लिया और इस 5 लाख रुपये की कथित डील में उसके साथ और कौन-कौन लोग शामिल हैं।