काजल हेड़ी: बिश्नोई समाज का प्रकृति प्रेम, तालाब में 250 साल पुराने कछुए, इंसानों संग खुले घूमते हैं हिरण और नीलगाय
काजल हेड़ी, हरियाणा का एक अनूठा गांव है, जहां बिश्नोई समाज प्रकृति और वन्यजीवों का संरक्षण करता है, जिसमें हिरण, नीलगाय और 250 साल पुराने कछुए शामिल हैं।
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बिश्नोई समाज की पहचान।
HighLights
बिश्नोई समाज प्रकृति और वन्यजीवों का करता है संरक्षण।
गांव के तालाब में हैं 250 साल पुराने दुर्लभ कछुए।
ग्रामीण बैंक और नियमित बस सेवा की कर रहे मांग।
कप्तान आर्य, गोरखपुर। हरियाणा के ग्रामीण अंचल में कई ऐसे गांव हैं, जिनकी पहचान केवल उनकी आबादी या कृषि से नहीं, बल्कि प्रकृति और वन्यजीवों से जुड़ी परंपराओं से होती है। ऐसा ही गांव है काजल हेड़ी, जो काजल हेड और गोरखपुर परमाणु संयंत्र के आसपास स्थित है।
गोरखपुर से करीब पांच किलोमीटर दूर बसे इस गांव में प्रकृति और जीव संरक्षण की परंपरा आज भी ग्रामीण जीवन का हिस्सा है। गांव में हिरण और नीलगायों के झुंड खुले में घूमते दिखाई देना यहां के प्राकृतिक वातावरण की खास पहचान है।
गांव में मुख्य रूप से बिश्नोई समाज की आबादी है। बिश्नोई समाज की प्रकृति और जीवों के प्रति संवेदनशीलता का असर गांव के वातावरण में साफ दिखाई देता है। ग्रामीणों के लिए हिरण, नीलगाय और अन्य जीव केवल वन्यजीव नहीं, बल्कि गांव की प्राकृतिक विरासत का हिस्सा हैं।
यही कारण है कि इन जीवों के संरक्षण के प्रति ग्रामीण विशेष रूप से सजग रहते हैं। काजल हेड़ी की सबसे अनोखी पहचान यहां का कछुआ तालाब है। ग्रामीणों के अनुसार तालाब में करीब 150 से 250 वर्ष पुराने दुर्लभ कछुए पाए जाते हैं।
मंदिरों और धार्मिक स्थलों से समृद्ध गांव
गांव में कई धार्मिक स्थल भी हैं, इनमें हनुमान मंदिर, शिव मंदिर, शनि मंदिर, भमिया मंदिर, गुरु जम्भेश्वर मंदिर और गोरखनाथ मंदिर प्रमुख हैं। इसके अलावा गांव में गौशाला और राधा स्वामी सत्संग भवन भी स्थित हैं। धार्मिक आस्था और जीव संरक्षण की परंपरा गांव के सामाजिक जीवन को अलग पहचान देती है।

1952 से अब तक 12 सरपंचों ने संभाली कमान
काजल हेड़ी की पंचायत व्यवस्था का इतिहास भी पुराना है। वर्ष 1952 से अब तक गांव में सिद्धू भादू, सुरजाराम भादू, रामजीलाल, बाबूराम, सहीराम, ख्यालीराम, रामसिंह, इंद्रसिंह सहारण, रंगलाल, लक्ष्मी, भूपसिंह सहित कई लोगों ने सरपंच के रूप में जिम्मेदारी संभाली।
वर्तमान में अनसूरया गांव की सरपंच हैं और विकास कार्यों को आगे बढ़ा रही हैं। गांव की आबादी करीब पांच हजार है और लगभग तीन हजार मतदाता हैं। गांव में 12 वार्ड और दो नंबरदार हैं।
ग्रामीणों के अनुसार यहां करीब 30 सरकारी कर्मचारी कार्यरत हैं। इनमें रामसिंह कमांडर का नाम विशेष रूप से लिया जाता है, जिन्होंने देश सेवा के बाद शिक्षक के रूप में सेवाएं दीं।
उनके परिवार के सदस्य भी उच्च पदों पर कार्यरत हैं। देवेन्द्र सिंह राजस्थान में आइजी, संगीता बिश्नोई फतेहाबाद में डीईडी, सुनीता बिश्नोई पूर्व सीएमओ और छोटी बेटी जयपुर में चिकित्सक हैं। गांव के अशोक कुमार भी पुलिस विभाग में उच्च अधिकारी हैं।

सुविधाएं हैं, लेकिन बैंक और बस सेवा का इंतजार
गांव में जलापूर्ति, तीन आंगनबाड़ी केंद्र, ग्राम सचिवालय, दो अनुसूचित जाति की चौपाल, उप स्वास्थ्य केंद्र, पशु अस्पताल और पुस्तकालय जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं।
इसके बावजूद ग्रामीणों की प्रमुख मांगों में बैंक और नियमित बस परिवहन सुविधा शामिल है। लोगों का कहना है कि बैंकिंग और आवागमन के लिए उन्हें दूसरे स्थानों पर जाना पड़ता है। गांव की पश्चिम दिशा की फिरनी की हालत खराब है।
