फरीदाबाद में पेश की मिसाल: जाते-जाते कई जिंदगियों को रोशन कर गई बेटी; परिवार ने किया अंगदान
फरीदाबाद में सड़क दुर्घटना में घायल 21 वर्षीय युवती की मौत के बाद परिवार ने अंगदान का बड़ा फैसला लिया। ...और पढ़ें
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बेटी को खोने के बाद परिवार ने अंगदान का निर्णय लिया। जागरण
HighLights
फरीदाबाद में सड़क दुर्घटना में घायल युवती की इलाज के दौरान मृत्यु।
परिवार ने बेटी के लिवर, किडनी और कार्निया का दान किया।
इस अंगदान से कई गंभीर मरीजों को मिला नया जीवन।
निभा रजक, फरीदाबाद। फरीदाबाद में सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल 21 वर्षीय युवती की इलाज के दौरान मौत हो गई। बेटी को खोने के इस असहनीय दुख की घड़ी में परिवार ने अहम फैसला लेते हुए गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों को जीवन की नई उम्मीद दी है।
परिवार के अनुसार, युवती के लिवर, दोनों किडनी और कार्निया का दान किया गया है। परिवार का यह निर्णय मानवता और अंगदान के महत्व का प्रेरक उदाहरण बन गया है।
नहीं बचाई जा सकी जिंदगी
घायल युवती को 20 अगस्त की रात अमृता अस्पताल लाया गया। इससे पहले भी उसका कुछ अस्पतालों में इलाज चला था। मस्तिष्क में चोट लगने के कारण हालात स्थिर थी। उसे न्यूरो आईसीयू में भर्ती कर गहन उपचार शुरू किया गया। मस्तिष्क की चोट इतनी गंभीर थी कि उसका जीवन नहीं बचाया जा सका।
इसके बाद चिकित्सकों की टीम ने परिवार को अंगदान के बारे में बताया। जीवन के सबसे कठिन और भावनात्मक क्षणों के बीच परिवार ने अंगदान के लिए सहमति दी। इसके बाद युवती के लिवर, दोनों किडनी और कार्निया जरूरतमंद मरीजों को आवंटित किए गए।
बताया कि एक किडनी का प्रत्यारोपण अमृता अस्पताल में एक मरीज को किया गया, जबकि अन्य अंग निर्धारित प्रत्यारोपण केंद्रों में जरूरतमंद मरीजों के लिए भेजे गए।
अंतरराज्यीय ग्रीन कॉरिडोर तैयार किया गया
दान किए गए अंग को कम से कम समय में राज्य की सीमा पार उसके निर्धारित गंतव्य तक पहुंचाने के लिए हरियाणा और दिल्ली पुलिस ने विशेष अंतरराज्यीय ग्रीन कॉरिडोर तैयार किया। दोनों राज्यों की पुलिस और यातायात टीमों ने आपसी समन्वय से परिवहन व्यवस्था संभाली। जिससे समय पर मरीज तक अंग पहुंचाए जा सके।
इस प्रक्रिया में जिला प्रशासन एवं उपायुक्त कार्यालय, मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. जयंत आहूजा, डीसीपी सेंट्रल और खेड़ी पुल पुलिस का सहयोग लिया गया।
कई जिंदगियों को जीने का दिया अवसर
अमृता अस्पताल के न्यूरोक्रिटिकल केयर एवं न्यूरोएनेस्थीसिया हेड डॉ. गौरव कक्कड़ ने बताया कि चिकित्सा में कई बार ऐसे क्षण आते हैं, जब हमारे हर संभव प्रयास के बावजूद किसी जीवन को बचाया नहीं जा सकता। लेकिन इस परिवार ने उसके बाद जो निर्णय लिया, वह असाधारण था। अपने जीवन के सबसे गहरे दुख के बीच उन्होंने उन लोगों के बारे में सोचा, जिन्हें वह कभी जानते तक नहीं थे।
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यह विश्व अंगदान अभियान के दौरान एक बड़ा संदेश भी देता है। परिवार के इस निर्णय ने यह सुनिश्चित किया कि उनकी बेटी की कहानी उस सड़क दुर्घटना के साथ समाप्त न हो, उसका जीवन थमा, लेकिन उसके अंगों ने कई दूसरी जिंदगियों को आगे बढ़ने का अवसर दिया है।
