भिवानी के माता पहाड़ी मंदिर में चढ़ावे का चोरी, पूर्व कर्मचारी ने ही आस्था को लगाया चूना; करोड़ों का सामान बरामद
माता पहाड़ी मंदिर में हुई करोड़ों की चोरी के मामले में पूर्व कर्मचारी आशीष को गिरफ्तार किया गया है। ...और पढ़ें
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पूर्व कर्मचारी ने ही आस्था को लगाया करोड़ों का चूना (फोटो: जागरण)
संवाद सूत्र, ढिगावा मंडी। लोहारू थाना पुलिस ने प्रसिद्ध माता पहाड़ी मंदिर से नगदी एवं कीमती आभूषण चोरी के बहुचर्चित मामले में मंदिर के पूर्व कर्मचारी पहाड़ी वासी आशीष को गिरफ्तार कर कई महत्वपूर्ण खुलासे किए हैं।
पुलिस ने तीन दिन के रिमांड के दौरान आरोपित के कब्जे से दो लाख रुपये नकद तथा लाखों रुपये मूल्य के चांदी के बर्तन, गहने बरामद किए हैं। मामले में जांच अभी जारी है और पुलिस अन्य पहलुओं को भी खंगाल रही है।
मामले में समाजसेवी नरेश निवासी पहाड़ी की शिकायत पर माता पहाड़ी मंदिर से नगदी एवं आभूषण चोरी होने का मामला दर्ज किया गया था। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों, पूछताछ और अन्य तथ्यों के आधार पर जांच को आगे बढ़ाया।
जांच के दौरान 20 जून 2026 को पुलिस टीम ने आरोपित आशीष के घर की तलाशी ली। तलाशी के दौरान 100 ग्राम का एक सोने का बिस्किट, दो सोने के कड़े, एक चांदी का गिलास, दो चांदी के चम्मच, एक चांदी का दीपक सेट, एक चांदी की थाली, दो चांदी की प्लेटें, चार चांदी की कटोरियां तथा एक चांदी की लुटिया बरामद हुई। आरोपित इन कीमती सामानों के संबंध में कोई वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सका, जिसके बाद पुलिस ने सभी सामान को कब्जे में लेकर जांच में शामिल कर लिया।
इसके बाद 26 जून 2026 को पुलिस ने आरोपी आशीष को गिरफ्तार कर लिया। 27 जून को उसे अदालत में पेश कर तीन दिन के पुलिस रिमांड पर लिया गया। रिमांड के दौरान हुई गहन पूछताछ में आरोपित ने कई अहम खुलासे किए। उसकी निशानदेही पर दो लाख रुपये नकद और पांच चांदी के बर्तन बरामद किए गए।
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पुलिस के अनुसार आरोपित ने स्वीकार किया कि वह वर्ष 2009 से 2018 तक माता पहाड़ी मंदिर में चौकीदारों का इंचार्ज तथा वर्ष 2018 से 2023 तक सीसीटीवी कैमरों का इंचार्ज रहा।
इसी दौरान उसने मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था और अपनी जिम्मेदारी का दुरुपयोग करते हुए समय-समय पर श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाई गई नकदी और कीमती आभूषणों की चोरी कर उन्हें अपने घर में जमा करना शुरू कर दिया।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आरोपित ने लंबे समय तक मंदिर में कार्य करने के कारण व्यवस्था की पूरी जानकारी का फायदा उठाया और आस्था की अमानत पर लगातार हाथ साफ करता रहा। तीन दिन के रिमांड में हुई बरामदगी के बाद पुलिस को उम्मीद है कि मामले में आगे भी कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं।
रिमांड अवधि समाप्त होने पर आरोपी को पुनः न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में जिला कारागार भेज दिया। पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि चोरी का वास्तविक दायरा कितना बड़ा था, क्या चोरी का अन्य सामान अभी भी कहीं छिपाया गया है तथा इस पूरे प्रकरण में किसी अन्य व्यक्ति की संलिप्तता तो नहीं रही।