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    SDM रहे विजेंद्र सिंह हुड्डा को सौंपी सीईओ की कमान, चरखी दादरी में विकास कार्यों में आएगी तेजी

    Updated: Sun, 09 Aug 2026 06:24 PM (IST)

    विजेंद्र हुड्डा को दादरी जिला परिषद और डीआरडीए का सीईओ नियुक्त किया गया है। यह नियुक्ति जिले में 50 करोड़ रुपये की अटकी ग्रामीण विकास योजनाओं को गति द ...और पढ़ें

    विजेंद्र हुड्डा बने जिला परिषद सीईओ।

    विजेंद्र हुड्डा बने जिला परिषद सीईओ।

    HighLights

    1. विजेंद्र हुड्डा दादरी जिला परिषद, डीआरडीए के नए सीईओ बने

    2. जिले में 50 करोड़ की अटकी ग्रामीण योजनाएं होंगी पूरी

    3. फिरनी विकास, उप स्वास्थ्य केंद्र, वित्त आयोग के कार्य शामिल

    संवाद सहयोगी, बाढड़ा। चरखी दादरी जिले में पिछले एक साल से अटकी पचास करोड़ की ग्रामीण विकास योजनाओं को पूरा करने, ग्रामीण विकास कार्यों को गति देने और जिला परिषद से जुड़े विकास कार्यो में तेजी लाने के उद्देश्य से विशेष प्रशासनिक नियुक्ति की है।

    जिले में वर्ष 2013 से वर्ष 2015 तक करीब दो वर्ष तक एसडीएम के पद पर सेवाएं दे चुके विजेंद्र हुड्डा एचसीएस को जिला परिषद दादरी का मुख्य कार्यकारी अधिकारी सीईओ तथा जिला ग्रामीण विकास अभिकरण डीआरडीए का सीइओ नियुक्त किया गया है। विकास एवं पंचायत विभाग तथा जिला परिषद के माध्यम से जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्यों के लिए उपलब्ध राशि का अपेक्षित स्तर पर उपयोग नहीं हो पाया है।

    पिछले करीब तीन वर्षा से ग्रामीण विकास के लिए उपलब्ध धनराशि का पूरा उपयोग नहीं होना भी प्रशासन के सामने चुनौती रही है। जिले के करीब 28 गांवों में फिरनियों के विकास, 16वें वित्त आयोग से संबंधित विकास कार्यो व उप स्वास्थ्य केंद्रों के निर्माण को लेकर हरियाणा सरकार ने अहम जिम्मेदारी सौंपी है।

    इन विकास कार्यो को धरातल पर शुरू कराने के लिए बिजेंद्र हुड्डा को बतौर सीइओ नई जिम्मेदारी दी गई है। जिले के करीब 28 गांवों की फिरनियों के विकास के लिए लगभग 15 करोड़ रुपये की राशि निर्धारित की गई है।

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    वहीं, 16वें वित्त आयोग के तहत करीब नौ करोड़ रुपये के विकास कार्य व उप स्वास्थ्य केंद्रों के निर्माण के लिए करीब 14 करोड़ रुपये की राशि का प्रावधान है। ऐसे में सरकार की ओर से नई जिम्मेदारी को ग्रामीण विकास कार्यों में तेजी लाने की कवायद के तौर पर देखा जा रहा है।

    चरखी दादरी जिले में बड़ी संख्या में ग्रामीण आबादी होने के कारण जिला परिषद और डीआरडीए की भूमिका काफी महत्वपूर्ण है। ऐसे में सरकार द्वारा अनुभवी अधिकारी को यह जिम्मेदारी दिए जाने से ग्रामीण क्षेत्रों में रुके हुए विकास कार्यों को गति मिलने की उम्मीद जगी है।

    अब देखने वाली बात होगी कि नई जिम्मेदारी मिलने के बाद विजेंद्र हुड्डा जिला परिषद के लंबित कार्यों और उपलब्ध विकास राशि के उपयोग को किस तरह गति देते हैं। यदि योजनाओं का समयबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित होता है तो इसका सीधा लाभ जिले के गांवों और ग्रामीण आबादी को मिल सकता है।