सूरत: डॉक्टर सुसाइड केस में बड़ा एक्शन, रैगिंग के आरोप में 4 सीनियर चिकित्सक 6 महीने के लिए निलंबित
सूरत के न्यू सिविल हॉस्पिटल में डॉ. हर्ष पंड्या की आत्महत्या के मामले में रैगिंग के आरोप सामने आए हैं। जांच के बाद 4 सीनियर डॉक्टरों को 6 महीने के लिए ...और पढ़ें
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सूरत डॉक्टर सुसाइड केस रैगिंग में बड़ा एक्शन (यह तस्वीर AI की मदद से बनाई गई है।)

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जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
डिजिटल डेस्क, सूरत। सूरत के न्यू सिविल हॉस्पिटल के हॉस्टल में रहने वाले डॉ. हर्ष पंड्या की आत्महत्या के मामले में एक बेहद चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। इस संवेदनशील मामले की जांच के दौरान रैगिंग के गंभीर आरोप सामने आने के बाद अस्पताल और मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने बेहद कड़ा रुख अख्तियार किया है।
जूनियर छात्रों की लिखित शिकायतों को सही पाते हुए प्रशासन ने 4 सीनियर रेजिडेंट डॉक्टरों को तत्काल प्रभाव से 6 महीने के लिए निलंबित कर दिया है।
एंटी रैगिंग कमेटी की जांच में खुली पोल
मिली जानकारी के अनुसार, कॉलेज की एंटी रैगिंग कमेटी ने देर रात तक गहन जांच की और लगभग 9 जूनियर छात्रों से आमने-सामने पूछताछ की। इस पूछताछ के दौरान जूनियर छात्रों ने सीनियर्स के प्रताड़ना भरे व्यवहार और रैगिंग की घटनाओं को लेकर कमेटी के समक्ष लिखित में अपनी आपबीती दर्ज कराई।
अस्पताल और हॉस्टल से बेदखल, शैक्षणिक कार्यों पर भी पाबंदी
जूनियर छात्रों के आरोपों की गंभीरता को देखते हुए कॉलेज काउंसिल ने तुरंत अनुशासनात्मक कार्रवाई का फैसला लिया। जिन 4 सीनियर डॉक्टरों को निलंबित किया गया है, उनमें डॉ. निराली वसावा, डॉ. अनुज माहेश्वरी, डॉ. दीक्षिताबेन सेसरियन और डॉ. हिना भूत शामिल हैं।
इन चारों आरोपी डॉक्टरों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए अगले 6 महीनों तक उनके अस्पताल के कामकाज संभालने, हॉस्टल में रहने और किसी भी प्रकार की शैक्षणिक गतिविधियों (टीचिंग एक्टिविटी) में शामिल होने पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया गया है। निलंबन की इस अवधि के दौरान वे किसी भी क्लास या कॉलेज गतिविधि का हिस्सा नहीं बन पाएंगे।
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विभाग प्रमुखों पर भी गिरी गाज
इस पूरे घटनाक्रम में प्रशासन ने केवल आरोपी छात्रों पर ही नहीं, बल्कि लापरवाही बरतने वाले जिम्मेदार फैकल्टी सदस्यों पर भी कड़ा एक्शन लिया है। कॉलेज प्रशासन ने माइक्रोबायोलॉजी विभाग की प्रमुख डॉ. सुमैया मुल्ला के साथ-साथ डॉ. संगीता राजदे, डॉ. योगिता मिस्त्री और डॉ. लतिका पुरोहित को कारण बताओ (शो कॉज) नोटिस जारी किया है।
कॉलेज काउंसिल द्वारा इस पूरी कार्रवाई की रिपोर्ट को मंजूरी देकर राज्य सरकार को भी आधिकारिक तौर पर सौंप दिया गया है।
क्या रैगिंग के कारण ही डॉ. हर्ष ने उठाया आत्मघाती कदम?
इस समय सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या डॉ. हर्ष पंड्या की असमय मौत के पीछे यही रैगिंग मुख्य वजह थी। हालांकि, कॉलेज प्रशासन और आंतरिक जांच दल ने स्पष्ट किया है कि रैगिंग के इन आरोपों की वास्तविकता और आत्महत्या के बीच के सीधे संबंध को लेकर अंतिम निष्कर्ष पुलिस जांच के बाद ही साफ हो पाएगा।
आने वाले दिनों में इस मामले में पुलिस में औपचारिक शिकायत दर्ज होने की पूरी संभावना है।