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    मौत के 17 साल बाद शिक्षक को वापस मिली नौकरी, गुजरात हाई कोर्ट का बड़ा फैसला

    Updated: Sun, 05 Jul 2026 09:39 AM (IST)

    गुजरात हाई कोर्ट ने एक मृत शिक्षक हर्षद भावसार की नौकरी को उनकी मृत्यु के 17 साल और नियुक्ति के 33 साल बाद बहाल करने का आदेश दिया है। ...और पढ़ें

    गुजरात हाई कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला (फाइल फोटो)

    गुजरात हाई कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला (फाइल फोटो)

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    डिजिटल डेस्क, अहमदाबाद। गुजरात हाई कोर्ट का एक हैरान करने वाला फैसला सामने आया है। कोर्ट ने एक शिक्षक की नौकरी को उनकी मौत के 17 साल बाद और नियुक्ति के 33 साल बाद बहाल करने का आदेश दिया है।

    दरअसल, गुजरात सरकार ने साल 2021 में एक पुराने मामले को लेकर मृत शिक्षक हर्षद भावसार की नियुक्ति रद कर दी थी, जिसके चलते उनकी विधवा पत्नी को मिल रही फैमिली पेंशन भी बंद हो गई थी। राज्य सरकार के इस फैसले को खारिज करते हुए गुजरात हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने कहा कि इतने लंबे समय के बाद किसी की नियुक्ति को रद नहीं किया जा सकता।

    हर्षद भावसार और पांच अन्य लोगों को 1988 में सुज्ञान एजुकेशन ट्रस्ट द्वारा चलाए जा रहे एक स्कूल में टीचर के तौर पर नियुक्त किया गया था। पद के लिए जरूरी योग्यता की पुष्टि करने के बाद, जिला शिक्षा अधिकारी ने 1989 में उनकी नियुक्ति को रेगुलर कर दिया था।

    शिक्षक हर्षद भावसार की साल 2004 में मौत हो गई, जिसके बाद उनकी पत्नी को फैमिली पेंशन मिलने लगी।

    2021 में सरकार ने की थी कार्रवाई

    साल 2021 में स्कूल के डायरेक्टर ने एक कड़ा कदम उठाते हुए हर्षद भावसार समेत छह शिक्षकों और एक लाइब्रेरियन की नियुक्ति को रद कर दिया था। इस आदेश के तहत उन्हें मिलने वाले सभी सरकारी लाभ वापस ले लिए गए, उनके एम्प्लॉई नंबर ब्लॉक कर दिए गए और सैलरी व पेंशन का भुगतान भी तुरंत रोक दिया गया।

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    गुजरात हाई कोर्ट पहुंचे प्रभावित कर्मचारी

    इस फैसले के खिलाफ स्कूल ट्रस्ट और प्रभावित कर्मचारियों (जिसमें मृत शिक्षक भावसार की पत्नी भी शामिल थीं) ने साल 2021 में ही गुजरात हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

    हाई कोर्ट ने बताया क्यों नहीं रद की जा सकती नियुक्तियां

    मामले की सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट की सिंगल-जज बेंच ने सरकार के इस आदेश को पूरी तरह खारिज कर दिया। अपील को खारिज करते हुए, जस्टिस एन एस संजय गौडा और जे एल ओदेदरा की डिवीजन बेंच ने कहा कि तीन दशक (30 साल) से भी ज्यादा का समय बीत जाने के बाद इस तरह नियुक्तियां रद नहीं की जा सकतीं।

    सिंगल बेंच के इस फैसले से असहमत होकर राज्य सरकार ने विशेष रूप से हर्षद भावसार की नियुक्ति बहाली के खिलाफ हाई कोर्ट की डिवीन बेंच में अपील दायर की। लेकिन कोर्ट ने सरकार की इस दलील को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि इतने लंबे समय के बाद इस तरह की कार्रवाई कानूनी रूप से सही नहीं है।

    सिंगल बेंच के आदेश को सही ठहराते हुए बेंच ने कहा, "कर्मचारी की विधवा को फैमिली पेंशन देने के बाद, राज्य अब उसी नियुक्ति पर सवाल उठा रहा है जिसे उसके अधिकारियों ने रेगुलर किया था।"