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FIFA World Cup 2026 में सिर्फ गोल नहीं, जर्सियां भी बरसाएंगी पैसा, 15 करोड़ तक बिक्री का अनुमान

Updated: Sun, 14 Jun 2026 04:08 PM (IST)

फीफा वर्ल्ड कप 2026 सिर्फ खेल नहीं, बल्कि जर्सी कारोबार का भी बड़ा मंच बन गया है। फुटबॉल जर्सियां अब पहचान, फैशन और भावनाओं का प्रतीक हैं, जिससे इनका वैश्विक कारोबार 2026 तक 82,600 करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है।

FIFA World Cup के दौरान जर्सी की बिक्री 15 करोड़ के पार?

FIFA World Cup के दौरान जर्सी की बिक्री 15 करोड़ के पार?

HighLights

  1. FIFA World Cup 2026 के दौरान 15 करोड़ जर्सी बिकने का अनुमान 

  2. 82 करोड़ तक पहुंच सकता है वैश्विक कारोबार

  3. तीन स्पोर्ट्सवियर कंपनियों के बीच जंग

स्पोर्ट्स डेस्क, नई दिल्ली। FIFA World Cup 2026: फीफा वर्ल्ड कप 2026 का आगाज रोमांचक तरीके से हो चुका है। मैदान में खिलाड़ियों के पैरों से निकल रही गेंद गोलपोस्ट में जब जा रही है, तो स्टैंड्स में बैठे फैंस का शोर पूरे स्टेडिम में गूंज रहा हैं, लेकिन इस विश्व कप की एक और कहानी है, जो मैदान से बाहर लिखी जा रही है। ये कहानी है फुटबॉल प्लेयर्स की जर्सियों की, जिनके जरिए फैंस अपने पसंदीदा टीम को दुनिया के सामने सपोर्ट करत नजर आते हैं।

फुटबॉल की जर्सी, सिर्फ टीम या खेल तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि नए स्तर पर पहुंच गई है, जहां पहचान, फैशन और भावनाओं का ये प्रतीक बन चुकी है। यह ही वजह से फीफा विश्व कप के साथ जर्सी कारोबार भी रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच जाता है।

इंटरनेशनल रिसर्च एजेंसियों वेरिफाइड मार्केट रिपोर्ट्स और बिजनेस रिसर्च के मुताबिक, 2026 में फुटबॉल जर्सी का वैश्विक कारोबार करीब 82 हजार 600 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है। खेलों की दुनिया में ये किसी एक स्पोर्ट्सवियर कैटेगरी के लिए सबसे बड़ा बाजार माना जा रहा है।

FIFA World Cup के दौरान जर्सी की बिक्री 15 करोड़ के पार?

दरअसल, फीफा के आंकड़े बताते हैं कि फुटबॉल जर्सियां जो हमेशा बिकती हैं उनका करीब 55 प्रतिशत हिस्सा केवल विश्व कप के समय में बिकता है। वजह भी साफ है, जब कोई टूर्नामेंट अरब लोगों का ध्यान खींचता है तो फैंस अपनी पसंदीदा टीम को सपोर्ट करने के लिए उनकी जर्सी खरीदते हैं। अर्जेंटीना की नीली सफेद जर्सी, ब्राजील की पीले रंग की जर्सी, फ्रांस की नीली किट या पुर्तगाल का लाल रंग की जर्सी। हर जर्सी अपने साथ कहानी और अलग पहचान लेकर चलती है। बता दें कि इस बार फीफा विश्व कप संस्करण में पहली बार 48 टीमें वर्ल्ड कप खेल रही हैं और मैचों की संख्या 104 तक पहुंच गई है। इससे जर्सियों की मांग भी बढ़ गई है।

तीन स्पोर्ट्सवियर कंपनियों के बीच मुकाबला

फीफा वर्ल्ड कप सिर्फ टीमों के बीच मुकाबला नहीं है। मैदान के बाहर खेल जर्सियां बनाने वाली कंपनियों के बीच भी बड़ी जंग चल रही है। टूर्नामेंट में हिस्सा लेने वाली 48 टीमों में से 37 की आधिकारिक जर्सियां नाइकी, एडिडास और प्यूमा ने तैयार की हैं। यानी लगभग 77 प्रतिशत टीमें इन्हीं तीन ब्रांड्स की किट पहनकर मैदान में उतर रही हैं। जर्सियों और बाकी मर्चेंडाइज की बिक्री से इन कंपनियों को अरबों डॉलर की कमाई की उम्मीद है।

जर्सियों को लेकर दुनिया की तीन बड़ी स्पोर्ट्सवियर कंपनियों की बात करें तो नाइकी, एडिडास, प्यूमा के बीच जंग जारी है। माना जा रहा है कि टूर्नामेंट के दौरान दुनिया भर में 13 से 15 करोड़ जर्सियां बिक सकती हैं।

बता दें कि फुटबॉल मर्चेंडाइज का सबसे बड़ा बाजार अभी यूरोप और उत्तरी अमेरिका हैं, लेकिन सबसे तेज रफ्तार एशिया में दिखाई दे रही है। भारत में डिजिटल स्ट्रीमिंग और क्लब फुटबॉल की बढ़ती लोकप्रियता ने मेसी, रोनाल्डो, एमबापे जैसे खिलाड़ियों की जर्सियों को काफी लोकप्रिय बना दिया है।

कुछ एक्सपर्ट्स का मानना है कि वर्ल्ड कप के दौरान बिकने वाली हर तीसरी जर्सी में से एक नकली हो सकती है। कुल 13 से 15 करोड़ जर्सियों की संभावित बिक्री मेंल गभग 5 से 5.5 करोड़ जर्सियां फर्जी हो सकती हैं। इसकी बड़ी वजह आधिकारिक जर्सियों की ऊंची कीमते हैं, जबकि नकली जर्सियां लोकल बाजारों या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर बेहद सस्ते दामों पर मिल जाती हैं।

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