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'संजय लीला भंसाली ने खुद फोन किया था...', देवदास एक्ट्रेस अपरा मेहता ने फिल्मों से दूरी की बताई बड़ी वजह

By Deepesh PandeyEdited By: Tanya Arora
Updated: Fri, 16 Jan 2026 04:33 PM (IST)

क्योंकि सास भी कभी बहू थी से लेकर टेलीविजन पर बड़े-बड़े शोज करने वाली अभिनेत्री अपरा मेहता जल्द ही नए शो 'धारावाहिक प्रथाओं की ओढ़े चुनरी: बीदणी' के साथ ...और पढ़ें

नए शो के साथ लौट रही हैं अभिनेत्री अपरा मेहता/ फोटो- Instagram

नए शो के साथ लौट रही हैं अभिनेत्री अपरा मेहता/ फोटो- Instagram

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संक्षेप में पढ़ें

दीपेश पांडे, मुंबई। सिर्फ 15 साल की उम्र में टेलीविजन की दुनिया में कदम रखने वाली अभिनेत्री अपरा मेहता ने एक महल हो सपनों का और क्योंकि सास भी कभी बहू थी जैसे कई धारावाहिकों में काम किया। वह अब सन नियो पर प्रसारित होने वाले धारावाहिक प्रथाओं की ओढ़े चुनरी : बीदणी में राजश्री बुआ की भूमिका निभा रही हैं। बीते करीब चार दशकों में टीवी के बदलते दौर की साक्षी रहीं अपरा से उनके शो, सफर और टीवी की चुनौतियों पर बातचीत :

चार में से एक चुना

इस धारावाहिक का हिस्सा बनने को लेकर अपरा कहती हैं, ‘पिछले साल कुछ महीनों के लिए मैं अपने गुजराती नाटक के सिलसिले में अमेरिका गई थी। उसके बाद हंसल मेहता की एक वेब सीरीज की शूटिंग की। तब मेरे पास टीवी से बहुत ऑफर आ रहे थे। चार ऑफर मुझे अच्छे लगे। उनमें से भी तीन को शुरू होने में समय लग रहा था, तो मैंने यह धारावाहिक कर लिया। अपने पात्र के बारे में सुनने के बाद मुझे लगा कि इसमें जिस तरह से राजस्थानी बातचीत की शैली और लुक है, वैसा रोल मैंने पहले नहीं किया है।

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एक बार दिमाग में यह भी आया कि यह नए चैनल का धारावाहिक है, बाकी ऑफर स्थापित चैनलों से थे, लेकिन दिल ने कहा कि यह धारावाहिक करना चाहिए। इसके निर्माता रघुवीर शेखावत मेरे सात फेरे और बालिका वधू धारावाहिकों के लेखक रहे हैं, तो मैंने सोचा कि यह शो करना सही रहेगा।’

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मैं प्रथाओं को बिल्कुल नहीं मानती हूं

अपने जीवन में रूढ़िवादी प्रथाओं को बाधा बनने के मामले में अपरा कहती हैं, ‘कुछ प्रथाओं को मैं बिल्कुल नहीं मानती हूं। औरतें बहुत ताकतवर होती है, ऐसा कुछ नहीं है जो वह नहीं कर सकती है। बस उन्हें सामाजिक बंधनों और बुरी प्रथाओं से मुक्त कराने की जरूरत है। शो में मेरी पात्र बहुत रूढ़िवादी विचारों की है, बाद में बदलती है। मेरे हिसाब से हमारा समाज भी वैसा ही है। मेरी व्यक्तिगत जिंदगी में कभी कोई प्रथा बाधा नहीं बनी। मैं भावनगर में पैदा हुई हूं और मुंबई में पली-बढ़ी हूं। मेरा बहुत ही प्रगतिवादी परिवार था।

मैं अपने माता-पिता की इकलौती संतान थी। शादी के बाद (अभिनेता दर्शन जरीवाला से) जिस घर में आई, वो उससे भी ज्यादा प्रगतिवादी है। मेरी मां, सासू मां सभी गुजराती थिएटर के कलाकार थे। उस दौर में भी मैंने शादी के बाद अपना सरनेम नहीं बदला था, लेकिन किसी ने कभी इस बारे में मुझसे नहीं पूछा।’

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चलता रहेगा टेलीविजन

टेलीविजन जगत के बदलाव और वर्तमान दौर के टेलीविजन पर अपरा कहती हैं, ‘मैंने टीवी को पूरा बदलते हुए देखा है और मुझे इस बात का गर्व है कि मैं इतिहास का हिस्सा रही हूं। अब तो टीवी तकनीकी तौर पर बहुत आगे बढ़ गया है। मैंने देखा है कि वही धारावाहिक अच्छी तरह से चले हैं जो लोगों के बीच कुछ सही संदेश पहुंचाते हो। फिर वह क्योंकि सास भी कभी बहू थी, अनुपमा, बालिका वधू या तारक मेहता का उल्टा चश्मा कोई भी हो।

जिन धारावाहिकों ने नकल करने की कोशिश की, उन्हें लोग भूल गए। लोग टीवी की अलग-अलग माध्यमों से तुलना करते हैं, लेकिन टीवी कहीं जाने वाला नहीं है, इसकी पहुंच बहुत ज्यादा है। बहुत सारे चैनल और कार्यक्रम आ जाने से इसके दर्शक जरूर कम हुए हैं।’

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सिर्फ इस शर्त पर करती हैं फिल्में

अपरा ने टीवी में ज्यादा और फिल्मों में गिना चुना काम किया। इसका कारण वह बताती हैं, ‘मैंने वही फिल्में की हैं, जिसमें निर्देशकों ने मुझे सामने से पूछा। देवदास के लिए संजय लीला भंसाली ने मुझे फोन करके बोला कि मैं आपको बहुत छोटा सा रोल ऑफर कर रहा हूं, लेकिन आप इसके लिए सबसे फिट हैं। फराह खान के साथ मैंने तीस मार खां की। मेघना गुलजार के साथ मैंने जस्ट मैरिड फिल्म की। यह सारी फिल्में मैंने इसलिए की क्योंकि इन निर्देशकों को उनकी फिल्मों में मैं चाहिए थी।

मैं किसी दूसरे निर्देशक की फिल्म करने क्यों जाऊं, जब मुझे टीवी में इतने अच्छे रोल मिल रहे हैं। मेरे लिए टीवी ही सही है। वहां कहानियां भी महिला प्रधान होती हैं। मैंने ओटीटी पर भी कुछ शो किए हैं, लेकिन किसी के लिए भी ऑडिशन नहीं दिया है। निर्देशक ने सामने से मुझे ऑफर दिया। मैं ऐसे ही काम करूंगी, वरना मेरे पास टीवी और गुजराती थिएटर का मंच तो है ही। इस धारावाहिक के साथ-साथ मैं क्योंकि सास में कभी बहू थी 2 में भी तो दिखती रहती हूं। तुलसी को जब भी मां की जरूरत पड़ती है, मां को याद करती है तो मैं आ जाती हूं। वो मुझे बड़ा मजेदार लगता है।’

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