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    Main Vaapas Aaunga देख निकले आंसू? 'ट्रेन टू पाकिस्तान' से लेकर 'पिंजर' तक; बंटवारे का दर्द बयां करती 5 फिल्में

    Updated: Tue, 30 Jun 2026 11:59 AM (GMT+05:30)

    अगर आपको भी इम्तियाज अली की Main Vaapas Aaunga पसंद आई है तो हम आपके लिए कुछ और फिल्में बॉलीवुड के पिटारे से निकालकर लाए हैं, जो देश के बंटवारे का दर् ...और पढ़ें

    'मैं वापस आऊंगा' की तरह ये फिल्में भी कर देंगी भावुक

    'मैं वापस आऊंगा' की तरह ये फिल्में भी कर देंगी भावुक

    HighLights

    1. 'मैं वापस आऊंगा' की तरह ये फिल्में भी कर देंगी भावुक

    2. देश के बंटवारे का दर्द बयां करती हैं मूवीज

    3. ट्रेन टू पाकिस्तान से लेकर पिजर तक लिस्ट में शामिल

    एंटरटेनमेंट डेस्क, नई दिल्ली। 1947 में भारत को आजादी तो मिली लेकिन इस खुशी के साथ-साथ यह बंटवारे का दर्द भी लेकर आई। इस दर्द को उस वक्त की पीढ़ी ने सामने से देखा लेकिन बाद में इस बंटवारे के दौरान जो दोस्त, परिवार, प्रेमी अलग हुए उनके दर्द की कई कहानियों को बड़े पर्दे पर उतारा गया।

    बॉलीवुड ने दिखाई बंटवारे की ये कहानियां

    सनी देओल (Sunny Deol) की गदर से लेकर हाल ही में रिलीज हुई इम्तियाज अली की मैं वापस आऊंगा (Main Vaapas Aaunga) तक, इन दोनों ही फिल्मों को दर्शकों ने खूब प्यार दिया। देश के बंटवारे की वजह से घर तो टूटे ही साथ ही कई लोगों के दिल भी टूटे। अगर आपको भी ये कहानियां भावुक कर जाती हैं और आप इन्हें पसंद करते हैं तो हम आपके लिए हिंदी सिनेमा के समंदर से कुछ मोती ढूंढकर लाए हैं जिन्हें एक बार जरूर देखा जा सकता है।

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    ट्रेन टू पाकिस्तान (Train To Pakistan)

    'ट्रेन टू पाकिस्तान' 1998 में रिलीज हुई और यह खुशवंत सिंह के 1956 में आए इसी नाम के उपन्यास पर आधारित है, जिसकी कहानी 1947 में भारत के बंटवारे के समय की है। इस फिल्म की डायरेक्टर पामेला रूक्स हैं। इसकी कहानी 'मानो माजरा' नाम के एक शांत और अलग-थलग सीमावर्ती गांव में आगे बढ़ती है, जहां हिंदू, सिख और मुसलमान सदियों से मिल-जुलकर रहते आए हैं। लेकिन तभी वहां मारे गए शरणार्थियों की लाशों से भरी एक 'भूतिया ट्रेन' पहुंचती है, जिससे धार्मिक नफरत, दहशत और अफरा-तफरी फैल जाती है।

    train (9)

    फिल्म में निर्मल पांडे, रजित कपूर, मोहन अगाशे, स्मृति मिश्रा, मंगल ढिल्लों और दिव्या दत्ता ने काम किया है।

    हे राम (Hey Ram)

    2000 में रिलीज हुई हिस्टोरिकल क्राइम ड्रामा को कमल हासन (Kamal Haasan) ने लिखा और डायरेक्ट किया है। इसमें कमल हासन और शाह रुख ने अहम भूमिकाएं निभाई हैं।

    hey ram

    यह फिल्म आर्कियोलॉजिस्ट साकेत राम (हासन) की कहानी है, जिनकी जिंदगी 1946 के कलकत्ता दंगों के दौरान तब बिखर जाती है जब उनकी पत्नी की बेरहमी से हत्या कर दी जाती है। दुख में डूबे और चरमपंथियों के बहकावे में आकर, वह देश के बंटवारे के लिए महात्मा गांधी को जिम्मेदार मानते हैं और उनकी हत्या करने निकल पड़ते हैं।

    खबरें और भी

    गर्म हवा (Garm Hava)

    एम एस सथ्यू द्वारा निर्देशित यह फिल्म 1973 में रिलीज हुई थी जिसमें बलराज साहनी ने लीड रोल निभाया था। 1947 में भारत के विभाजन के दौर पर बनी यह फिल्म एक मुस्लिम व्यापारी और उसके परिवार की दु्र्दशा को दिखाती है। यह फिल्म दिखाती है कि किस तरह दो देशों के लोग इस असमंजस में थे कि वे यहीं रुक जाएं या पाकिस्तान चले जाएं। इस फिल्म में मुसलमानों के उस संघर्ष को दिखाया गया जिन्हें विभाजन के बाद कई समस्याओं का सामना करना पड़ा।

    garm hava

    पिंजर (Pinjar)

    अमृता प्रीतम के मशहूर पंजाबी उपन्यास 'पिंजर' पर आधारित एक बहुत सराही गई पीरियड ड्रामा फिल्म है। 1947 में भारत के बंटवारे के उथल-पुथल भरे दौर पर आधारित यह कहानी सीमा के बंटवारे से इंसानों को हुई दुखद पीड़ा और उन महिलाओं की दुर्दशा को दिखाती है जिन्हें अगवा कर लिया गया था और उनके परिवारों ने ठुकरा दिया था।

    pinjar

    इस फिल्म को चंद्रप्रकाश द्विवेदी ने लिखा और निर्देशित किया है। फिल्म में उर्मिला मातोंडकर, मनोज बाजपेयी, संजय सूरी, संदली सिन्हा और प्रियांशु चटर्जी ने अहम भूमिकाएं निभाईं हैं। इस फिल्म को बेस्ट फीचर फिल्म का नेशनल अवॉर्ड मिला था। वहीं मनोज बाजपेयी को स्पेशल जूरी अवॉर्ड मिला था।

    1947 अर्थ (1947 Earth)

    दीपा मेहता (Deepa Mehta) की निर्देशित फिल्म '1947 अर्थ' (1998) एक दिल को छू लेने वाली और ड्रामा फिल्म है, जो बाप्सी सिधवा के उपन्यास 'क्रैकिंग इंडिया' पर आधारित है। यह फिल्म 1947 में भारत के बंटवारे से इंसानों को हुई भारी तबाही और नुकसान को लेनी नाम की आठ साल की पारसी लड़की की नजर से दिखाती है; लेनी का परिवार लाहौर में बढ़ती धार्मिक हिंसा के बीच कैसे सर्वाइव करता है, यही इसकी कहानी है।

    earth

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