'कभी पुलिसवाला मत बनना...' जब Saif Ali Khan को डायरेक्टर ने दी थी ऐसी सलाह, बताया था जिम्मेदारी वाला काम
सैफ अली खान और रसिका दुग्गल ने अपनी पहली फिल्मों के अनुभव और पुलिस की वर्दी पहनने से जुड़ी यादें साझा कीं। सैफ ने बताया कि कैसे एक निर्देशक ने उन्हें ...और पढ़ें
-1778985823661_m.webp)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
स्मिता श्रीवास्तव, मुंबई। हाल ही में नेटफिलक्स पर रिलीज हुई फिल्म कर्तव्य में सैफ अली खान (Saif Ali Khan) पुलिस अधिकारी की भूमिका में नजर आ रहे हैं। वहीं उनकी पत्नी की भूमिका रसिका दुग्गल ने निभाई है (Rasika Dugal) दोनों ने स्मिता श्रीवास्तव से की
आपकी पहली फिल्म परंपरा 14 मई 1993 को रिलीज हुई थी। पहले शाट की क्या यादें हैं ?
सैफ : वो शाट मुझे अभी भी याद है। सुनील दत्त साहब शूटिंग कर रहे थे। जब मैं बच्चा था, तब मैंने कुछ शूटिंग्स देखी थीं। मैं उनसे कई सालों बाद मिला। मैंने उन्हें देखा कि वो इधर-उधर टहल रहे थे। शायद उनके बेटे (संजय दत्त) के साथ कोई समस्या हुई थी।
हम एक घोड़े का शॉट कर रहे थे। हमने जुहू में एक्शन डायरेक्टर टीनू वर्मा के साथ घुड़सवारी को लेकर प्रैक्टिस की थी। मैं घोड़े पर बैठा था। किसी ने कहा स्टार्ट साउंड। घोड़ा थोड़ा हिला जैसे ही एक्शन बोला घोड़ा को जाना दाएं था बाएं चला गया। बहुत तेजी से। वह मेरा पहला शाट था।
-1778986420050.jpg)
यह भी पढ़ें- Kartavya Review: फिसड्डी स्क्रिप्ट... डगमगाता क्लाइमैक्स; किरकिरी कहानी में किरदारों ने निभाया 'कर्तव्य'
सुनील दत्त ने ऐसे की थी मदद
हमने उसे रोकने की कोशिश की लेकिन जानवर आपसे बड़ा और ज्यादा ताकतवर होता है। अगर वह रुकना नहीं चाहता, तो उसे रोकने का कोई तरीका नहीं है। तो हम यह सब कोशिश कर रहे थे और वह जंगल की तरफ भागने लगा। मैंने सोचा, मैं कूद जाऊं? इस घोड़े को कैसे रोकूं?
खबरें और भी
वहां दत्त साहब जा रहे थे, जैसे वह आराम से घुड़सवारी कर रहे हों। मैं चिल्लाया, दत्त सर, मदद। और वह मेरे साथ-साथ घोड़ा दौड़ाते हुए आए, थोड़ा झुके, लगाम पकड़ी और बस घोड़े की रफ्तार धीमी कर दी। तो मेरे लिए, वैसे भी वह हीरो थे लेकिन उसके बाद वह मेरे लिए कुछ अविश्वसनीय बन गए। (सभी हंसते हैं)
रसिका : यह साल 2006 की बात है। मैं एफटीआआई में थी। मेरा स्नातक पूरा होने वाला था। मुंबई में मेरे दोस्त रहते थे तो मैं उनके साथ समय बिताने के लिए सप्ताहांत में आई थी। मेरी एक दोस्त थी जो मनीष झा की बनाई फिल्म अनवर में असिस्टेंट डायरेक्टर (एडी) थी।
उन दिनों कास्टिंग डायरेक्टर का दौर शुरू नहीं हुआ था तो एडी ही आडिशन लिया करते थे। मैंने पूछा कि क्या कर रही हो आज तो बोली की आडिशन लेने जा रही हूं। मैंने कहा कि मैं भी साथ आती हूं देखती हूं कि आडिशन कैसे देते हैं। फिर सोचा कि आई हूं तो आडिशन दे भी देती हूं।
-1778986470232.jpg)
फिल्म में विजय राज और सिद्धार्थ कोइराला थे जो मनीषा कोइराला के भाई थे। उसमें दो सीन का रोल था। पहला शाट था कि विजय राज कुछ कहते हैं और मैं उनकी बात से सहमत नहीं हूं तो मुझे उन्हें कुछ टोकना है। शाट ठीक से हो नहीं हो रहा था।
डायरेक्टर बार-बार शाट देने को बोल रहा। मैंने पूछा कि क्या हुआ तो डायरेक्टर ने कहा कि तुम्हारी आंखें इतनी बड़ी-बड़ी हो रही हैं इतनी आंखें मत दिखाओं थोड़ा नियंत्रण करो। (हंसते हुए) मुझे तनिक भी अहसास नहीं था कि मेरा चेहरा किस तरह से प्रतिक्रिया दे रहा है। फिर उन्होंने मुझे आईना दिखाया कि वास्तव में क्या हो रहा है। हां, वह थोड़ा परेशान करने वाला था, लेकिन हम जीते हैं और सीखते हैं।
आप दोनों ने पर्दे पर वर्दी पहनी है। पहली बार वर्दी पहनने की खास याद आपके साथ जुड़ी हुई हो?
सैफ : पहली बार जब मैंने वर्दी पहनी थी तो फिल्म थी मैं खिलाड़ी तू अनाड़ी। मैं उसमें कलाकार की भूमिका में था जो पुलिस अधिकारी की भूमिका निभाने वाला होता है तो असल पुलिस अधिकारी अक्षय कुमार से सीखने आता है। मेरे डायरेक्टर समीर मलखान ने मुझसे कहा था कि कभी पुलिसवाले का रोल मत करना। तुम यह नहीं कर सकते। यह बहुत गंभीर, जिम्मेदार और कठिन काम है। बड़े सितारे ऐसी भूमिकाएं निभाते हैं।
इसके लिए एक अलग प्रेजेंस चाहिए, और तुम रोमांटिक कामेडी करते हो। कभी पुलिसवाले का रोल मत करना। वह डर हमेशा रहा। वेब शो सेक्रेड गेम्स तक भी मैं सोचता था कि मुझे नहीं लगता कि मैं यह कर सकता हूं। मुझे लगता है कि मैं इस फिल्म इंडस्ट्री में ही बड़ा हुआ हूं। किसी ने लिखा था कि मैंने अपनी जिंदगी कैमरे पर उससे ज्यादा बिताई है जितनी कैमरे के बाहर। तो लोगों ने मुझे 20 साल की उम्र से अच्छा या बुरा 55 साल तक देखा है। तो उम्मीद है, कुछ बदलाव आए होंगे। पुलिस की भूमिका करना मेरे लिए बहुत बड़ी बात है, क्योंकि डायरेक्टर मुझ पर हंसते थे। (ठहाका मारते हैं)।
रसिका : जब आप पहली बार पुलिस की वर्दी पहनते हैं, तो जिम्मेदारी और ताकत का एक एहसास होता है। तो वह एहसास था, लेकिन मुझे लगता है कि मैंने सच में उस पुलिस अधिकारी के साथ समय बिताने का आनंद लिया, जिसे मैं डेल्ही क्राइम सीजन 1 से फालो कर रही था। तो जैसे उसकी जिंदगी बदल रही है, वैसे ही किरदार की जिंदगी भी बदल रही है। मैं हर सीजन से पहले लगभग 6-7 दिन पुलिस स्टेशन में बिताया है।
-1778986493972.jpg)
अगर आप किसी भी पुलिस स्टेशन में बैठें, तो वह एक बहुत अजीब अनुभव होता है। एक ओर मजेदार भी होता है और दूसरी ओर दिल तोड़ने वाला भी। लोग इतनी बेबसी लेकर आते हैं। कभी दो पड़ोसियों की लड़ाई हो गई, तो किसी ने इधर-उधर कूड़ा फेंक दिया और वे बात पुलिस स्टेशन तक ले आते हैं। या किसी ने किसी का कत्ल कर दिया। मेरा मतलब, इतनी सारी चीजें चल रही होती हैं। तो वह अनुभव मेरे लिए बहुत खूबसूरत रहा है।
सैफ: करीब बीस साल पहले आई ओमकारा को लेकर आपने कहा था कि उस फिल्म के बाद लोगों ने आपको एक गंभीर अभिनेता के तौर पर देखना शुरू किया?
पता नहीं, लेकिन लोगों ने वो उम्मीद नहीं की थी। तो मेरे लिए बहुत लकी था कि एक चांस मिला और विशाल जी (फिल्म निर्देशक विशाल भारद्वाज) ने मेरी इतनी मदद की कि मैं वो रोल कर पाया। उसकी वजह से मुझे आज तक कुछ अच्छे आफर्स आते हैं। जैसे कर्तव्य के निर्देशक पुलकित ने कहा आपने ओमकारा किया तो आप ये कर सकते हो। तो वो जो एक थोड़ा रेंज और दूसरे निर्देशकों को यकीन हो जाता हैं कि शायद ये कर पाएगा तो वो बहुत अच्छी बात होती है।
-क्या लोकप्रियता कभी कलाकार की आब्जर्वेशन पावर को कम कर देती है?
सैफ: मुझे ऐसा नहीं लगता। अगर आप लोगों को आब्जर्व करना चाहते हैं, तो उसके बहुत मौके मिलते हैं। ऐसा नहीं है कि मैं इतना मशहूर हूं कि लोगों को देख ही नहीं सकता। आपको किसी को भी, कहीं भी देखने का मौका मिल जाता है। कभी-कभी लोग आपको पहचान लेते हैं, तो आप उन जगहों पर उतना नहीं जा पाते जितना आप चाहें। मुझे इसमें कोई परेशानी नहीं लगती। मैं बहुत खुश और आभारी हूं, लेकिन मुझे लगता है कि इसका प्रसिद्धि से कोई कोई लेना देना नहीं है। आप मशहूर लोगों को भी आब्जर्व कर सकते हैं।
रसिका: प्रसिद्धि का तो मुझे नहीं पता, लेकिन जैसे आप जिंदगी में बढ़ते जाते हो तो आपके एक्सपीरियंसेस हो सकते हैं, हो सकता है कि आपके एक्सपीरियंसेस एक जैसे होने लगें तो उस चीज को थोड़ा बदलने की कोशिश या उसके प्रति जागरूकता रखने की मेरी कोशिश रहती है। जैसे सैफ ने कहा कि आपको कहीं अलग जाके कुछ आब्जर्व करने की जरूरत नहीं है।