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उंगलियों से टेबल पर दी ताल, 2 मिनट में तैयार की धुन; नुसरत फतेह अली खान की ये कव्वाली 30 साल से है सुपरहिट

Published: Tue, 13 Oct 2026 02:32 PM (IST)

'शहंशाह ए कव्वाली' नुसरत फतेह अली खान ने 30 साल पहले वो कव्वाली गाई जो 10 मिनट लंबी थी, लेकिन उसकी धुन 2 मिनट में बनकर तैयार हो गई थी।

30 साल से खूब सुनी जाती है नुसरत फतेह अली खान की ये कव्वाली/फोटो-इंस्टाग्राम

30 साल से खूब सुनी जाती है नुसरत फतेह अली खान की ये कव्वाली/फोटो-इंस्टाग्राम

HighLights

  1. नुसरत फतेह अली खान ने टेबल पर थपथपाकर तैयार की धुन

  2. 30 साल से लोग खूब पसंद करते हैं उनकी ये कव्वाली

  3. 10 मिनट की कव्वाली की धुन 2 मिनट में हुई थी तैयार

एंटरटेनमेंट डेस्क,नई दिल्ली। नुसरत फतेह अली खान (Nusrat Fateh Ali Khan Songs) की आवाज का कोई मुकाबला नहीं है। उन्हें सूफियाना संगीत और कव्वाली की वजह से 'शांहशाह ए कव्वाल' भी कहा जाता था। जब वह गीत गाते तो उनकी आवाज सीधा रूह को छूती।

वैसे तो नुसरत फतेह अली खान ने 'तुम्हें दिल्लगी भूल जानी पड़ेगी- दम मस्त कलंदर और नित खैर मंगदा में सोणेया मैं तेरी जैसे कई हिट गाने ऑडियंस को दिए हैं, लेकिन 30 साल पहले उन्होंने एक ऐसी कव्वाली गाई थी, जो श्रोताओं के दिलों-दिमाग पर इस कदर छाई है कि लोग रिवाइंड करके उसे सुनते हैं।

10 मिनट की कव्वाली की 2 मिनट में तैयार की थी धुन

संगीत की दुनिया के दिग्गज गायक नुसरत फतेह अली खान की जिस कव्वाली का जिक्र हम अपने इस लेख में कर रहे हैं, वह साल 1996 में रिलीज हुई 'आफरीन आफरीन' (Afreen Afreen Song) है। जिसे रिक्रिएट तो बहुत से सिंगर्स ने किया, लेकिन कव्वाली में जो जादू नुसरत फतेह अली खान की आवाज लेकर आई, वह किसी और की गायिकी में नहीं महसूस हुआ।

नुसरत फतेह अली की आवाज में गाई कव्वाली'आफ्रीन आफ्रीन' 10 मिनट की है, लेकिन आपको ये जानकर हैरानी होगी कि इस सुपरहिट कव्वाली की धुन को बनाने में संगीतकार को सिर्फ 2 मिनट लगे थे और वो भी बिना किसी म्यूजिकल इंस्ट्रूमेंट का इस्तेमाल किए।

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जावेद अख्तर ने लिखे थे कव्वाली के लिरिक्स

नुसरत फतेह अली खान की आवाज में गाई आफ्रीन-आफ्रीन कव्वाली को लिरिसिस्ट जावेद अख्तर ने लिखा था। जब जावेद अख्तर सोनी टीवी के कार्यक्रम इंडियन आइडल (Indian Idol) में आए थे तो उन्होंने यह बताया था कि इस गीत के सिलसिले में उनकी, पाकिस्तानी सिंगर नुसरत फतेह अली खान से मुलाकात एक होटल में हुई थी। वहीं पर दोनों दिग्गज 1996 में रिलीज हुई संगम एल्बम की इस कव्वाली पर काम करने बैठे थे।

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जावेद अख्तर ने बताया था कि जैसे ही उन्होंने नुसरत फतेह अली खान साहब को कव्वाली की पहली लाइन 'स्न-ए-जाना की तारीफ मुमकिन नहीं' सुनाई, तो बिना समय गवाएं, बिना किसी म्यूजिक इंस्ट्रूमेंट पर उंगलियों की थाप से शहंशाह-ए-कव्वाली गायक ने धुन बनाना शुरू कर दिया। महज 2 मिनट के अंदर ही आफ्रीन गाने की शानदार धुन बनकर तैयार हो गई थी।

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