'जब मुस्लिम राष्ट्रपति...' AR Rahman ने 'छावा' को बताया था प्रोपेगेंडा, अब मनोज मुंतशिर ने खड़े किए सवाल
Manoj Muntashir ने इंडस्ट्री में भेदभाव के बारे में ए.आर. रहमान (A.R Rahman) के दावे को चुनौती दी और कहा कि खराब रिश्तों जैसी वजहों से काम के मौकों पर ...और पढ़ें
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मनोज मुंतशिर ने ए. आर. रहमान के बयान पर दिया रिएक्शन
HighLights
मनोज मुंतशिर ने ए. आर. रहमान के बयान पर दिया रिएक्शन
म्यूजिशियन ने छावा को लेकर दिया था बयान
फिर से ए. आर. रहमान का बयान का आया चर्चा में
एंटरटेनमेंट डेस्क, नई दिल्ली। गीतकार मनोज मुंतशिर ने हाल ही में एआर रहमान के उस पुराने बयान पर प्रतिक्रिया दी है, जिसमें उन्होंने अपनी धार्मिक पहचान की वजह से काम न मिलने का इशारा किया था। लेखक ने रहमान के दावे को चुनौती दी और यह भी कहा कि हो सकता है कि म्यूजिक डायरेक्टर को काम इसलिए न मिल रहा हो क्योंकि उन्होंने इंडस्ट्री के लोगों के साथ अच्छे संबंध नहीं बनाए रखे।
क्या बोले मनोज मुंतशिर
एक इंटरव्यू में हाल ही में मनोज मुंतशिर (Manoj Muntashir) ने रहमान के दावे पर सवाल उठाया और कहा कि देश ने कई ऐसे दिग्गज देखे हैं जो मुस्लिम थे। उन्होंने यह भी कहा कि रहमान खुद एक दिग्गज हैं और देश में अपने काम की वजह से ही वे इस मुकाम पर पहुंचे हैं।
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मनोज ने दिए ये उदाहरण
उन्होंने कहा, 'जब मोहम्मद अजहरुद्दीन भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान बने, जब कोई मुस्लिम भारत का राष्ट्रपति बना, जब एआर रहमान जैसे दिग्गज... जिनकी धार्मिक पहचान के बावजूद... इस देश में उनसे बड़ा कोई नाम नहीं है। उन्होंने यह सवाल क्यों नहीं पूछा कि 'मैं ही क्यों?' या 'एक मुस्लिम ही क्यों?'
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आज अगर किसी वजह से आपको लगता है कि आपको कम काम मिल रहा है, तो हमें दूसरे कारणों पर भी गौर करना चाहिए। हो सकता है कि हमने लोगों के साथ अच्छे संबंध न बनाए हों। हो सकता है कि पिछले कुछ सालों में गाने उतने सफल न रहे हों। और भी कई कारण हो सकते हैं। मुझे समझ नहीं आता कि अचानक देश के सामाजिक ताने-बाने को नुकसान पहुंचाने की क्या वजह है। लेकिन जब भी मैं उनसे मिलूंगा, तो उनसे यह बात जरूर पूछूंगा। उन्हें खुली बातचीत से कोई परहेज नहीं है'।
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'छावा' को प्रोपेगैंडा कहे जाने पर मनोज की प्रतिक्रिया
मनोज ने उस बात पर भी प्रतिक्रिया दी जिसमें रहमान ने विक्की कौशल की फिल्म 'छावा' का संगीत देने के बावजूद उसे प्रोपेगैंडा फिल्म कहा। लेखक का मानना है कि अगर रहमान को लगता था कि यह एक प्रोपेगैंडा फिल्म है, तो उन्हें शुरू में ही इस फिल्म को करने के लिए सहमत नहीं होना चाहिए था।
उन्होंने कहा, 'उन्हें उस फिल्म का हिस्सा नहीं बनना चाहिए था। ऐसा तो नहीं है कि काम करने के लिए सहमत होने से पहले आपने स्क्रिप्ट नहीं सुनी थी। क्या आपने अचानक ही उसके लिए संगीत बनाना शुरू कर दिया? उन्होंने निश्चित रूप से स्क्रिप्ट पढ़ी होगी। ठीक है, अगर यह एक प्रोपेगेंडा फिल्म थी और आप इसे नहीं करना चाहते थे। तो फिल्म करने के बाद उसे प्रोपेगेंडा कहना, यह बात मुझे समझ नहीं आती, माफ कीजिए'।
रहमान ने क्या कहा था?
इससे पहले BBC के साथ बातचीत में रहमान से पूछा गया था कि क्या 'हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में भेदभाव' है और क्या उन्हें कभी किसी तरह के भेदभाव का सामना करना पड़ा है। इस पर उन्होंने कहा था, 'हो सकता है कि मुझे कभी इसके बारे में पता ही न चला हो, हो सकता है कि इसे छिपाया गया हो, लेकिन मुझे ऐसा कुछ महसूस नहीं हुआ। हो सकता है कि पिछले आठ सालों में पावर में बदलाव आया हो और अब ऐसे लोगों के हाथ में पावर है जो क्रिएटिव नहीं हैं।
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हो सकता है कि यह कोई सांप्रदायिक मामला भी हो... लेकिन यह मेरे सामने कभी नहीं आया। मुझे बस सुनी-सुनाई बातें पता चलती हैं कि उन्होंने मुझे बुक तो किया था, लेकिन बाद में म्यूजिक कंपनी ने अपने ही 5 कंपोजर रख लिए।
ये बातें 'छावा' फिल्म को लेकर हो रही नई चर्चाओं के बीच सामने आई हैं; इस फिल्म के म्यूजिक पर रहमान ने काम किया था, फिर भी मनोज ने फिल्म के बारे में उनकी आलोचना से अलग राय रखी है।