सिगरेट के पैकेट पर लिखा गया था Lata Mangeshkar का देशभक्ति गीत, 63 साल बाद भी आंखें नम कर देता है गाना
63 साल पहले लता मंगेशकर ने एक ऐसा देशभक्ति गीत गाया था जिसे सुनकर पूरा देश रो पड़ा था और आज भी ये गाना आंखें नम कर देता है।

आंखों में आंसू ला देता है लता दीदी का ये गीत
HighLights
आंखों में आंसू ला देता है लता दीदी का ये गीत
भारत के प्रधानमंत्री भी रो पड़े थे इसे सुनकर
लता मंगेशकर ने दी थी देशभक्ति गीत को आवाज
एंटरटेनमेंट डेस्क, नई दिल्ली। इस बार भारत 80वां स्वतंत्रता दिवस मना रहा है और हमें ये आजादी कई स्वतंत्रता सेनानियों की जान की कुर्बानी देने के बाद मिली है। हालांकि स्वतंत्रता के बाद भी बॉर्डर पर जवान हमारे देश की रक्षा अपनी जान पर खेलकर करते हैं और इन्हीं जवानों की कुर्बानी पर लता मंगेशकर ने एक ऐसा देशभक्ति गीत गाया था जिसे सुनकर उस वक्त के तत्कालीन प्रधानमंत्री की आंखों में भी आंसू आ गए थे।
इस गीत की सबसे खास बात ये है कि इसके बोल सबसे पहले एक सिगरेट के पैकेट पर लिखे गए थे और बाद में यह इतना मशहूर हो गया कि हर किसी की जुबान पर चढ़ गया।
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1962 की जंग में शहीद हुए जवानों को समर्पित गीत
यह गीत 1962 में चीनी आक्रमण में शहीद हुए भारत के नौवजानों को समर्पित है। वहीं यह गीत तब लोकप्रिय हुआ जब लता मंगेशकर ने इसे नई दिल्ली में गणतंत्र दिवस के अवसर पर रामलीला मैदान में गाया। उस वक्त वहींभारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री पं जवाहरलाल नेहरू भी मौजूद थे। कहा जाता है कि लता मंगेशकर (Lata Mangeshkar) की आवाज में यह देशभक्ति गीत सुनकर वे उनकी आंखों में आंसू आ गए थे।
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सिगरेट के पैकेट पर लिखा गया था
इस गीत को कवि प्रदीप ने लिखा और सी रामचंद्र ने संगीत दिया था। ऐसा कहा जाता है कि कवि प्रदीप ने इस गीत के शुरुआती लिरिक्स एक सिगरेट के फॉयल पर लिखे थे।

लता मंगेशकर की आवाज में अमर हुआ गाना
लता मंगेशकर की आवाज में इस भावुक देशभक्ति गीत के लिरिक्स हैं, 'ऐ मेरे वतन के लोगों, तुम खूब लगा लो नारा, ये शुभ दिन हम सबका, लहरालो तिरंगा प्यारा….' (Aye Mere Watan Ke Logon)। शुरुआत में लता दीदी ने इसे गाने से इनकार कर दिया था क्योंकि रिहर्सल का वक्त बहुत कम था लेकिन बाद में यह उनके करियर के सबसे यादगार गीतों में से एक बन गया।
ऐ मेरे वतन के लोगों...ये गीत आज भी गणतंत्र दिवस और स्वतंत्रता दिवस पर भारत के हर स्कूल, ऑफिस, संस्थान और गली मोहल्लों में जरूर सुनाई देता है। ये याद दिलाता है उन वीर-जवानों की जिन्होंने देश के खातिर अपने प्राण न्यौछावर कर दिए और आजादी के बाद भी देश की रक्षा के लिए दुश्मनों के सामने सीना ताने खड़े रहे।

