'OTT पर भी बड़े सितारों का दबदबा...', सिनेमा के बदलते दौर पर Khosla Ka Ghosla 2 एक्टर रणवीर शौरी का बयान
रणवीर शौरी (Ranvir Shorey) ने फिल्म इंडस्ट्री में आए बदलावों पर बात की। उनका कहना है कि फिल्मों का हिट-फ्लॉप ...और पढ़ें

रणवीर शौरी ने सिनेमा के बदलते दौर पर की बात। फोटो क्रेडिट- इंस्टाग्राम

समय कम है?
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स्मिता श्रीवास्तव, मुंबई। पिछले कुछ सालों में फिल्म इंडस्ट्री में कई बड़े बदलाव देखने को मिले हैं। कंटेंट से लेकर रिलीज और प्रमोशन के तरीकों, दर्शकों की पसंद और माध्यमों की प्रकृति दोनों में परिवर्तन आया है। अभिनेता रणवीर शौरी कहते हैं कि फिल्मों का हिट या फ्लाप होना कोई नई बात नहीं है।
बदल गया है सिनेमा का स्वरूप
इन दिनों फिल्म खोसला का घोसला 2 (Khosla Ka Ghosla 2) की शूटिंग कर रहे रणवीर फिल्मों में आए बदलाव को लेकर कहते हैं कि शुरुआत से ही यही होता आया है कि फिल्में या तो चलती हैं या नहीं चलतीं। इस मूल संरचना में कोई बदलाव नहीं हुआ है। हालांकि, पिछले पांच साल में एक बड़ा बदलाव तब देखने को मिला जब स्ट्रीमिंग प्लेटफार्म्स की शुरुआत हुई।
ऐसा लगा था कि यह इंडिपेंडेंट और छोटी फिल्मों के लिए एक बड़ा अवसर साबित होगा। उम्मीद जगी थी कि छोटे बजट की फिल्मों को रिलीज और डिस्ट्रीब्यूशन का एक नया और सशक्त माध्यम मिल गया, जिससे वे सीधे दर्शकों तक पहुंच सकेंगे। दुर्भाग्यवश, समय के साथ यह उम्मीद कमजोर पड़ती चली गई।
बड़े सितारों का भी ओटीटी पर दबदबा
रणवीर शौरी कहते हैं कि जैसे पहले बड़े सितारों और बड़ी फिल्मों का दबदबा सिनेमाघरों पर था, वैसा ही दबदबा अब इन प्लेटफार्म्स पर भी देखने को मिल रहा है। बड़े नाम, बड़े प्रोडक्शन हाउस और स्थापित सितारे यहां भी प्राथमिकता में आ गए हैं। अगर मुझे मौका मिले तो मैं सिनेमाघरों और स्ट्रीमिंग प्लेटफार्म्स दोनों में ऐसा सिस्टम बनाना चाहूंगा, जहां छोटी फिल्मों को सीधे डिस्ट्रीब्यूशन मिल सके। ऐसी फिल्में जो मध्यम स्तर या छोटे निर्माताओं या नए कलाकारों द्वारा बनाई जाती हैं, उन्हें दर्शकों तक पहुंचने का सीधा मौका मिले।
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फ्रेंचाइजी बिजनेस के लिए है फायदेमंद
फ्रेंचाइज फिल्मों के बढ़ते चलन पर भी रणवीर ने अपनी राय रखी। वह कहते हैं कि इनका हिस्सा होना कलाकार के लिए आसान नहीं होता, लेकिन एक फायदा जरूर होता है। फ्रेंचाइज का हिस्सा बनने से आप उस पात्र को आगे बढ़ाते हैं, जिसे आपने गढ़ने में योगदान दिया होता है। फिर वह चाहे किसी सीरीज में हो या उसके सीक्वल में। जहां तक फ्रेंचाइज की बात है, यह मूल रूप से बिजनेस के हित में लिया गया फैसला होता है, क्योंकि फिल्म निर्माण महंगी कला है।
