JFF 2026: 'दम मारो दम' से 'कजरा मोहब्बत वाला' तक: जागरण फिल्म फेस्टिवल में गूंजे Asha Bhosle के सदाबहार नगमें
Jagran Film Festival 2026: जेएफएफ में दिवंगत अभिनेता सतीश शाह और असरानी को श्रद्धांजलि दी गई। साथ ही आशा भोसले की यादों को ताजा किया गया।

आशा भोसले और धर्मेंद्र को मिली श्रद्धांजलि।
HighLights
आशा भोसले और धर्मेंद्र को गीतों से श्रद्धांजलि
अमृता कोलटकर ने आशा भोसले के गाने गाए
नए गायकों को संगीत शिक्षा पर सलाह दी गई
निभा रजक, नई दिल्ली। 'दीवाना हुआ बादल', 'दम मारो दम' और 'ये मेरा दिल यार का दीवाना' जैसे गीत बजे तो युवाओं का थिरकना लाजिमी था। यह फिल्म फेस्टिवल (Jagran Film Festival) के दूसरे दिन का नजारा था।
प्रख्यात गायिका आशा भोसले (Asha Bhosle) को उन्होंने इसी तरह से याद किया। इसी दौरान 'पल पल दिल के पास', 'कोई हसीना जब रूठ जाती है' और 'आज मौसम बड़ा बेईमान है' जैसे गीतों को गाकर महफिल ए मंडी नामक बैंड के गायकों ने हिंदी सिनेमा के ही-मैन धर्मेंद्र (Dharmendra) को भी याद किया जिनका पिछले साल निधन हो गया था।
फिल्म फेस्टिवल में गाए आइकॉनिक गाने
वहीं, दिवंगत अभिनेता सतीश शाह (Satish Shah) और असरानी (Asrani) को भी श्रद्धांजलि दी गई। आशा भोसले की यादों को लेकर आयोजित सत्र के दौरान गायिका अमृता कोलटकर ने 'बहार बनके आऊं कभी तुम्हारी दुनिया में' और 'कजरा मोहब्बत वाला अंखियों में ऐसा डाला...' जैसे प्रसिद्ध और सदाबहार गीत गाए। इस दौरान दर्शकों ने भी उनके साथ माहौल को पूरा संगीतमय बना दिया।
आशा भोसले की याद हुई ताजा
अमृता ने कहा कि आशा भोसले लीजेंड थी और सीन को जहन में रखकर गाती थीं। कंपोजकर के दिमाग को रीड करके गीत प्रस्तुत करने की उनमें क्षमता थी। आशा ताई के गाने बचपन से सुनते आ रहे हैं। उनकी खासियत थी कि निजी जीवन में कुछ भी हो रहा है, लेकिन उसका पेशेवर जिंदगी पर असर नहीं होने देती थी।
उनके पास एक पावर थी कि गाना गाते हुए कठिन परिस्थितियों को भी अवसर में बदल देती थीं। यह सबसे अधिक प्रभावित करता है एक महिला और एक सिंगर की तरह।

नए गायकों को दी गई सलाह
नए गायकों को सलाह देते हुए उन्होंने कहा कि संगीत की बुनियादी शिक्षा जरूरी है यानी कि गाना आना बहुत जरूरी है। साथ ही गीत को पढ़ना और उसे समझना अहम है। अगर कला है तो मेहनत करिए, लेकिन स्वयं को आर्थिक रूप मजबूत भी बनाइए। कार्यक्रम के समापन पर अमृता कोलटकर ने मशहूर शायर नासिर काजमी की लिखी गजल नीयत-ए-शौक भर न जाए कही को गाया। बता दें कि इस गजल को आशा भोसले ने अपनी आवाज दी थी।
आशा के जीवन से जुड़े तथ्य-
- आशा भोसले ने करियर की शुरूआत 1943 में पहली मराठी फिल्म के लिए गीत गाकर शुरूआत की थी। करीब 80 वर्षों तक अलग-अलग भाषाओं में गीत और गजल गाने के बाद अंतिम गाना उनका 2026 में रिकार्ड किया गया था।
- गिनीज वर्ल्ड रिकार्ड्स के मुताबिक उन्होंने 20 से अधिक भारतीय भाषाओं में सोलो, युगल और कोरस के साथ 11,000 से ज्यादा गीत रिकार्ड किए।
- उन्हें दो बार सर्वश्रेष्ठ महिला पार्श्व गायिका का राष्ट्रीय पुरस्कार भी मिला।
- उन्हें 2000 में दादासाहेब फाल्के पुरस्कार और 2008 में पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया।
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