गाने ने जोड़े थे दिल के तार, Guru Dutt के लिए परिवार से लड़ गईं थी गीता; फिर क्यों हुआ दर्द भरा अंत?
गुरुदत्त की जिंदगी काफी ट्रेजेडी भरी रही है। 3 साल के बाद उन्होंने सिंगर गीता रॉय के परिवार के खिलाफ जाकर उनसे शादी की, लेकिन फिर भी उनकी कहानी का अंत ...और पढ़ें
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गुरुदत्त और गीता रॉय की लव स्टोरी/ फोटो- Instagram

समय कम है?
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एंटरटेनमेंट डेस्क, नई दिल्ली। दिग्गज डायरेक्टर गुरुदत्त ने हिंदी सिनेमा को एक से बढ़कर एक यादगार फिल्में दी हैं। 'प्यासा' हो या 'साहिब बीबी और गुलाम' उनकी फिल्मों में एक अलग करिश्मा था। उन्होंने अपनी मूवीज में न सिर्फ एक कहानी पिरोई, बल्कि पर्दे पर एक कविता कह दी। वह अक्सर फिल्मों में अक्सर आदमी अकेलेपन और उसके अंदर के दर्द को बड़ी ही खूबसूरती से कह जाते थे।
जिस तरह से 'कल्ट' फिल्म 'प्यासा' में उन्होंने एक कवि के दर्द को बयां किया, कुछ ऐसा ही हाल उनका असल जिंदगी में भी था। जहां उन्होंने गीता दत्त को पाने के लिए काफी संघर्ष किया। 26 साल के गुरुदत्त को कैसे मिलीं उनकी 'गीता', पढ़ें दिलचस्प किस्सा:
गाने की रिकॉर्डिंग पर गीता दत्त को दे बैठे थे दिल
पीपली लाइव के को डायरेक्टर 'महमूद फारूकी' की 'दास्तान-ए-गुरुदत्त' हाल ही में राजकमल प्रकाश में रिलीज हुई है, जहां उन्होंने निर्देशक की फिल्मों के बारे में तो लिखा ही, लेकिन साथ ही उनकी और गीता की प्रेम कहानी को भी चाहने वालों तक पहुंचाने की एक कोशिश की। उनकी शादी-शुदा जिंदगी, उसमें उतार चढ़ाव के बारे में लेखक ने बताया।
गुरुदत्त और गीता की पहली मुलाकात फिल्म 'बाजी' क मुहूर्त शॉट के दौरान हुई थी, जो साल 1951 में रिलीज हुई। जब गुरुदत्त ने बाजी बनाई थी तो उस वक्त उनकी उम्र महज 26 साल की थी। यही वह फिल्म थी, जिसके लोकप्रिय गाने 'तदबीर से बिगड़ी हुई तकदीर बना ले' को गीता रॉय ने गाया था। यह गाना जहां उस दौर में फैंस के दिल में उतर गया, तो वहीं गीता दत्त, गुरुदत्त के दिल में रिकॉर्डिंग के दौरान ही बस चुकी थीं। यहीं से वह सिंगर के प्यार में गिरफ्त हो गए थे।
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देवानंद की पार्टी में गीता को घूरते रहे
गुरुदत्त को किस्मत ने दूसरी बार फिर गीता से मिलवाया। बाजी के मुहूर्त के बाद देवानंद के घर पर एक पार्टी का आयोजन किया गया, जिसमें गुरुदत्त और गीता दोनों ही मौजूद थे। इस दौरान गुरुदत्त कुछ बोले तो नहीं, बस दूर बैठे एकटक सिंगर को घूरते रहें। बाद में धीरे-धीरे उनकी बातें शुरू हुईं और गीता उनके घर आने जाने लगीं। उनकी सादगी और सरल स्वभाव ने गुरुदत्त के साथ-साथ उनकी मां 'वसंती पादुकोण' और सभी का दिल जीत लिया। एक बंगाली गाना गुरुदत्त को इतना पसंद था कि वह अक्सर उनसे वही गाना गवाया भी करते थे।
हालांकि, एक तरफ जहां गुरुदत्त का पूरा परिवार गीता रॉय को बहू बनाने के लिए तैयार था, तो वहीं सिंगर की फैमिली इस रिश्ते के लिए मा ही नहीं रही थी। वहीं गीता भी अपने काम में मशगूल ट्रेवल कर रही थी। गीता रॉय जहां बड़ी कार से चलती थीं, तो वहीं गुरुदत्त बस में। गीता के परिवार का गुरुदत्त को उनके दामाद के रूप में न स्वीकारने की एक वजह उनके स्टेटस का अलग होना भी था। गुरुदत्त अक्सर गीता को घूमने के बाद उनके घर छोड़ने जाया करते थे।

शांत स्वभाव की गीता को हुआ गुरुदत्त से प्यार
दोनों का स्वभाव एक दूसरे से बिल्कुल अलग था, जहां गीता अपने परिवार की अकेले देख रेख करती थीं और बेहद प्यार से बोलने वाली थीं, तो वहीं दूसरी तरफ गुरुदत्त थोड़े गुस्सैल स्वभाव के थे। गीता के दिल में भी गुरुदत्त के लिए प्यार तो जागा, लेकिन उन्होंने कभी उसे एक्सप्रेस नहीं किया। गुरुदत्त 3 साल तक उनकी हां का इंतजार करते रहे और इस दौरान उन्होंने मशहूर सिंगर को कई खत लिखकर अपने दिल की बात खुलकर बोली और उनके शादी के लिए राजी न होने पर झुंझलाहट भी दिखाई।
14 फरवरी को जब गुरुदत्त फिल्म 'जाल' की शूटिंग कर रहे थे, उस दौरान वह गीता के बारे में सोच-सोचकर काफी परेशान हो रहे थे। उन्होंने दिग्गज सिंगर को एक और खत लिखा और अपने दिल का हाल बयां किया। 1952 में उन्होंने एक गीता को एक खत लिखा और हाल बयां करते हुए बताया कि उनका इंसानों पर से विश्वास उठ रहा है और वह सिंगर को बेहद मिस कर रहे हैं। हालांकि, 24 मार्च को लिखे एक खत में उन्होंने अपना डर बताते हुए गीता को पाने की उम्मीद छोड़ दी थी और लिखा था 'कभी-कभी आप जो चाहते हो वह आपको नहीं मिलता'। गीता रॉय तक उनके सभी खत कोई और नहीं, बल्कि गुरुदत्त की बहन ललिता लाजमी पहुंचती थीं।
3 साल के अफेयर के बाद गुरुदत्त से की शादी
गीता रॉय, गुरुदत्त के दिल की बैचेनी को बखूबी समझती थीं और उनके प्यार भरे खत पढ़ने के बाद तो सिंगर ने उनसे शादी का मन बना लिया था। हालांकि, दोनों की आर्थिक स्थिति में जमीन आसमान का फर्क था, लेकिन फिर भी गीता ने जैसे-तैसे अपने परिवार को गुरुदत्त से शादी करने के लिए मना ही लिया और 3 साल के अफेयर के बाद दोनों ने शादी कर ली।
दोनों की शादी में सबकुछ हंसी-खुशी चल रहा था, गीता ने भी शादी के बाद गाने कम कर दिए। हालांकि, जब गुरुदत्त की फिल्मों में वहीदा रहमान आईं, तो उनके साथ निर्देशक की अफेयर की खबरों ने गीता दत्त को परेशान कर दिया, जिसकी वजह से दोनों के बीच अनबन होने लगी। 10 अक्टूबर 1964 में डिप्रेशन की वजह से गुरुदत्त ने आत्महत्या जैसा कदम उठा लिया। पति को खोने के दर्द से गीता उबर नहीं पाई और अधिक मदिरा सेवन की वजह से साल 1972 में 41 साल की उम्र में उनका निधन हो गया।