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    Ghatsila Upchunav result : घाटशिला में NOTA का तूफान: कई उम्मीदवारों को दी मात

    Updated: Fri, 14 Nov 2025 02:03 PM (IST)

    झारखंड के घाटशिला विधानसभा उपचुनाव में NOTA ने अप्रत्याशित रूप से कई उम्मीदवारों को पीछे छोड़ दिया। झामुमो के सोमेश चंद्र सोरेन ने जीत हासिल की, लेकिन ...और पढ़ें

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    HighLights

    1. NOTA ने कई उम्मीदवारों को हराया

    2. झामुमो के सोरेन ने जीत दर्ज की

    3. वोटरों का असंतोष स्पष्ट रूप से दिखा

    डिजिटल डेस्क, जमशेदपुर। झारखंड की घाटशिला विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव के परिणामों ने चुनावी राजनीति में नया मोड़ ला दिया है। चुनावी रुझानों के मुताबिक, इस सीट पर कुल 14 उम्मीदवार मैदान में थे, जिनमें प्रमुख दलों के प्रतिनिधि और कई निर्दलीय उम्मीदवार शामिल थे। 

    हालांकि इस बार की सबसे बड़ी और चौंकाने वाली खबर यह रही कि NOTA (None of the Above) ने दस उम्मीदवारों को पछाड़ते हुए खुद को मतों की संख्या के मामले में प्रमुख स्थिति में ला दिया।

    मतगणना के अनुसार, झामुमो के सोमेश चंद्र सोरेन ने 46,150 वोट हासिल किए, जबकि भाजपा के बाबूलाल सोरेन को 30,458 वोट मिले। इसके अलावा अन्य उम्मीदवारों में जेएलकेएम के रामदास मुर्मू को 7,172 वोट, भारत आदिवासी पार्टी (BAP) के पंचानन सोरेन को 446 वोट मिले। 

    पीपुल्स पार्टी ऑफ इंडिया (डेमोक्रेटिक) की पार्वती हांसदा को 174 वोट, और निर्दलीय उम्मीदवारों को 65 से 705 वोटों के बीच मत प्राप्त हुए। लेकिन इस पूरे चुनावी मैदान में सबसे चौंकाने वाला परिणाम NOTA के पक्ष में आया। 

    इस बार NOTA ने 1,326 वोट हासिल किए, जो कि दस उम्मीदवारों की तुलना में ज्यादा थे। यह तथ्य दर्शाता है कि मतदाताओं ने पारंपरिक उम्मीदवारों और दलों के विकल्पों से असंतोष जाहिर किया और मताधिकार का इस्तेमाल अलग तरह से किया।

    विशेषज्ञों के अनुसार, घाटशिला उपचुनाव में NOTA की इतनी बड़ी संख्या में बढ़त यह संकेत देती है कि मतदाता न केवल राजनीतिक दलों की नीतियों पर सवाल उठा रहे हैं, बल्कि अपने असंतोष को स्पष्ट रूप से व्यक्त कर रहे हैं। 

    NOTA की बढ़त ने चुनावी रणनीतियों पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। यह साबित किया कि लोकतंत्र में मतदाता की आवाज शक्तिशाली हो सकती है।  

    चुनावी विश्लेषकों का कहना है कि NOTA की यह बढ़त भविष्य में राजनीतिक दलों के लिए चेतावनी के रूप में काम करेगी। वे अब न केवल अपने प्रतिद्वंद्वियों के खिलाफ, बल्कि मतदाता की उम्मीदों और नाराजगी को भी ध्यान में रखते हुए रणनीति बनाएंगे।

    घाटशिला के इस उपचुनाव ने साबित कर दिया है कि लोकतंत्र में केवल उम्मीदवार या पार्टी नहीं, बल्कि मतदाता की प्रतिक्रिया भी निर्णायक भूमिका निभाती है। इस चुनाव ने राजनीति में एक नया अध्याय जोड़ते हुए यह दिखाया कि जनता अपनी असंतोषजनक स्थिति को केवल वोट के जरिए स्पष्ट कर सकती है।