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    डीयू के 12 कॉलेजों में शिक्षकों का गंभीर संकट, दो-तिहाई पद खाली; तत्काल भर्ती की मांग

    Updated: Wed, 21 Jan 2026 09:07 PM (IST)

    दिल्ली विश्वविद्यालय के 12 दिल्ली सरकार वित्त पोषित कॉलेजों में स्थायी शिक्षकों के दो-तिहाई पद (1508 में से 980) खाली हैं। इससे शैक्षणिक व्यवस्था प्रभ ...और पढ़ें

    दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) की फाइल फोटो। सौजन्य- जागरण

    दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) की फाइल फोटो। सौजन्य- जागरण

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    लोकेश शर्मा, नई दिल्ली। दिल्ली सरकार से पूर्ण वित्त पोषित दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) के 12 कॉलेजों में शिक्षकों का गंभीर संकट लगातार गहराता जा रहा है। इन कॉलेजों में स्वीकृत पदों की तुलना में आधे से भी कम स्थायी शिक्षक कार्यरत हैं, जिससे शैक्षणिक व्यवस्था पर सीधा असर पड़ रहा है। डीयू के 12 वित्त पोषित कॉलेजों में स्वीकृत 1508 पदों के मुकाबले केवल 528 स्थायी शिक्षक हैं, जबकि 980 पद लंबे समय से रिक्त पड़े हैं।

    सेवानिवृत्ति और एडहॉक शिक्षकों के अन्य कॉलेजों व विश्वविद्यालयों में स्थायी रूप से चयनित होने के कारण वास्तविक रिक्तियों की संख्या एक हजार से अधिक हो चुकी है। इन कॉलेजों में डीडीयू कॉलेज, महाराजा अग्रसेन कॉलेज, केशव महाविद्यालय और भगिनी निवेदिता कॉलेज जैसे संस्थान शामिल हैं, जहां शिक्षकों की कमी सबसे अधिक है।

    डीयू में क्यों बढ़ी शिक्षकों की अतिरिक्त आवश्यकता?

     

    चार वर्षीय स्नातक पाठ्यक्रम के लागू होने और शैक्षणिक सत्र 2025-26 में छात्रों के चौथे वर्ष में प्रवेश के बाद शिक्षकों की अतिरिक्त आवश्यकता और बढ़ गई है। इसके बावजूद स्थायी नियुक्ति तीन वर्षीय पाठ्यक्रम के आधार पर ही की गई है, जिससे कॉलेजों को बड़ी संख्या में अतिथि शिक्षकों के सहारे पढ़ाई चलानी पड़ रही है। कई कॉलेजों में अतिथि शिक्षकों की संख्या 25 से 30 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है, जबकि नियमानुसार यह सीमा 10 प्रतिशत होनी चाहिए। ईडब्ल्यूएस आरक्षण को लेकर भी स्थिति स्पष्ट नहीं है।

    DU Khabar

    फोरम ऑफ अकादमिक्स फार सोशल जस्टिस (शिक्षक संगठन) के चेयरमैन प्रो. हंसराज सुमन ने बताया कि डीयू में ईडब्ल्यूएस कोटे के तहत लगभग तीन हजार अतिरिक्त छात्र सीटें बनती हैं, लेकिन अभी तक कॉलेजों को उसके अनुरूप शिक्षक पद आवंटित नहीं किए गए हैं। फोरम ने इस संबंध में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को पत्र लिखकर मांग की है कि विश्वविद्यालय को शीघ्र 25 प्रतिशत अतिरिक्त ईडब्ल्यूएस शिक्षक पद आवंटित किए जाएं।

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    उन्होंने बताया कि 46 कॉलेजों ने ईडब्ल्यूएस के कारण बढ़ी छात्र संख्या के आधार पर अतिरिक्त शिक्षकों की मांग का ब्यौरा विश्वविद्यालय को सौंप दिया है। इनमें हंसराज कॉलेज, गार्गी कॉलेज, दयाल सिंह कॉलेज, देशबंधु कॉलेज और यूसीएमएस प्रमुख हैं। हालांकि, 35 कॉलेजों से अभी आंकड़े प्राप्त नहीं हुए हैं।

    उन्होंने कहा कि ईडब्ल्यूएस के कारण रोस्टर में हुए बदलाव से एससी, एसटी और ओबीसी वर्ग के अभ्यर्थियों को सबसे अधिक नुकसान हुआ है, क्योंकि बैकलाग और शार्टफाल पद अब तक नहीं भरे गए हैं। उन्होंने मांग की कि दिल्ली सरकार के इन 12 कॉलेजों में स्थायी सहायक प्रोफेसरों की भर्ती प्रक्रिया तत्काल शुरू की जाए, क्योंकि यहां पिछले एक दशक से नियमित नियुक्तियां नहीं हुई हैं।

    कॉलेज खाली पद मौजूदा भरे हुए पद
    आचार्य नरेंद्रदेव कॉलेज 58 67
    अदिति महाविद्यालय 69 54
    बीआर ए कॉलेज 73 65
    भाष्कराचार्य कॉलेज 99 42
    भगिनी निवेदिता कॉलेज 132 33
    डीडीयू कॉलेज 120 82
    इंदिरा गांधी फिजि. कॉलेज 18 24
    केशव महाविद्यालय 116 45
    महाराजा अग्रसेन कॉलेज 123 58
    महर्षि वाल्मीकि कॉलेज 20 10
    राजगुरु कॉलेज 134 22
    सुखदेव कॉलेज 18 26
    कुल पद 980 (रिक्त पद) 528 (स्थायी शिक्षक)