भारत में चार करोड़ बच्चे मोटापे का शिकार! तनाव बढ़ा रहा मोटापा और बिगाड़ रहा भोजन की आदतें
तनाव वयस्कों के साथ-साथ बच्चों में भी मोटापे का कारण बन रहा है। पढ़ाई का दबाव और शारीरिक गतिविधि की कमी भोजन की आदतों को बिगाड़ रही है। विशेषज्ञों के ...और पढ़ें
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तनाव व्यस्कों के साथ बच्चों में भी बढ़ा रहा मोटापा। प्रतीकात्मक तस्वीर

समय कम है?
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अनूप कुमार सिंह, नई दिल्ली। लगातार तनाव केवल वयस्कों में ही नहीं बच्चों में भी मोटापा बढ़ा रहा है। यह बच्चों में वजन बढ़ाने के साथ-साथ पेट के आसपास चर्बी जमाने का काम भी कर रहा है। पढ़ाई के दबाव और प्रदर्शन के तनाव ने बच्चों की शारीरिक गतिविधियां कम कर दी हैं, भोजन की आदत बिगड़ रही है, असंतुलित आहार मोटापा बढ़ा रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार, तनाव में बच्चें ज्यादा कैलोरी, मीठे और वसा वाले भोजन का अधिक सेवन करने लगते हैं, जो मोटापे को बढ़ाता है। अंतरराष्ट्रीय अध्ययनों में सामने आया है कि तनाव से बढ़ने वाला हार्मोन कार्टिसोल शरीर के मेटाबालिज्म, भूख और वसा की स्थिति को प्रभावित कर रहा है, जिससे मोटापा बढ़ रहा है।
मेडिकल जर्नल ’फ्रंटियर्स इन एंडोक्रिनोलाजी’ 2024 में प्रकाशित अध्ययन में बताता है कि लंबे समय तक बढ़ा हुआ कार्टिसोल स्तर शरीर में ऊर्जा के उपयोग और वसा जमा होने की प्रक्रिया को प्रभावित कर देता है।
शोध के अनुसार, लगातार तनाव की स्थिति में शरीर अधिक ऊर्जा को वसा को संग्रहित करने की प्रवृत्ति बढ़ जाती है, जो पेट के आसपास चर्बी को बढ़ा देती है। ‘न्यूट्रिशन्स’ मेडिकल जर्नल में प्रकाशित अध्ययन में बताया गया है कि तनाव का सीधा असर खाने की आदतों पर पड़ता है।
‘मेडिसिन्स’ जर्नल 2025 में प्रकाशित शोध में बताया गया कि तनाव से बढ़ा कार्टिसोल भूख बढ़ाने के साथ इंसुलिन संवेदनशीलता को भी प्रभावित करता है, जिससे वसा जमा होने की प्रक्रिया को तेज हो जाती है।
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के मेडिसिन विभाग के प्रोफेसर डॉ. नवल किशोर विक्रम भारतीय आबादी में मोटापा, मेटाबालिक सिंड्रोम और जीवनशैली कारकों के प्रभाव पर शोध कर रहे हैं।
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इसके अनुसार मोटापा केवल अधिक कैलोरी लेने से ही नहीं बढ़ता, बल्कि तनाव, नींद की कमी और शारीरिक गतिविधि की कमी भी इसमें बड़ी भूमिका निभाती है। उनका शोध समूह यह समझने का प्रयास कर रहा है कि हार्मोनल बदलाव, तनाव और जीवनशैली मिलकर किस प्रकार मोटापे के जोखिम को प्रभावित करते हैं।
बच्चों में मोटापे की स्थिति
भारत में बचपन का मोटापा एक उभरती सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती बनता जा रहा है। वर्ल्ड ओबेसिटी एटलस 2026 के अनुसार 2025 में भारत में लगभग 4.1 करोड़ बच्चे और किशोर (5–19 वर्ष) अधिक वजन या मोटापे से प्रभावित थे। इनमें लगभग 1.49 करोड़ बच्चे 5–9 वर्ष और 2.64 करोड़ किशोर 10–19 वर्ष आयु वर्ग के शामिल हैं। इस रिपोर्ट के अनुसार भारत अब बच्चों में मोटापे की संख्या के मामले में दुनिया में दूसरे स्थान पर है।
देश और दिल्ली में मोटापे की स्थिति
राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (एनएफएचएस) के अनुसार भारत में लगभग 24 प्रतिशत महिलाएं और 23 प्रतिशत पुरुष अधिक वजन या मोटापे की श्रेणी में आते हैं। दिल्ली में यह स्थिति और गंभीर है, जहां करीब 38 प्रतिशत महिलाएं (करीब 57 लाख) और 36 प्रतिशत पुरुष (करीब 54 लाख) अधिक वजन या मोटापे से प्रभावित पाए गए।
विशेषज्ञों के अनुसार, शहरी जीवनशैली, तनाव, अनियमित भोजन और शारीरिक गतिविधि की कमी इसके प्रमुख कारण हैं। विशेषज्ञों के अनुसार तनाव, नींद की कमी, असंतुलित आहार और शारीरिक गतिविधि की कमी भी वजन बढ़ा रहे हैं।