युवक की एड्रीनल ग्रंथि में 24 सेंटीमीटर और ढाई किलो वजनी ट्यूमर, दिल्ली में सर्जरी कर डॉक्टर ने बचाई जान
सर गंगाराम अस्पताल के डॉक्टरों ने एक युवक की एड्रीनल ग्रंथि से 24 सेंटीमीटर लंबा और ढाई किलो वजनी दुर्लभ ...और पढ़ें

सर गंगाराम अस्पताल में ढाई किलो वजनी एड्रीनल फियोक्रोमोसायटोमा ट्यूमर की सफल सर्जरी।
HighLights
24 सेमी लंबा, 2.5 किलो वजनी एड्रीनल ट्यूमर निकाला गया।
सर गंगाराम अस्पताल के डॉक्टरों ने की सफल ओपन सर्जरी।
फियोक्रोमोसायटोमा ट्यूमर से मरीज को मिली नई जिंदगी।
जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। एड्रीनल ग्रंथि में 24 सेंटीमीटर लंबा और करीब ढाई किलो वजन का ट्यूमर था, दिल की धड़कन तेज हो जाती थी और असहनीय सर दर्द ने जीना मुश्किल कर दिया था। सर गंगाराम अस्पताल के डॉक्टरों ने कठिन सर्जरी से दुर्लभ फियोक्रोमोसायटोमा ट्यूमर निकाल उसकी जान बचाई। ट्यूमर इतना बड़ा हो चुका था कि पैंक्रियाज और स्प्लीन से चिपक गया था। इसकी जटिल स्थिति को देखते हुए डॉक्टरों ने न्यूनतम इनवेसिव तकनीक के बजाय ओपन सर्जरी का निर्णय लिया।
अस्पताल के यूरो-आंकोलाजिस्ट और रोबोटिक सर्जन डॉ. अश्विन माल्या ने बताया मरीज करीब छह महीने से पेट दर्द, वजन कम होने, बढ़े ब्लड प्रेशर और ब्लड शुगर की समस्या से परेशान था। शुरुआत में उसने लक्षणों को गंभीरता से नहीं लिया और हर्बल उपचार पर निर्भर रहा। बाद में उसके डाक्टर रिश्तेदार को स्थिति सामान्य नहीं लगी तो उन्होंने अल्ट्रासाउंड कराने की सलाह दी। जांच में एड्रीनल ग्रंथि में बड़े ट्यूमर का पता चला।
ट्यूमर का आकार असामान्य रूप से बड़ा
डॉ. अश्विन माल्या ने बताया कि ट्यूमर का आकार असामान्य रूप से बड़ा था और आसपास की महत्वपूर्ण संरचनाओं से चिपका हुआ था। ऐसे में इसे सुरक्षित तरीके से निकालना चुनौतीपूर्ण था। सर्जरी में जीआई सर्जन डॉ. सुरेश सिंघवी ने सहयोग किया। एंडोक्राइनोलाजिस्ट डॉ. सेतु गुप्ता ने आपरेशन से पहले मरीज को चिकित्सकीय रूप से स्थिर किया, जबकि एनेस्थीसियोलाजिस्ट डॉ. नितिन सेठी और उनकी टीम ने आपरेशन के दौरान लगातार निगरानी रखी।
डॉ. माल्या के अनुसार एड्रीनल ग्रंथियां दोनों किडनी के ऊपर स्थित होती हैं और शरीर में कई महत्वपूर्ण हार्मोन बनाती हैं। फियोक्रोमोसायटोमा में कैटेकोलामाइन हार्मोन का अधिक उत्पादन हो सकता है। इससे अचानक ब्लड प्रेशर बढ़ना, सिरदर्द, दिल की धड़कन तेज होना और अधिक पसीना आना जैसे लक्षण हो सकते हैं।
ट्यूमर का इलाज लैप्रोस्कोपिक या रोबोटिक सर्जरी से संभव
उन्होंने बताया कि अधिकांश एड्रीनल ट्यूमर का इलाज लैप्रोस्कोपिक या रोबोटिक सर्जरी से संभव है, लेकिन हार्मोन बनाने वाले ट्यूमर में आपरेशन से पहले मरीज को चिकित्सकीय रूप से स्थिर करना जरूरी होता है। दवाओं के बावजूद ब्लड प्रेशर नियंत्रित न होना, बिना वजह पोटैशियम कम होना, बार-बार दिल की धड़कन तेज होना या एड्रीनल ग्रंथि में गांठ मिलना ऐसे संकेत हैं, जिन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
