'पहले लगा भूकंप आया, देखा तो जमींदोज हो चुकी थी इमारत', सीमापुरी हादसे के बाद लोगों ने बताया हाल
सीमापुरी में इमारत गिरने से तेज धमाके और धूल के गुबार से लोगों को भूकंप का अहसास हुआ। स्थानीय लोगों ...और पढ़ें
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पूर्वी दिल्ली के सीमापुरी इलाके में 5 मंजिला मकान जमींदोज।
HighLights
तेज धमाके और धूल से लोगों को भूकंप का अहसास हुआ।
स्थानीय लोगों ने पहले चार लोगों को मलबे से बाहर निकाला।
पुलिस, दमकल और एनडीआरएफ ने मिलकर बचाव अभियान चलाया।
मोहम्मद साकिब, नई दिल्ली। सीमापुरी की घनी आबादी में बुधवार को इमारत के गिरते ही तेज धमाके जैसी आवाज के साथ पूरे इलाके में धूल और धुएं का गुबार छा गया। कुछ पल के लिए लोगों को लगा कि मानो भूकंप आ गया हो। धूल छंटने के बाद जब लोगों की नजर गिरी इमारत पर पड़ी तो चीख-पुकार मच गई। अपनों के मलबे में दबे होने की आशंका में लोग बदहवास होकर घटनास्थल की ओर दौड़ पड़े। राहत और बचाव दल के पहुंचने से पहले ही स्थानीय लोगों ने हिम्मत दिखाते हुए मलबे में फंसे चार लोगों को बाहर निकाला और अस्पताल पहुंचाया।
घटना के तुरंत बाद संकरी गली में लोगों की भीड़ जमा हो गई। कोई मलबे में अपनों को तलाश रहा था तो कोई हाथों से मलबा हटाकर अंदर दबे लोगों तक पहुंचने की कोशिश कर रहा था। कुछ ही देर में पुलिस और दमकल की टीमें मौके पर पहुंचीं। इसके बाद राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) की टीम ने भी मोर्चा संभाला। अत्याधुनिक उपकरणों और प्रशिक्षित जवानों की मदद से मलबे में दबे लोगों की तलाश शुरू की गई।
मलबे से हर हलचल पर थम जाती थीं लोगों की सांसें
रेस्क्यू अभियान के दौरान घटनास्थल पर मौजूद लोगों की निगाहें लगातार दमकल और एनडीआरएफ के जवानों पर टिकी रहीं। जैसे ही मलबे के किसी हिस्से से किसी व्यक्ति के दबे होने का संकेत मिलता या कोई घायल बाहर निकाला जाता, भीड़ उसे देखने के लिए आगे बढ़ जाती। जिन परिवारों के अपने मलबे में फंसे होने की आशंका थी, उनके चेहरे पर चिंता साफ नजर आ रही थी। कई लोग लगातार मोबाइल फोन से स्वजन से संपर्क करने की कोशिश करते रहे।
ईदगाह की तरफ से मिला खुला रास्ता
हादसे के बाद राहत और बचाव कार्य में सबसे बड़ी चुनौती संकरी गली थी। हालांकि ईदगाह की तरफ से खुला रास्ता होने के कारण बचाव दल को राहत मिली। इसी रास्ते से दमकल की गाड़ियों और अन्य राहत उपकरणों को घटनास्थल तक पहुंचाने में मदद मिली। स्थानीय लोगों ने भी बचाव दल को रास्ता उपलब्ध कराने और भीड़ नियंत्रित करने में सहयोग किया।
देर रात तक चलता रहा रेस्क्यू
हादसे के बाद देर रात तक रेस्क्यू अभियान चलता रहा। इस दौरान आसपास के घरों में रहने वाले लोगों में हादसे को लेकर डर बना रहा। कई लोग अपने घरों से बाहर निकलकर बचाव अभियान देखते रहे।
क्या बोले चश्मदीद
हादसे के समय मैं गली के बाहर खड़ा था। अचानक तेज आवाज हुई और कुछ ही पल में धूल का गुबार छा गया। लगा कि भूकंप आ गया है। जब वह इमारत की तरफ भागे तो वहां चारों ओर चीख-पुकार मची हुई थी। - बाबू खान
जीवन में ऐसा नजारा पहले कभी नहीं देखा। कुछ समझ नहीं आ रहा था कि क्या करें। चारों तरफ धुआं था और लोग मदद के लिए चिल्ला रहे थे। स्थानीय लोगों की तत्परता से राहत दल के पहुंचने से पहले ही चार लोगों को मलबे से बाहर निकाल लिया गया। - इस्माइल
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