विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

सत्य निकेतन से सैदुलाजाब तक मौत का मंजर, दिल्ली में इस साल जर्जर इमारतों की भेंट चढ़ गईं 30 जिंदगियां

Published: Wed, 09 Sep 2026 12:02 PM (IST)

दिल्ली में जर्जर इमारतों का खतरा एक बार फिर सामने आया है, इस साल इमारतों से जुड़ी घटनाओं में 30 ...और पढ़ें

सत्य निकेतन में इमारत गिरने से सात लाेगों की मौत हो गई। फोटो: आर्काइव

सत्य निकेतन में इमारत गिरने से सात लाेगों की मौत हो गई। फोटो: आर्काइव

HighLights

  1. इस साल इमारतों से जुड़ी घटनाओं में 30 लोगों की मौत

  2. सत्य निकेतन हादसे में 7 लोगों की जान चली गई

  3. दमकल विभाग को 330 से अधिक कॉल मिलीं

जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। राजधानी में जर्जर और असुरक्षित इमारतों का खतरा एक बार फिर सत्य निकेतन हादसे के बाद सामने आया है। इस हादसे में सात लागों की मौत हुई, जिसमें पांच छात्र शामिल थे। इमारत गिरने से मौतों का यह आंकड़ा नया नहीं है।

दिल्ली अग्निशमन विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, इस साल एक जनवरी से छह सितंबर तक इमारतों से जुड़ी समस्याओं को लेकर दमकल विभाग को 330 से अधिक कॉल मिलीं।

इन घटनाओं में 30 लोगों की मौत हुई, जबकि 120 लोग घायल हुए। हालांकि, पिछले वर्ष की तुलना में घटनाओं और हताहतों की संख्या में कमी आई है, लेकिन सत्य निकेतन जैसी घटनाएं चिंता बढ़ाने वाली हैं।

इस साल इमारतों से जुड़ी 330 से अधिक कॉल

दमकल विभाग के अधिकारी के मुताबिक, पिछले साल इसी अवधि में इमारतों से संबंधित 446 कॉल मिली थीं। इन घटनाओं में 46 लोगों की मौत हुई थी और 155 लोग घायल हुए थे।

इस तरह इस साल कॉल की संख्या के साथ-साथ मृतकों और घायलों की संख्या में भी कमी आई है। इन आंकड़ों में केवल बड़ी इमारतों के गिरने की घटनाएं शामिल नहीं हैं।

इनमें इमारतों में दरार आने, ईंट या मलबा गिरने, छत का हिस्सा गिरने और अन्य तरह की आशंकाओं से जुड़ी एहतियाती कॉल भी शामिल हैं। कई मामलों में दमकल कर्मियों ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया और आवश्यक कार्रवाई की।

सैदुलाजाब में इमारत गिरने से हुई थी 6 की मौत

इसके बावजूद इस साल राजधानी में कई ऐसी घटनाएं हुईं, जिनमें लोगों को जान गंवानी पड़ी। 30 मई को सैदुलाजाब में इमारत गिरने से छह लोगों की मौत हो गई थी।

वहीं जून में मलका गंज के सब्जी मंडी इलाके में मकान गिरने और करावल नगर में चार मंजिला इमारत ढहने की घटनाएं भी सामने आईं।

वहीं तीन जून को हौज रानी में बेड-एंड-ब्रेकफास्ट रेस्टारेंट में लगी भीषण आग ने भी इमारतों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए थे। हादसे में 23 लोगों की मौत हुई थी, जिनमें 11 विदेशी नागरिक शामिल थे।

सत्य निकेतन हादसे ने झकझोरा

इमारतों से जुड़े हादसों की यह कड़ी छह सितंबर को सत्य निकेतन में हुए हादसे तक पहुंची। दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस के पास पीजी के रूप में इस्तेमाल हो रही पांच मंजिला इमारत दोपहर करीब 1:30 बजे भरभराकर गिर गई।

हादसे के बाद मलबे में फंसे लोगों को निकॉलने के लिए दिल्ली पुलिस, दिल्ली फायर सर्विस, एनडीआरएफ और दिल्ली आपदा प्रबंधन प्राधिकरण समेत कई एजेंसियों ने संयुक्त अभियान चलाया।

27 घंटे से अधिक समय तक चले बचाव अभियान में मलबे से 12 लोगों को निकॉल गया। इनमें सात की मौत हो गई, जबकि पांच घायल हुए। सोमवार शाम करीब 5:10 बजे अभियान पूरा होने के बाद सभी बचाव दल मौके से हटे।

यह भी पढ़ें- दिल्ली में अवैध निर्माण पर चलेगा बुलडोजर, सत्य निकेतन हादसे के बाद CM रेखा गुप्ता ने दिया एक्शन का आदेश