सुई-धागे से तिरंगे तक... 60 साल से सदर बाजार में बुनी जा रही देशभक्ति की कहानी
स्वतंत्रता दिवस के नजदीक आने के साथ सदर बाजार देशभक्ति के रंगों में सराबोर है, जहां भारत हैंडलूम क्लॉथ हाउस जैसे ऐतिहासिक प्रतिष्ठान राष्ट्रीय भावना क ...और पढ़ें

स्वतंत्रता दिवस के नजदीक आने के साथ सदर बाजार देशभक्ति के रंगों में सराबोर है। इमेज एआई
HighLights
सदर बाजार स्वतंत्रता दिवस की तैयारियों में देशभक्ति के रंगों से सराबोर है।
भारत हैंडलूम क्लाथ हाउस 1962 से राष्ट्रीय भावना का केंद्र बना।
इस बार 25-30 लाख तिरंगों की ऐतिहासिक आपूर्ति की जा चुकी।
जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। स्वतंत्रता दिवस के नजदीक आने के साथ सदर बाजार देशभक्ति के रंगों में सराबोर होता जा रहा है। बाजार की संकरी गलियों में बिखरी केसरिया, सफेद और हरी छटा, हवा में तैरती खादी की सोंधी महक और सिलाई मशीनों की गूंजती आवाज इस बात की गवाही दे रही है कि स्वतंत्रता दिवस की तैयारियां जोरो पर है।
थान के थान कपड़े दीवारों के सहारे टिके हैं और कारीगर अपनी सुई- धागे के जादू से राष्ट्र के स्वाभिमान को नया रूप देने में दिन-रात जुटे हुए हैं।
इस पूरे देशभक्ति पूर्ण उत्सव का मुख्य केंद्र बिंदु है 1962 के भारत- चीन युद्ध के दौर से चला आ रहा प्रसिद्ध भारत हैंडलूम क्लाथ हाउस। इस दुकान की नींव केवल ईंट- गारे से नहीं, बल्कि आजादी के दीवानों के जज्बे से रखी गई थी। दुकान के संचालक अब्दुल मलिक अपनी भावुक स्मृतियों को साझा करते हुए बताते हैं कि उनके पूर्वजों का नाता स्वतंत्रता संग्राम के दिनों से रहा है।
उस दौर में बंगाल से आने वाली खादी से राष्ट्रीय ध्वज तैयार किया जाता था। बीते वर्ष 29 दिसंबर 2025 को 81 वर्ष की आयु में इस दुनिया को अलविदा कह चुके अब्दुल गफ्फार जिन्हें प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने हर घर तिरंगा अभियान में फ्लैग अंकल के नाम से पुकारा था। आज उनके जाने के बाद परिवार की तीसरी पीढ़ी इस विरासत को आगे बढ़ा रही है।
अब्दुल मलिक के अनुसार 1962 का युद्ध हो आपातकाल का दौर कारगिल की बर्फानी चोटियों का संग्राम, अन्ना आंदोलन की ज्वाला हो या फिर हर घर तिरंगा का जन-आंदोलन जब- जब राष्ट्रभक्ति का जज्बा उफना है, उसकी पहली अनुगूंज सदर बाजार के इसी प्रांगण में सुनाई दी है।
इस बार स्वतंत्रता संग्राम की 80 वीं वर्षगांठ पर लगभग 25 से 30 लाख तिरंगों की ऐतिहासिक आपूर्ति की जा चुकी है। हालांकि, पिछले कुछ दिनों की रिमझिम बारिश ने बाजार की रफ्तार पर थोड़ा अंकुश जरूर लगाया है, लेकिन कारीगरों और देशभक्तों के बुलंद हौसलों के आगे यह नमी बहुत छोटी नजर आती है।
बाजार के अन्य व्यापारी राजेश गुप्ता और इरशाद खान कहते हैं कि अगस्त का यह पखवाड़ा व्यापार नहीं, बल्कि राष्ट्रीय भावना का उत्सव है। इस दौरान दुकानों के डिस्प्ले में तिरंगे, देशभक्ति के बैज, कलाई के रिबन और गाड़ियों के डैशबोर्ड फ्लैग ही छाए रहते हैं।