CJP के विरोध-प्रदर्शन के दौरान रुचिका सिंह पर क्यों हुई FIR? सौरभ दास के बयान से उठे कई सवाल
नीट पेपर लीक के खिलाफ जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ कथित अभद्र टिप्पणी के लिए रुचिका सिंह पर एफआईआर दर्ज की गई है। ...और पढ़ें

रुचिका सिंह पर पीएम मोदी के खिलाफ अभद्र टिप्पणी का आरोप।
HighLights
रुचिका सिंह पर पीएम मोदी के खिलाफ अभद्र टिप्पणी का आरोप।
जंतर-मंतर पर नीट पेपर लीक विरोध प्रदर्शन के दौरान घटना।
पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर जांच दिल्ली पुलिस को सौंपी।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। नीट पेपर लीक के खिलाफ जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ कथित अभद्र टिप्पणी करने वाली रुचिका सिंह के मामले ने राजनीतिक और सोशल मीडिया बहस छेड़ दी है।
पूरा मामला क्या है?
23 जुलाई 2026 को दिल्ली के जंतर-मंतर पर नीट पेपर लीक के विरोध में बड़े पैमाने पर छात्र प्रदर्शन हुए। इसी दौरान रुचिका सिंह का एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें उन्होंने प्रधानमंत्री के खिलाफ आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया था। वीडियो के तेजी से फैलने के बाद शिकायत दर्ज कराई गई, जिसमें आरोप लगाया गया कि इस भाषा से प्रधानमंत्री के संवैधानिक पद की गरिमा को ठेस पहुंची है और समाज में वैमनस्य फैल सकता है।
दिल्ली पुलिस करेगी जांच
शिकायत के आधार पर 29 जुलाई को गौतमबुद्ध नगर (नोएडा) के एक्सप्रेसवे थाने में जीरो एफआईआर दर्ज की गई। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 352, 353(1) और 356(1) के तहत मामला दर्ज किया। चूंकि घटना संसद मार्ग थाना क्षेत्र में हुई थी, इसलिए मामला दिल्ली पुलिस को ट्रांसफर कर दिया गया। अब दिल्ली पुलिस वीडियो और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर जांच कर रही है।
सौरव दास का तीखा हमला
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर वकील सौरव दास ने लिखा, “रुचिका सिंह के खिलाफ आपराधिक कानूनों का इस्तेमाल पूरी तरह अस्वीकार्य है। अभद्र भाषा अपने आप में किसी आपराधिक मुकदमे का आधार नहीं बनती। लोकसभा के करीब 50 प्रतिशत सांसदों पर आपराधिक मामले दर्ज हैं, जिनमें लगभग 100 भाजपा के हैं। पुलिस को अपनी ऊर्जा उनके मामलों पर लगानी चाहिए, न कि 25 साल की एक युवती के पीछे। युवाओं का उत्पीड़न तुरंत बंद होना चाहिए।”
अभिव्यक्ति की आजादी बनाम पद की गरिमा
इस मामले ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और संवैधानिक पदों की गरिमा के बीच संतुलन को लेकर नई बहस छेड़ दी है। एक पक्ष कार्रवाई की मांग कर रहा है, जबकि दूसरे पक्ष का कहना है कि इसे राजनीतिक विरोध के रूप में देखा जाना चाहिए। फिलहाल मामला जांच के अधीन है।