DGGI के तीन समन ठुकराना पड़ा भारी, पंकज जैन की अपील खारिज; सात दिन की कैद बरकरार
जीएसटी इंटेलिजेंस के समन की अनदेखी करने वाले कारोबारी पंकज जैन को कोर्ट से राहत नहीं मिली। पटियाला हाउस कोर्ट ने उनकी सात दिन की साधारण कैद की सजा को ...और पढ़ें

जीएसटी इंटेलिजेंस के समन की अनदेखी करने वाले कारोबारी पंकज जैन को कोर्ट से राहत नहीं मिली।
HighLights
कारोबारी पंकज जैन की सात दिन की जेल बरकरार।
डीजीजीआइ के तीन समन की अनदेखी का मामला।
पटियाला हाउस कोर्ट ने अपील खारिज की।
जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। जीएसटी इंटेलिजेंस महानिदेशालय (डीजीजीआइ) की जांच में शामिल होने के लिए जारी तीन समन की अनदेखी करने वाले कारोबारी पंकज जैन को कोर्ट से राहत नहीं मिली। पटियाला हाउस स्थित अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सौरभ प्रताप सिंह लालेर ने उनकी अपील खारिज करते हुए सात दिन की साधारण कैद की सजा बरकरार रखी।
हालांकि, अदालत ने ट्रायल कोर्ट के उस आदेश को गलत ठहराया, जिसमें अपील के अधिकार को लेकर पुराने सीआरपीसी के प्रविधान लागू किए गए थे। अदालत ने कहा कि तीन बार समन की अवहेलना के बाद महज 500 रुपये का जुर्माना लगाना उचित नहीं होगा।
इससे ऐसा संदेश जाएगा कि जांच एजेंसी के समन की अनदेखी की कीमत केवल मामूली जुर्माना है। कोर्ट ने माना कि सात दिन की सजा कानून के दायरे में है और पंकज जैन के लगातार जांच से दूर रहने को देखते हुए न तो अवैध है और न अत्यधिक। कोर्ट ने अपील को सुनवाई योग्य माना, लेकिन सजा में हस्तक्षेप से इन्कार कर दिया। वहीं, प्रोबेशन और जुर्माने में सजा बदलने की मांग भी खारिज कर दी।
पंकज जैन को ट्रायल कोर्ट ने आइपीसी की धारा 174 और 175 के तहत दोषी ठहराया था। दोनों धाराओं में सात-सात दिन की सजा सुनाई गई, जो साथ-साथ चलनी है। पंकज जैन ने खुद को पहली बार दोषी ठहराए जाने का हवाला देते हुए प्रोबेशन का लाभ देने या जेल की सजा को जुर्माने में बदलने की मांग की थी।
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मामला डीजीजीआइ की एक जांच से जुड़ा है। विभाग के अनुसार, पंकज जैन को जांच में शामिल होने और दस्तावेज पेश करने के लिए तीन समन भेजे गए, लेकिन वह किसी भी मौके पर पेश नहीं हुए। 2022 में विभाग ने उनके खिलाफ अदालत में शिकायत दाखिल की। अदालत ने यह भी नोट किया कि शिकायत दर्ज होने के बाद भी जैन जांच में शामिल नहीं हुए।