Trending

    विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

    दक्षिणी रिज की वन भूमि पर सड़क बनाना कितना वैध? असोला मामले में NGT ने लिया संज्ञान

    Updated: Sun, 09 Aug 2026 12:59 AM (IST)

    राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने दक्षिणी रिज के असोला गांव में वन भूमि से होकर फार्महाउसों तक सड़क बनाने के आरोप पर संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किया ...और पढ़ें

    एनजीटी ने असोला वन भूमि पर सड़क निर्माण पर नोटिस दिया।

    एनजीटी ने असोला वन भूमि पर सड़क निर्माण पर नोटिस दिया।

    HighLights

    1. एनजीटी ने असोला वन भूमि पर सड़क निर्माण पर नोटिस दिया।

    2. फार्महाउसों तक पहुंच के लिए वन भूमि का उपयोग अवैध बताया गया।

    3. बिना डायवर्जन सड़क बनाने पर याचिकाकर्ता ने सवाल उठाए।

    जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। दक्षिणी रिज के असोला गांव में अधिसूचित वन भूमि से होकर सड़क बनाए जाने के आरोप पर राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किया है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि वन भूमि को बिना वैधानिक प्रक्रिया के फार्महाउसों तक पहुंच देने के लिए सड़क के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है।

    एनजीटी ने मामले की अगली सुनवाई 15 अक्टूबर को तय की है। एनजीटी के प्रधान पीठ के अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य डा. अफरोज अहमद की पीठ ने देवेंद्र की ओर से दायर आवेदन पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया। पीठ ने याचिकाकर्ता की दलीलों पर विचार करने के बाद प्रतिवादियों को नोटिस जारी किया है।

    याचिकाकर्ता को स्वयं प्रतिवादियों को नोटिस की तामील कराने और अगली सुनवाई से कम से कम एक सप्ताह पहले सेवा का शपथपत्र दाखिल करने की अनुमति दी गई है।

    याचिकाकर्ता की ओर से बताया गया कि 24 मई 1994 को भारतीय वन अधिनियम की धारा चार के तहत अधिसूचना जारी की गई थी। इसके बाद दक्षिणी रिज के असोला गांव में वन भूमि की पहचान और सीमांकन के लिए विशेष कार्यबल गठित किया गया। वर्ष 2013 में सीमांकन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद खसरा नंबर 1274 को वन भूमि के रूप में चिह्नित किया गया। इसके बाद वन विभाग ने उक्त भूमि के चारों ओर चारदीवारी भी कर दी थी।

    याचिका में आरोप लगाया गया कि साकेत के एसडीएम ने 22 नवंबर 2021 को बी-7, बी-8 और बी-9 फार्महाउस के मालिकों की ओर से दायर आवेदनों पर आदेश जारी किया था। इसमें वन विभाग को कथित तौर पर अवरोध हटाकर फार्महाउस मालिकों को वन भूमि से होकर रास्ता उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया।

    खबरें और भी

    वन भूमि डायवर्ट किए बिना रास्ता देने पर सवाल 

    याचिकाकर्ता ने एनजीटी के समक्ष कहा कि संबंधित वन भूमि का अब तक गैर-वन उपयोग के लिए डायवर्जन नहीं हुआ है। ऐसे में निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन किए बिना वन क्षेत्र से होकर रास्ता उपलब्ध कराने की अनुमति नहीं दी जा सकती। याचिका में यह आशंका भी जताई गई कि यदि एक बार इस तरह रास्ता देने की अनुमति दी गई तो अन्य फार्महाउस मालिक भी वन क्षेत्र से होकर अपने आवागमन के लिए रास्ते की मांग कर सकते हैं।