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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Nov 25, 2022 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

AIIMS Ransomware Attack: एम्स साइबर अटैक मामले में दो टेक्निकल कर्मचारी निलंबित, तीसरे दिन भी काम-काज प्रभावित

By Ranbijay Kumar SinghEdited By: Aditi Choudhary
Updated: Fri, 25 Nov 2022 09:08 AM (IST)

AIIMS Ransomware Attack दिल्ली के एम्स के ई-हॉस्पिटल सर्वर पर साइबर हमला हुआ है। तीन दिन बाद भी सर्वर बहाल नहीं हो पाया है जिसके कारण एम्स में ओपीडी नमूना संग्रह सेवाओं के अलावा अन्य सभी सेवाएं मसलन ऑपरेशन प्रक्रिया भी बुरी तरह प्रभावित हुई है।

AIIMS Ransomware Attack: एम्स साइबर अटैक मामले में दो टेक्निकल कर्मचारी निलंबित, तीसरे दिन भी काम-काज प्रभावित
AIIMS Ransomware Attack: एम्स साइबर अटैक मामले में दो टेक्निकल कर्मचारी निलंबित, तीसरे दिन भी काम-काज प्रभावित

नई दिल्ली, राज्य ब्यूरो। दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) के सर्वर पर रैनसमवेयर अटैक की घटना से संस्थान के सर्वर की साइबर सुरक्षा और उसकी निगरानी व्यवस्था को लेकर बड़े सवाल उठ रहे हैं। इसमें विभागीय लापरवाही की बात भी सामने आ रही है। यही वजह है कि एम्स के कंप्यूटर फैसिलिटी विभाग में कार्यरत दो कंप्यूटर एनालिस्ट निलंबित किए गए हैं।

विभाग के फैकल्टी प्रभारी की रिपोर्ट पर एम्स प्रशासन ने दो कंप्यूटर एनालिस्ट को निलंबित किया है। इस कार्रवाई को लेकर एम्स प्रशासन ने चुप्पी साध रखी है। इस वजह से दोनों कर्मचारियों के निलंबन का कारण स्पष्ट नहीं हो पाया है। वहीं, दिल्ली पुलिस ने रैंसमवेयर हमले के मामले में अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है।

कंप्यूटर फैसिलिटी विभाग में नियुक्त हैं नर्स

एम्स के कंप्यूटर फैसिलिटी विभाग में तैनात कुछ कर्मचारियों की तकनीकी दक्षता पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। एम्स के सर्वर पर मरीजों के इलाज और शोध से जुड़े महत्वपूर्ण डाटा स्टोर होने के बावजूद कंप्यूटर फैसिलिटी विभाग में कंप्यूटर के कुछ विशेषज्ञों के अलावा 30 से 35 नर्सिंग कर्मचारी भी नियुक्त हैं, जिन्हें कंप्यूटर सिस्टम से जुड़ी खास जानकारी नहीं होती।

सर्वर डाउन होने से काम-काज प्रभावित

बता दें कि एम्स में डिजिटल सेवाएं ठप होने के कारण ओपीडी, नमूना संग्रह सेवाओं के अलावा अन्य सभी सेवाएं, मसलन ऑपरेशन प्रक्रिया भी बुरी तरह प्रभावित हुई है। दो दिनों से किसी नए मरीज को न तो ओपीडी में देखा गया और न ही आइपीडी में भर्ती किया जा सका। सिर्फ पुराने मरीजों को ही उनके पुराने पर्चे पर लिखे यूएचआइडी नंबर से पर्ची बनाकर देखा गया। फिलहाल ओपीडी, इमरजेंसी और लैब सहित कई सेवाओं को मैनुअली कर दिया गया है।

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