कौन हैं महेश भागचन्दका, जिन्हें राम मंदिर ट्रस्ट में मिली बड़ी जिम्मेदारी? लिख चुके हैं अशोक सिंघल की जीवनी
महेश भागचन्दका (Mahesh Bhagchandka) को श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का कोषाध्यक्ष और ट्रस्टी नियुक्त किया गया है। वे अशोक ...और पढ़ें

श्रीराम जन्मभूमि ट्रस्ट में महेश भागचन्दका (Mahesh Bhagchandka) को मिली बड़ी जिम्मेदारी। (एआई एडिटेड इमेज)
HighLights
महेश भागचन्दका श्रीराम जन्मभूमि ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष और ट्रस्टी बने।
अशोक सिंहल फाउंडेशन के अध्यक्ष, राम वन गमन पथ पर कार्यरत।
अशोक सिंहल की जीवनी 'हिन्दुत्व के पुरोधा' के लेखक भी हैं।
जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के रिक्त तीन सदस्यों के पद पर बुधवार को नियुक्ति में एक महेश भागचन्दका (Mahesh Bhagchandka) भी हैं। उन्हें ट्रस्टी के साथ ट्रस्ट का कोषाध्यक्ष नियुक्त किया गया है।
दिल्ली के भागन्दका अशोक सिंहल फाउंडेशन के अध्यक्ष हैं। उन्होंने राम गमन पथ में स्थलों के रजकण लेकर सरकारों व समाज के सहयोग से विकसित कराने की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। साथ ही कई सामाजिक, धार्मिक आयोजन से निरंतर जुड़े हुए हैं। उनका उल्लेख विहिप के पूर्व अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक सिंहल के परिवार के सदस्य के रूप में होती है।
आइए बताते हैं उनके जीवन के बारें में
नाम: महेश भागचन्दका
जन्म तिथि: 1 अगस्त 1958
शिक्षा: बी.कॉम., कलकत्ता विश्वविद्यालय
महेश भागचन्दका निम्नलिखित संस्थाओं एवं दायित्वों से सक्रिय रूप से जुड़े हुए हैं
- ट्रस्टी - अशोक सिंघल फाउंडेशन
- ट्रस्टी - अशोक सिंघल वैदिक संस्थान
- ट्रस्टी - M2K फाउंडेशन
- सदस्य, गवर्निंग काउंसिल वर्ल्ड हिन्दू इकोनॉमिक फोरम
- अध्यक्ष - हिन्दू इकोनामिक फोरम, दिल्ली चैप्टर
अशोक सिंघल की जीवनी के लेखक हैं भागचन्दका
महेश भागचन्दका 'हिन्दुत्व के पुरोधा' पुस्तक के लेखक हैं, जो अशोक सिंघल की जीवनी है। यह पुस्तक हिन्दी एवं अंग्रेजी दोनों भाषाओं में प्रकाशित हो चुकी है।
वर्तमान में वे विभिन्न सामाजिक व राष्ट्रहित के कार्यों में सक्रिय रूप से संलग्न हैं। इनमें हरियाणा के गुरुग्राम में अशोक सिंघल वैदिक विश्वविद्यालय की स्थापना का महत्वपूर्ण कार्य भी शामिल है।
महेश भागचन्दका कई अन्य सामाजिक संगठनों से भी जुड़े हुए हैं। वे बाल्यकाल से ही स्वयंसेवक रहे हैं। उन्हें ऐतिहासिक व आध्यात्मिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण राम जन्मभूमि मंदिर निर्माण भूमि पूजन तथा श्री राम लला प्राण प्रतिष्ठा समारोह में सहभागिता का दुर्लभ सौभाग्य प्राप्त हुआ, जहां उन्होंने यजमान के रूप में पवित्र अनुष्ठानों में भाग लिया।
श्रीराम की वन गमन यात्रा से जुड़े तीर्थ स्थलों पर कर रहे काम
वर्तमान में वह भगवान श्रीराम की वन गमन यात्रा से जुड़े 292 पवित्र तीर्थ स्थलों के दस्तावेजीकरण व संरक्षण के लिए समर्पित एक अत्यंत प्रतिष्ठित और आध्यात्मिक रूप से महत्वपूर्ण पहल से गहराई से जुड़े हुए हैं। इस ऐतिहासिक व महत्वपूर्ण प्रयास के अंतर्गत, विशेष रूप से तैयार की गई काफी टेबल बुक 'मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम के दिव्य पदचिह्न' का शीघ्र ही लोकार्पण किया जाएगा।
यह पुस्तक राम वन गमन मार्ग की संकल्पना, विरासत, सांस्कृतिक धरोहर तथा उसके गहन आध्यात्मिक महत्व को समेटे हुए है। यही राम वन गमन मार्ग 'श्री राम स्तंभ' की स्थापना की प्रेरणा का आधार है।
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