मैगी में लेड के विवाद से नेस्ले इंडिया को मिला छुटकारा, 11 साल पुराने केस में दिल्ली HC से मिली राहत
दिल्ली हाई कोर्ट ने मैगी नूडल्स में लेड विवाद से जुड़े नेस्ले इंडिया के खिलाफ चल रही आपराधिक कार्यवाही को रद कर दिया है। ...और पढ़ें

मैगी में लेड विवाद से नेस्ले इंडिया को मिली राहत। फोटो: आर्काइव
HighLights
दिल्ली हाई कोर्ट ने नेस्ले के खिलाफ आपराधिक केस रद किए
मैगी में लेड की मात्रा अनुमत सीमा के भीतर पाई गई
2015 के मैगी विवाद में नेस्ले को मिली बड़ी राहत
जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। वर्ष 2015 में मैगी नूडल्स में तय सीमा से अधिक लेड पाए जाने के विवाद से जुड़े मामलों में नेस्ले इंडिया को दिल्ली हाई कोर्ट से बड़ी राहत मिली है।
हाई कोर्ट ने नेस्ले इंडिया के अधिकारियों, वितरकों, खुदरा विक्रेताओं और सप्लाई चेन से जुड़े अन्य लोगों के खिलाफ चल रही आपराधिक कार्यवाही को रद कर दिया है।
कोर्ट ने कहा कि बाद में हुई वैज्ञानिक जांच में मैगी में लेड की मात्रा तय सीमा के भीतर पाई गई, ऐसे में मुकदमों को आगे जारी रखना कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग होगा।
न्यायमूर्ति मधु जैन ने वर्ष 2015 और 2016 में जारी समन आदेशों के साथ संबंधित आपराधिक शिकायतों और उनके आधार पर शुरू हुई सभी परिणामी कार्यवाहियों को भी निरस्त कर दिया।
2015 में शुरू हुआ था विवाद
मई 2015 में देशभर में मैगी के नमूने लेने की कार्रवाई के दौरान दिल्ली के खाद्य सुरक्षा अधिकारियों ने भी नमूने लिए थे। खाद्य विश्लेषकों की रिपोर्ट में मैगी के टेस्टमेकर में लेड की मात्रा 2.5 पार्ट्स पर मिलियन (पीपीएम) की स्वीकृत सीमा से अधिक बताई गई थी।
एक शिकायत में पैकेट पर नो ऐडेड एमएसजी लिखे होने को लेकर मिसब्रांडिंग का आरोप भी लगाया गया था। इन रिपोर्टों के आधार पर खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के तहत शिकायतें दर्ज कर नेस्ले के प्रतिनिधियों, वितरकों और खुदरा विक्रेताओं के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई शुरू हुई थी।
बाद की जांच बनी राहत का आधार
याचिकाकर्ताओं ने दलील दी कि बाम्बे हाई कोर्ट ने 2015 में मैगी पर लगाए गए देशव्यापी प्रतिबंध को रद कर दिया था। अदालत ने पाया था कि जिन प्रयोगशालाओं की रिपोर्ट प्रतिबंध का आधार बनी थी, उनके पास खाद्य सुरक्षा कानून के तहत आवश्यक वैधानिक मान्यता नहीं थी।
इसके बाद मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाओं और सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में केंद्रीय खाद्य प्रौद्योगिकी अनुसंधान संस्थान (सीएफटीआरआई) में हुए परीक्षणों में लेड की मात्रा अनुमत सीमा के भीतर पाई गई।
मुकदमा जारी रखने का कोई उपयोगी उद्देश्य नहीं
दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा कि बाद की वैज्ञानिक जांच के बाद इन मामलों का मूल वैज्ञानिक आधार काफी कमजोर हो गया है। न्यायमूर्ति मधु जैन ने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में अभियोजन को जारी रखने से कोई उपयोगी उद्देश्य पूरा नहीं होगा और ऐसा करना कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग होगा।