भ्रष्टाचार के आरोपों के बीच लोकनायक अस्पताल की अधूरी इमारत होगी पूरी, बचे 25% काम के लिए निकलेगा टेंडर
लोकनायक अस्पताल में तीन साल से बंद 22 मंजिला निर्माणाधीन इमारत का काम जल्द शुरू होगा, जिसके लिए पीडब्ल्यूडी कैबिनेट नोट तैयार कर रहा है।

लोकनायक अस्पताल में तीन साल से बंद 22 मंजिला निर्माणाधीन इमारत का काम जल्द शुरू होगा
वी के शुक्ला, नई दिल्ली। लोकनायक अस्पताल में तीन साल से बंद 22 मंजिला निर्माणाधीन विवादित इमारत का शीघ्र काम शुरू होगा। पीडब्ल्यूडी इसके लिए कैबिनेट नोट तैयार कर रहा है। कैबिनेट की मंजूरी मिलने के बाद बचे हुए करीब 25 प्रतिशत काम को टेंडर कर अन्य एजेंसी से पूरा कराया जाएगा।
दरअसल इस इमारत के निर्माण को लेकर कई तरह के भ्रष्टाचार के आरोप लगे हैं। कैग रिपोर्ट में भी इस कार्य को लेकर सवाल उठाए गए हैं। इस मामले की सतर्कता जांच चल रही है जो जारी रहेगी, मगर इमारत का काम पूरा किया जाएगा। 2022-2023 से परियोजना पर काम बंद है। अब तक 75 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। यह सरकारी अस्पतालों के मामले में दिल्ली की सबसे ऊंची इमारत होगी।
सरकार की व्यय वित्त समिति (ईएफसी) ने गत दिनों इस इमारत के काम को पूरा करने को लेकर 1268.85 संशोधित प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इसस इमारत का उपयोग अस्पताल में मेडिसिन, मैटरनिटी और एडवांस्ड पीडियाट्रिक सेंटर के रूप में किया जाना है। प्रस्तावित भवन 2 बेसमेंट, ग्राउंड और 22 मंजिल का होगा।
इस इमारत काे बनाने के लिए मूल लागत 533 करोड़ रुपये थी जो बढ़कर 1,268 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। ईएफसी और प्रशासनिक स्तर पर इस इमारत के आर्बिट्रेशन अवार्ड (मध्यस्थता) और भुगतान प्रक्रियाओं में कथित गड़बड़ियों की सतर्कता जांच के आदेश दिए गए हैं। जांच इस बात पर केंद्रित है कि ठेकों में बार-बार बदलाव, लेबर-मटेरियल लागत और मध्यस्थता के जरिए भुगतान में तय नियमों का पालन हुआ था या नहीं हुआ था।
इमारत का एक हिस्सा जीबी पंत सुपर स्पेशिएलिटी अस्पताल की ओर बन रहा है जबकि दूसरा दिल्ली गेट मेट्रो स्टेशन की ओर है, मगर दोनों टावर आपस में जुड़े हुए हैं। 475 वाहन पार्किंग की क्षमता वाली इस इमारत का निर्माण अक्टूबर 2020 में शुरू हुआ था जो दिसंबर 2022 तक पूरा होना था। सरकार की योजना इसे तैयार कर 2024 तक शुरू कर देने की थी।
लोकनायक काफी पुराना अस्पताल है। वर्तमान में इस अस्पताल में 2,053 बिस्तरों की क्षमता है। यहां हर दिन सात से आठ हजार मरीजों का उपचार किया जाता है। अस्पताल की ओपीडी सफदरजंग और डा. राम मनोहर लोहिया अस्पताल (आरएमएल) के बराबर है।
ऐसे में सरकार ने इस इमारत पर काम शुरू किया था। माना जा रहा है कि नई इमारत के बाद आइसीयू बेड की संख्या 83 से बढ़कर 400 होगी, 44 अतिरिक्त आपरेशन थियेटर होंगे और कुल बिस्तरों की क्षमता चार हजार तक पहुंचेगी।

