अन्ना आंदोलन के 15 साल बाद नया मोड़... जंतर-मंतर से राजनीतिक आकार लेने लगी CJP
अमेरिका से शुरू हुआ 'काकरोच जनता पार्टी' आंदोलन अब दिल्ली के जंतर-मंतर पर राजनीतिक आकार ले रहा है। ...और पढ़ें
-1784727037690_m.webp)
अमेरिका से शुरू हुआ 'काकरोच जनता पार्टी' आंदोलन अब दिल्ली के जंतर-मंतर पर राजनीतिक आकार ले रहा है। फाइल फोटो
संतोष कुमार सिंह, नई दिल्ली। अमेरिका से आम आदमी पार्टी के पूर्व कार्यकर्ता अभिजीत दीपके द्वारा इंटरनेट मीडिया पर शुरू की गई व्यंग्यात्मक मुहिम ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ अब दिल्ली के ऐतिहासिक जंतर-मंतर पर राजनीतिक आकार लेने लगी है।

यही वह स्थान है, जहां वर्ष 2011 में भ्रष्टाचार के विरुद्ध अन्ना हजारे के आंदोलन से आप का जन्म हुआ था और कई सामाजिक कार्यकर्ताओं और अनाम चेहरों को राजनीतिक पहचान मिली थी। अब 15 वर्षों के बाद फिर उसी प्रकार से शुरू हुए एक गैर-राजनीतिक आंदोलन से नई राजनीतिक पार्टी के उदय की संभावनाएं जताई जाने लगी हैं।

भारत के मुख्य न्यायाधीश द्वारा व्यवस्था को नुकसान पहुंचाने वाले कुछ युवाओं की तुलना काकरोच से किए जाने के विरोध में दीपके ने इसी वर्ष मई में इंटरनेट मीडिया पर काकरोच जनता पार्टी नाम से अभियान शुरू किया था।

इंस्टाग्राम पर फॉलोअर्स की संख्या एक करोड़ के पार पहुंचने से उत्साहित दीपके छह जून को अमेरिका से दिल्ली आए और नीट पेपर लीक के विरोध में जंतर-मंतर पर धरना दिया, लेकिन वहां महज कुछ सौ लोग ही पहुंचे।

इसके बाद वह लखनऊ में छात्रों के चल रहे एक प्रदर्शन में शामिल होने पहुंचे, किंतु प्रदर्शनकारियों ने उन्हें बोलने तक नहीं दिया। जयपुर में तो उन पर हमला भी हो गया।

आखिरकार 20 जून से उन्होंने फिर से जंतर-मंतर पर धरना देना शुरू किया, लेकिन उम्मीद के मुताबिक भीड़ नहीं जुट सकी। इसी बीच, प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक इस आंदोलन से जुड़े और 27 जुलाई से भूख हड़ताल पर बैठ गए।

इससे यह आंदोलन चर्चा में तो आ गया, लेकिन अपेक्षित भीड़ का संकट फिर भी बना रहा। जब वांगचुक ने संसद के मानसून सत्र के पहले दिन संसद मार्च की घोषणा की, तो विपक्षी दलों को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सरकार को घेरने का यह अच्छा अवसर लगा। और वामपंथी छात्र संगठनों के साथ-साथ धीरे-धीरे मोदी विरोधी नेता भी इस मंच पर जुटने लगे।

18 जुलाई को पुलिस द्वारा वांगचुक को धरना स्थल से हटाकर सफदरजंग अस्पताल पहुंचाए जाने के बाद जंतर-मंतर पर भीड़ बढ़ने लगी। वामपंथी दलों, आम आदमी पार्टी और भीम आर्मी के अलावा समाजवादी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस तथा एनसीपी सहित अन्य दलों के प्रमुख नेता भी वहां पहुंचने लगे।
खबरें और भी

सोमवार को संसद मार्च में शामिल होने के लिए बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी पहुंचे, जिसके बाद से यह आंदोलन एक नए मोड़ पर आ गया है। वर्तमान में केंद्र सरकार के मंत्री आंदोलनकारियों से सीधे वार्ता कर रहे हैं, वहीं आंदोलनकारी अपनी शर्तें रख रहे हैं। दूसरी ओर, हाई कोर्ट के निर्देश पर सोनम वांगचुक को गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनसे भी सरकार के प्रतिनिधि बातचीत कर रहे हैं।

इस बीच, राजनीतिक दलों में आंदोलन का श्रेय लेने की होड़ मच गई है। नीट पेपर लीक मामले को लेकर कांग्रेस ने राहुल गांधी के नेतृत्व में प्रधानमंत्री आवास के बाहर अलग से प्रदर्शन किया, जिसका आम आदमी पार्टी ने विरोध किया।
-1784727511846.jpg)
हालांकि, ''कॉकरोच जनता पार्टी'' ने कांग्रेस के रुख का समर्थन कर दिया। इन पूरे घटनाक्रमों को देखते हुए आम आदमी पार्टी की तर्ज पर एक नई राजनीतिक पार्टी के गठन के कयास लगाए जा रहे हैं। हालांकि, जानकारों का मानना है कि यदि आंदोलन में अराजक तत्व हावी हुए या हिंसा की स्थिति बनी, तो इस मुहिम के राजनीतिक मंसूबों को भारी नुकसान भी पहुंच सकता है।