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    जंतर-मंतर पर हिंसा संयोग या साजिश? डिजिटल सबूतों से सामने आया पाकिस्तान-बांग्लादेश कनेक्शन

    Updated: Sun, 26 Jul 2026 08:45 PM (IST)

    जंतर-मंतर पर सीजेपी प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा की जांच डिजिटल साक्ष्यों पर आधारित है, जिसमें पाकिस्तान और बांग्लादेश से संचालित संदिग्ध डिजिटल हैंडल् ...और पढ़ें

    जंतर-मंतर पर सीजेपी प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा की जांच डिजिटल साक्ष्यों पर आधारित है। फाइल फोटो

    जंतर-मंतर पर सीजेपी प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा की जांच डिजिटल साक्ष्यों पर आधारित है। फाइल फोटो

    मोहम्मद साकिब, नई दिल्ली। जंतर-मंतर पर सीजेपी के प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा की जांच अब पूरी तरह डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर आगे बढ़ रही है। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल और क्राइम ब्रांच को अब तक मिले इलेक्ट्रानिक सबूतों से संकेत मिले हैं कि प्रदर्शन के दौरान भीड़ को भड़काने और हालात को हिंसक बनाने की कोशिश सुनियोजित तरीके से की गई थी।

    पुलिस सूत्रों के मुताबिक, जांच के दौरान मिले इनपुट्स में पाकिस्तान और बांग्लादेश से संचालित कुछ संदिग्ध डिजिटल हैंडल्स का उल्लेख सामने आया है। शुरुआती जांच में पता चला है कि करीब 10 विदेशी हैंडलर्स प्रदर्शन से जुड़े कुछ लोगों के संपर्क में थे और इंटरनेट मीडिया और एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग प्लेटफॉर्म के जरिए लगातार संदेश और निर्देश भेजे जा रहे थे।

    जांच एजेंसियां इस बात की भी पड़ताल कर रही हैं कि क्या इस पूरे घटनाक्रम के पीछे किसी विदेशी डिजिटल नेटवर्क की भूमिका थी। हालांकि, पुलिस अभी इन सभी इनपुट्स का तकनीकी और फोरेंसिक स्तर पर सत्यापन कर रही है।

    पूरे मामले की जांच के लिए स्पेशल सेल की आइएफएसओ यूनिट को विशेष जिम्मेदारी सौंपी गई है। एसीपी और इंस्पेक्टर स्तर के करीब 10 अधिकारियों की टीम ने घटनास्थल से जुटाए गए ड्रोन फुटेज, सीसीटीवी रिकॉर्डिंग, मोबाइल फोन से बनाए गए वीडियो और अन्य डिजिटल साक्ष्यों का फ्रेम-दर-फ्रेम विश्लेषण किया।

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    टीम ने घटनास्थल का दोबारा निरीक्षण कर फुटेज का मिलान भी किया, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि हिंसा शुरू होने से पहले और उसके दौरान कौन-कौन लोग सक्रिय थे और उनकी भूमिका क्या रही।

    जांच एजेंसियों के दायरे में कई अकांउट

    जांच केवल वीडियो तक सीमित नहीं रही। पुलिस ने डंप डाटा, मैनुअल सर्विलांस और डिजिटल ट्रैकिंग का भी सहारा लिया। अधिकारियों ने यह पता लगाने का प्रयास किया कि घटनास्थल से रिकार्ड किए गए वीडियो सबसे पहले किन वाट्सएप, टेलीग्राम और स्नैपचैट समूहों में साझा किए गए, उन्हें किसने आगे प्रसारित किया और वे किन लोगों तक सबसे तेजी से पहुंचे। इस डिजिटल ट्रेल के आधार पर कई ऐसे अकाउंट और संपर्क सामने आए हैं, जिनकी गतिविधियां जांच एजेंसियों के संदेह के दायरे में हैं।

    400 लोगों की वाट्सएप चैट का किया सत्यापन

    आइएफएसओ यूनिट ने अब तक करीब 400 लोगों की वाट्सएप चैट और अन्य डिजिटल बातचीत का सत्यापन किया है। जांच के दौरान कुछ ऐसे संदेश भी मिले हैं, जिनमें प्रदर्शनकारियों को आक्रामक रुख अपनाने, पुलिस का विरोध करने और टकराव बढ़ाने के लिए उकसाने जैसी बातें सामने आई हैं। पुलिस अब इन संदेशों की डिजिटल फोरेंसिक जांच करा रही है, ताकि उनकी प्रामाणिकता स्थापित होने पर उन्हें अदालत में इलेक्ट्रानिक साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत किया जा सके।

    विदेश में बैठे संदिग्ध संपर्कों से संवाद कर रहे थे प्रदर्शनकारी

    जांच एजेंसियों के सूत्रों के मुताबिक, प्रदर्शन स्थल पर मौजूद कुछ लोग लगातार विदेश में बैठे संदिग्ध संपर्कों के साथ संवाद कर रहे थे। ये लोग घटनास्थल की पल-पल की जानकारी साझा कर रहे थे और वहां से प्राप्त निर्देशों के आधार पर भीड़ को प्रभावित करने का प्रयास किया जा रहा था।

    सूत्रों के मुताबिक, यदि इन इनपुट्स की पुष्टि होती है तो यह कानून-व्यवस्था को प्रभावित करने की एक संगठित साजिश की ओर इशारा कर सकता है। इसी वजह से विदेशी कनेक्शन की जांच को भी प्राथमिकता दी जा रही है।

    एफआरएस से 216 लोगों के आपराधिक रिकॉर्ड आए सामने

    उधर, प्रदर्शन में शामिल लोगों की पहचान के लिए दिल्ली पुलिस फेस रिकग्निशन सिस्टम (एफआरएस) का भी व्यापक उपयोग कर रही है। अब तक की जांच में 216 ऐसे लोगों की पहचान की गई है, जिनका पहले से आपराधिक रिकार्ड रहा है।

    इनमें सबसे अधिक 26 लोग पश्चिमी दिल्ली, 23 उत्तर-पूर्वी दिल्ली और 22 दक्षिणी दिल्ली के बताए गए हैं, जबकि अन्य विभिन्न जिलों से जुड़े हैं। इनकी पहचान इंटरनेट मीडिया पर प्रसारित पोस्ट, सीसीटीवी फुटेज और अन्य डिजिटल रिकार्डिंग के आधार पर की गई है।

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