50 हजार रुपये का बॉन्ड, जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन नहीं: CJP के दास और रांका को किन शर्तों पर मिली जमानत?
सात दिनों की जेल के बाद सौरव दास और आशुतोष रांका ने एसईएम कोर्ट में शांति भंग न करने का ...और पढ़ें

23 अक्टूबर को सौरव और रांका को फिर से कोर्ट में पेश होना है।
HighLights
सौरव दास, आशुतोष रांका को 7 दिन बाद जमानत मिली।
50 हजार के मुचलके पर शांति भंग न करने का आश्वासन।
जंतर-मंतर पर प्रदर्शन न करने की शर्त पर रिहाई।
जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। सात दिन तक जेल काटने के बाद सौरव दास और आशुतोष रांका को एसईएम कोर्ट के समक्ष पेश करने पर उन्होेंने लिखित आश्वासन देकर कहा कि वे आगे शांति भंग करने वाला कोई भी काम नहीं करेंगे।
न्यायपालिका और विशेष कार्यपालक मजिस्ट्रेट न्यायालय पर उनका पूर्ण विश्वास है। जब तक कानून के अनुसार जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन को प्रतिबंधित करने वाला आदेश हटाया नहीं जाता, तब तक वे वहां प्रदर्शन के लिए कोई आह्वान नहीं करेंगे।
संविधान की सीमाओं के भीतर होगा प्रदर्शन
यदि भविष्य में कोई प्रदर्शन किया भी गया, तो वह पूरी तरह संविधान की सीमाओं के भीतर होगा। अदालत ने स्पष्ट किया कि यह केवल हिरासत से रिहाई का आदेश है, मामला बंद नहीं हुआ है।
जांच कानून के अनुसार जारी रहेगी। दोनों आरोपितों और उनके जमानतदारों को अगली सुनवाई 23 अक्टूबर को दोपहर तीन बजे अनिवार्य रूप से अदालत के समक्ष उपस्थित होने को कहा गया है। साथ ही उन्हें कानून-व्यवस्था बनाए रखने और बांड की सभी शर्तों का सख्ती से पालन करने का निर्देश दिया गया है।
कोर्ट ने दोनों को इन शर्तों किया रिहा
- शांति भंग नहीं करेंगे और कानून-व्यवस्था या सार्वजनिक शांति भंग करने वाली कोई गतिविधि नहीं करेंगे।
- जंतर-मंतर पर प्रदर्शन का आह्वान नहीं करेंगे, जब तक यह स्थल कानून के अनुसार डिनोटिफाई रहता है।
- यदि कोई प्रदर्शन करते हैं तो वह संवैधानिक दायरे में रहेगा।
- दोनों ने न्यायपालिका और उसकी संस्थाओं, जिसमें विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट (SEM) कोर्ट भी शामिल है, में विश्वास जताया।
- दोनों ने व्यक्तिगत मुचलका और जमानती मुचलका 50-50 हजार रुपये का भरा।
- दोनों और उनके जमानतदारों को अगली सुनवाई में उपस्थित रहना होगा।
- दोनों को हर तारीख पर कोर्ट में पेश होना होगा।
- उन्हें मुचलके और स्वैच्छिक लिखित आश्वासनों की सभी शर्तों का सख्ती से पालन करना होगा।
- कोर्ट ने माना कि इन मुचलकों और लिखित आश्वासनों से शांति और सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए जरूरी तत्काल एहतियाती उपाय पर्याप्त रूप से सुनिश्चित हो सकते हैं, इसलिए इस स्तर पर आगे की न्यायिक हिरासत जरूरी नहीं है।
यह भी पढ़ें- 'जान हाजिर है, लेकिन अब गार्डन में मेरे बिना...', दास-रांका की घर वापसी के बाद दीपके की अपील
